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ब्यूरोक्रेसी में सीधे एंट्री : सीनियर ब्यूरोक्रेट्स ने बताए 5 नुकसान, 3 फायदे

अब निजी और पीएसयू कंपनियों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स भी ज्वाइंट सेक्रेटरी के लेवल पर काम कर पाएंगे।

Dainik Bhaskar

Jun 11, 2018, 10:52 PM IST
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नेशनल डेस्क। मोदी सरकार ने ब्यूरोक्रेसी में सीधे एंट्री देने के लिए एक बड़ा बदलाव किया है जिसके तहत बिना यूपीएससी की परीक्षा पास किए हुए भी शासन का हिस्सा बना जा सकता है। इस बदलाव के तहत अब निजी और पीएसयू कंपनियों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स भी ज्वाइंट सेक्रेटरी के लेवल पर काम कर पाएंगे। लेकिन सरकार के इस फैसले के बाद से ही ब्यूरोक्रेसी में खलबली मची हुई है। इस संबंध में DainikBhaskar.com ने यूपीएससी से पासआउट कैंडिडेट्स को ट्रेंड करने वाली लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन के पूर्व डायरेक्टर परमवीर सिंह, मप्र के पूर्व मुख्य सचिव केएस शर्मा, रिटायर्ड डीजीपी सुभाषचंद्र त्रिपाठी और रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी अरुण गुर्टू से बात कर इस फैसले के नुकसान और फायदों के बारे में जाना।

सरकार के फैसले से हो सकते हैं ये 5 नुकसान :
1.इससे कमिटेड ब्यूरोक्रेसी स्थापित करने की कोशिश हो सकती है। सरकार में शामिल पार्टी की विचारधारा को मानने वालों की ही भर्ती की संभावना बढ़ जाएगी।
2.चूंकि नियुक्ति केवल तीन साल के लिए होगी। इसलिए अकाउंटेबिलिटी तय करना मुश्किल हो सकता है। इससे घपले-घोटाले के चांस भी बढ़ सकते हैं।
3.संविधान के अनुसार हायर सर्विसेज में नियुक्ति ऑटोनामस बॉडी के जरिए होनी चाहिए। इन नियुक्तियों में संविधान की इस मंशा का उल्लंघन हो सकता है।
4.सीधी भर्ती से सेवा में पहले से काम करने वाले लोगों के मनोबल पर भी निगेटिव असर हो सकता है।
5.पॉलिसी डिसिजन में प्राइवेट सेक्टर के लोगों के शामिल होने से वे अपने हिसाब से फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।

सरकार के फैसले से हो सकते हैं ये 3 फायदे :

1.ऐेसे कई काबिल लोग हैं जिन्हें शुरू में नहीं लगा होगा कि उन्हें सरकारी नौकरी में जाना चाहिए। तो ऐसे में अगर उन्हें मौका मिल रहा है तो देश को उनकी एक्परटाइज का फायदा उठाना चाहिए।

2.ब्यूरोक्रेसी में एक नई सोच और नया इनोवेशन आएगा। इससे वर्ल्ड बैंक और अन्य संस्थाओं की शिकायतें दूर हो जाएंगी। वर्ल्ड कई बार कह चुका है कि हमारी ब्यूरोक्रेसी में इनोवेशन की कमी है।

3. इससे ब्यूरोक्रेसी में पहले से ही मौजूद लोगों पर अच्छा काम करने का दबाव बनेगा।


फैसले को कैसे लागू करें?

- इस डिसिजन को जल्दबाजी में लागू नहीं करना चाहिए। इसे सभी संबद्ध पक्षों के साथ चर्चा करके ही लागू करना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर यह पूरे सिस्टम को स्पाइल कर सकता है।
- यूपीएससी पर आज तक कभी सवाल नहीं उठे हैं। ऐसे में सिलेक्शन की प्रोसेस का जिम्मा भी यूपीएससी को दिया जा सकता है। सरकार यूपीएससी को एक गाइडलाइन दे सकती है, जैसे हमें 5 लोग कॉरपोरेट वर्ल्ड के चाहिए, 5 लोग इकोनॉमिस्ट चाहिए आदि। इस गाइडलाइन के हिसाब से सिलेक्शन करना चाहिए, ताकि निष्पक्षता बनी रहे।

- जितनी अवधि के लिए अपाइंटमेंट किया जाए, उस अवधि के लिए उसे पूरी तरह अकाउंटेबल बनाना होगा। कोई गड़बड़ी होने पर सेवा के बाद भी कार्रवाई का प्रावधान जोड़ना होगा।

यूपीएससी सिलेक्टेड नए अफसरों का क्या कहना है?

आईएसएस के लिए चयनित मनीष राय कहते हैँ कि इस फैसल में कोई गलती नहीं है। जिन विभागों में लाया जा रहा है, वहां एक्सपर्ट की रजरूरत है। बस, केवल इतना ध्यान रखना होगा कि उनका स्पेलशलाइजेशन हो और योग्य हैं। इसी तरह सूरज राय का कहना है कि कोई भी फैसला सही या गलत नहीं होता। सही या गलत उसका केवल इम्पलीमेंटेशन होता है?

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