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कर्नाटक चुनाव: यूपी से आधी सीटें, आबादी भी एक तिहाई; पर मोदी ने ताकत बराबर लगाई

भाजपा ने पहली बार 10 लाख अर्द्ध पन्ना प्रमुख बनाए, यानी 50 वोटर्स पर पार्टी का एक आदमी।

Dainik Bhaskar

May 11, 2018, 07:59 AM IST
कर्नाटक में 21 रैलियों के दौरान मोदी एक भी धार्मिक स्थल पर नहीं गए। कर्नाटक में 21 रैलियों के दौरान मोदी एक भी धार्मिक स्थल पर नहीं गए।

  • मोदी ने कर्नाटक में 21 रैलियां कीं, 29 हजार किमी दूरी तय की
  • राहुल गांधी ने 20 रैलियां और 40 रोड शो-नुक्कड़ सभाएं की। उन्होंने 55 हजार किमी की यात्रा की

बेंगलुरु. कर्नाटक में प्रचार का शोर गुरुवार को थम गया। 224 सीटों के लिए शनिवार को वोटिंग होगी। नतीजे 15 को आएंगे। यहां प्रधानमंत्री मोदी ने यूपी चुनाव जितनी ही ताकत लगाई। मोदी ने कर्नाटक में 21 रैलियां की और दो बार नमो एेप के जरिये मुखातिब हुए। उन्होंने करीब 29 हजार किमी की दूरी तय की। हालांकि, इस दौरान मोदी एक भी धार्मिक स्थल पर नहीं गए। बता दें कि मोदी ने 20 करोड़ आबादी और 403 सीट वाले यूपी में 24 रैलियां की थीं। कर्नाटक की आबादी 6.4 करोड़ और 224 सीटें हैं। मोदी ने सबसे अधिक 34 रैलियां गुजरात में और 31 बिहार चुनाव में की थी।

राहुल ने मोदी से दो गुना अधिक दूरी तय की

- कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 20 रैलियां और 40 रोड शो-नुक्कड़ सभाएं की। उन्होंने मोदी से दो गुना अधिक दूरी तय की। 55 हजार किमी की यात्रा की।
- राहुल ने यूपी चुनाव से पहले खाट पर चर्चा की थी। पूरे राज्य का दौरा किया था। 20 रैलियां और 8 रोड शो किए थे। यूपी में सोनिया गांधी ने प्रचार नहीं किया था, जबकि कर्नाटक में उन्हें प्रचार के लिए उतरना पड़ा।

58% केंद्रीय मंत्री और 10 सीएम 45 दिन तक डटे रहे

- अमित शाह ने 27 रैलियां और 26 रोड शो किए, करीब 50 हजार किमी की यात्रा की।

- 40 केंद्रीय मंत्री, 500 सांसद-विधायक और 10 मुख्यमंत्रियों ने कर्नाटक में प्रचार किया।

- 50 से ज्यादा रोड शो किए भाजपा नेताओं ने। 400 से ज्यादा रैलियां की।

रिकॉर्ड 171 करोड़ रुपए की जब्ती; पिछली बार से 1215% अधिक

- 171 करोड़ की जब्ती हुई। बीते चुनाव में 13 करोड़ की हुई थी। यानी 1215% ज्यादा।
- 2014 आम चुनाव के बाद कर्नाटक 22वां राज्य है, जहां चुनाव हो रहे हैं। यूपी में 193 करोड़ की जब्ती। दूसरे पर कर्नाटक है।

कर्नाटक में भाजपा ने पहली बार 10 लाख अर्द्ध पन्ना प्रमुख बनाए

- कर्नाटक को फतह करने के लिए भाजपा ने रैलियों और रोड-शो के अलावा माइक्रो लेवल पर भी काफी काम किया है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने सबसे सफल पन्ना प्रमुख फॉर्मूले को कर्नाटक में भी लागू किया है। पर शाह ने इस बार इसे दो पार्ट में बांटा है।

- पहली बार राज्य में अर्द्ध पन्ना प्रमुखों की टीम बनाई है। ताकि पन्ना प्रमुखों का भार कुछ हलका हो। भाजपा ने राज्य के 56,696 पोलिंग बूथों पर करीब 10 लाख अर्द्धपन्ना प्रमुख तैनात किए हैं। राज्य में कुल 4.96 करोड़ मतदाता हैं। यानी एक अर्द्ध पन्ना प्रमुख के पास 45 से 50 मतदाताओं की जिम्मेदारी है।

- दरअसल, शाह ने गुजरात चुनाव में कई सीटों पर कम अंतर से हार-जीत के बाद इस रणनीति को कर्नाटक में अपनाया है। इसकी जिम्मेदारी उन्होंने राज्य के चुनाव प्रबंधक मुरलीधर को सौंपी थी। राज्य में अर्द्ध पन्ना प्रमुख बनाने का काम पिछले साल दिसंबर में शुरू हुआ था। पन्ना प्रमुख और अर्द्ध पन्ना प्रमुख भाजपा कार्यकर्ताओं को बनाया गया है।

अमित शाह की खोज हैं पन्ना प्रमुख?
पन्ना प्रमुखों की रणनीति को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान इजाद किया था। तब वे यूपी के प्रभारी और महासचिव थे। शाह के इस फॉर्मूले का ही असर था कि सहयोगी दल के साथ 80 में से 73 सीटें जीतने में सफल रही थी। उन्होंने इस फॉर्मूले को सभी राज्यों के चुनाव में अपनाया है। 2017 के यूपी चुनाव में भाजपा को 403 में से 325 सीटें मिलीं।

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें- क्यों बनाए गए अर्द्ध पन्ना प्रमुख...

Modi and BJP strategy to win karnatka elections

क्याें अर्द्ध पन्ना प्रमुख बनाए गए?

एक बूथ पर अमूमन वोटर लिस्ट में 8 से 15 पन्ने और 16 से 30 पेज होते हैं। हर पन्ने पर करीब 100 वोटर होते हैं। 1 पन्ना प्रमुख के लिए इतने लोगों को संभालना मुश्किल होता है। इसलिए हर पन्ने पर 2 अर्द्ध पन्ना प्रमुख बनाए हैं। ये भाजपा की सबसे छोटी इकाई है।

 

कैसे अर्द्ध पन्ना प्रमुख कर रहे काम?

अर्द्ध पन्ना प्रमुखों के ऊपर पन्ना प्रमुख हैं। उसके ऊपर बूथ प्रमुख। फिर एरिया प्रमुख और चुनाव प्रभारी। अर्द्ध पन्ना प्रमुख लोगों को घरों से पोलिंग बूथ तक लाने के लिए काम करेंगे। उनकी मदद भी करते हैं। वे लोगों से मिलकर उन्हें पार्टी के संदेश भी भेजते हैं।

 

कौन सी रणनीति अपना रही भाजपा?

भाजपा के 40 केंद्रीय मंत्री, 10 सीएम, 500 से ज्यादा सांसद, विधायक प्रचार कर रहे हैं। एरिया प्रमुख की जिम्मेदारी विधायक के पास है। 224 सीटों पर 224 सांसद तैनात हैं। कर्नाटक में 30 जिले हैं। हर एक जिले का प्रभारी एक केंद्रीय मंत्री है।

 

किसके पास कैंपेन की जिम्मेदारी?

कर्नाटक में चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय महासचिव मुरलीधर राव के पास है। एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर भी चुनाव प्रभारी हैं। बेंगलुरू स्थित पार्टी मुख्यालय पर राज्य इकाई और केंद्रीय टीम के लोग प्रचार और मीडिया का काम देख रहे हैं। 

 

 

भाजपा की राज्य में चुनावी रणनीति

 

- चुनाव प्रबंधक : मुरलीधर राव (राष्ट्रीय महासचिव)

 

- जिला प्रभारी : 30 केंद्रीय मंत्री (राज्य में 30 जिले हैं)

 

- चुनाव क्षेत्र प्रभारी : 224 सांसदों (राज्य में 224 सीटें हैं)

 

- एरिया प्रमुख : 224 विधायक उम्मीदवार

 

- बूथ प्रमुख : 50 हजार  (56,696 पोलिंग बूथ हैं)

 

- पन्ना प्रमुख : 4.5 लाख (100 वोटर पर एक)

 

- अर्द्ध पन्ना प्रमुख : 10 लाख (45 से 50 वोटर पर)

Modi and BJP strategy to win karnatka elections

क्याें अर्द्ध पन्ना प्रमुख बनाए गए?

एक बूथ पर अमूमन वोटर लिस्ट में 8 से 15 पन्ने और 16 से 30 पेज होते हैं। हर पन्ने पर करीब 100 वोटर होते हैं। 1 पन्ना प्रमुख के लिए इतने लोगों को संभालना मुश्किल होता है। इसलिए हर पन्ने पर 2 अर्द्ध पन्ना प्रमुख बनाए हैं। ये भाजपा की सबसे छोटी ईकाई है।

 

कैसे अर्द्ध पन्ना प्रमुख कर रहे काम?

अर्द्ध पन्ना प्रमुखों के ऊपर पन्ना प्रमुख हैं। उसके ऊपर बूथ प्रमुख। फिर एरिया प्रमुख और चुनाव प्रभारी। अर्द्ध पन्ना प्रमुख लोगों को घरों से पोलिंग बूथ तक लाने के लिए काम करेंगे। उनकी मदद भी करते हैं। वे लोगों से मिलकर उन्हें पार्टी के संदेश भी भेजते हैं।

 

कौन सी रणनीति अपना रही भाजपा?

भाजपा के 40 केंद्रीय मंत्री, 10 सीएम, 500 से ज्यादा सांसद, विधायक प्रचार कर रहे हैं। एरिया प्रमुख की जिम्मेदारी विधायक के पास है। 224 सीटों पर 224 सांसद तैनात हैं। कर्नाटक में 30 जिले हैं। हर एक जिले का प्रभारी एक केंद्रीय मंत्री है।

 

किसके पास कैंपेन की जिम्मेदारी?

कर्नाटक में चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय महासचिव मुरलीधर राव के पास है। एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर भी चुनाव प्रभारी हैं। बेंगलुरू स्थित पार्टी मुख्यालय पर राज्य इकाई और केंद्रीय टीम के लोग प्रचार और मीडिया का काम देख रहे हैं। 

 

 

भाजपा की राज्य में चुनावी रणनीति

 

- चुनाव प्रबंधक : मुरलीधर राव (राष्ट्रीय महासचिव)

 

- जिला प्रभारी : 30 केंद्रीय मंत्री (राज्य में 30 जिले हैं)

 

- चुनाव क्षेत्र प्रभारी : 224 सांसदों (राज्य में 224 सीटें हैं)

 

- एरिया प्रमुख : 224 विधायक उम्मीदवार

 

- बूथ प्रमुख : 50 हजार  (56,696 पोलिंग बूथ हैं)

 

- पन्ना प्रमुख : 4.5 लाख (100 वोटर पर एक)

 

- अर्द्ध पन्ना प्रमुख : 10 लाख (45 से 50 वोटर पर)

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कर्नाटक में 21 रैलियों के दौरान मोदी एक भी धार्मिक स्थल पर नहीं गए।कर्नाटक में 21 रैलियों के दौरान मोदी एक भी धार्मिक स्थल पर नहीं गए।
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