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पिता करुणानिधि के नाम बेटे स्टालिन का विदाई पत्र- क्या एक बार आपको अप्पा बुला सकता हूं

तमिलनाडु के हजारों लोग पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि को दे रहे श्रद्धांजलि

Danik Bhaskar | Aug 08, 2018, 06:32 PM IST
करुणानिधि-दयालु अम्माल के बेट करुणानिधि-दयालु अम्माल के बेट

- स्टालिन ने लिखा- आप जहां जाते थे, मुझे जरूर बताते थे, अब बिना बताए कहां चले गए?

- स्टालिन करुणानिधि को थलाईवार (नेता) कहते थे

चेन्नई. तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की निधन के बाद उनके बेटे एमके स्टालिन ने पिता के नाम एक भावुक पत्र ट्विटर पर पोस्ट किया। इसमें उन्होंने पूछा- ''क्या अब आपको एक बार अप्पा बुला सकता हूं? आप जहां जाते थे, मुझे जरूर बताते थे। अब, बिना बताए कहां चले गए? हमें लड़खड़ाता हुए क्यों छोड़ गए?'' स्टालिन करुणानिधि-दयालु अम्माल के बेटे हैं। 86 साल की अम्माल करुणानिधि की दूसरी पत्नी हैं।

स्टालिन ने आगे लिखा, "33 साल पहले आपने कहा था कि आपके स्मारक पर यह लिखा जाए कि वह व्यक्ति, जिसने आराम किए बिना काम किया, यहां आराम कर रहा है। क्या अब आपने तय कर लिया कि आप तमिल समाज के लिए काफी कुछ कर चुके हैं? या यह देखने के लिए कहीं छुप गए हैं कि 80 साल के सावर्जनिक जीवन में जो उपलब्धियां आपने हासिल कीं, उन्हें कोई दूसरा क्या हासिल कर पाता है? 3 जून को आपके जन्मदिन पर मैंने आपकी आधी योग्यता मांगी थी। क्या अरिगनार अन्ना की तरह आप मुझे अपना प्यार देंगे? क्योंकि, आपके प्यार के सहारे ही हम आपके अधूरे सपनों और आदर्शों को पूरा कर पाएंगे।"

बस एक बार उडनपिराप्पे कह दो : करोड़ों उडनपिराप्पे (डीएमके कार्यकताओं को करुणानिधि इसी नाम से बुलाते थे, जिसका मतलब रिश्ते में भाई होता है) की तरफ से मैं आपसे अपील करता हूं, "आप बस एक बार उडनपिराप्पे" कह दो। यह अगले 100 साल तक हमारी मदद करेगा। आपको 'अप्पा' बुलाने की जगह मैं हमेशा 'थलाईवार' (नेता) कहता रहा। क्या अब, एक बार मैं आपको 'अप्पा' बुला सकता हूं?"

डीएमके में करुणानिधि का उत्तराधिकारी कौन? स्टालिन या अलागिरी : करुणानिधि के निधन के बाद उनके उत्तराधिकारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस कड़ी में स्टालिन सबसे आगे हैं, लेकिन उनके सामने अलागिरी भी एक चुनौती हैं। स्टालिन और अलागिरी, दोनों ही करुणानिधि और दयालु अम्माल के बेटे हैं। करुणानिधि ने स्टालिन को राजनीतिक वारिस घोषित किया था, लेकिन पार्टी में अलागिरी को चाहने वालों की तादाद ज्यादा मानी जाती है। करुणानिधि ने स्टालिन के लिए पार्टी में जगह बनाई थी। इसके लिए उन्होंने कई बार अपने खास साथियों को भी किनारे कर दिया। हालांकि उन्होंने स्टालिन को स्वतंत्र रूप से पार्टी चलाने का अधिकार कभी नहीं दिया।

स्टालिन ने राज्य में नहीं, परिवार में संघर्ष किया : करुणानिधि आधुनिक दौर के बड़े नेता बनकर उभरे। उन्होंने पेरियार ईवी रामासामी, सीएन अन्नादुरई, के कामराज, एमजी रामचंद्रन और सी राजगोपालाचारी के बीच जगह बनाई। स्टालिन ने उनकी तरह शुरुआती दौर के संघर्ष का सामना नहीं किया। उन्हें विरासत में राजनीति मिली। हालांकि, स्टालिन को परिवार में जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। 2014 में अलागिरी को पार्टी से निकाल दिया गया था। इसके बाद ही स्टालिन को पार्टी में जगह मिली।