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राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों को रिहा करने से खतरनाक परंपरा शुरू हो जाएगी: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की

Danik Bhaskar | Aug 10, 2018, 04:08 PM IST
21 मई, 1991 को राजीव गांधी की हत्या 21 मई, 1991 को राजीव गांधी की हत्या

- तमिलनाडु सरकार ने राजीव गांधी हत्याकांड के सातों आरोपियों को रिहा करने का प्रस्ताव दिया था

नई दिल्ली. केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राजीव गांधी हत्याकांड के सात दोषियों को रिहा करने का तमिलनाडु सरकार का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। अगर इन दोषियों को रिहा किया जाता है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके बुरे नतीजे होंगे और खतरनाक परंपरा शुरू हो जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की। 2 मार्च 2016 को तमिलनाडु सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर कहा था कि वह सात दोषियों को रिहा करने का फैसला कर चुकी है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के 2015 के आदेश के मुताबिक रिहाई के लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी 2018 को सरकार से तीन महीने में फैसला करने को कहा था। शुक्रवार को हुई सुनवाई में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि राजीव गांधी हत्याकांड की जांच कर चुकी सीबीआई भी दोषियों को रिहा करने के फैसले का विरोध कर चुकी है। सातों दोषी 27 साल से जेल में बंद हैं। गृह मंत्रालय के सचिव वीबी दुबे ने जवाब दिया कि केंद्र सरकार ने दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के तहत तमिलनाडु सरकार के प्रस्ताव को खारिज किया है।

ये हैं सात दोषी : 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर की एक रैली में आत्मघाती हमले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की गई थी। लिट्टे आतंकी धनु ने राजीव के पास जाकर खुद को बम से उड़ा लिया था। इस हमले में 14 अन्य लोगों की भी मौत हो गई थी। 28 जनवरी 1998 को नलिनी श्रीहरन को मौत की सजा सुनाई गई। राज्य सरकार ने इसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया। पेरारिवलन, मुरुगन, संथन, रॉबर्ट पायस, जयकुमार और रविचंद्रन को भी दोषी करार दिया गया था। ये सभी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।