कांग्रेस सरकार में बैंकिंग सिस्टम में लूट चल रही थी, 6 साल में 34 लाख करोड़ के लोन बांटे गए: मोदी

4 वर्ष पहले
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- मोदी सरकार के खिलाफ पहले अविश्वास प्रस्ताव पर 12 घंटे बहस हुई

- प्रस्ताव के पक्ष में 126, विरोध में 325 वोट पड़े

 

नई दिल्ली.  अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सिस्टम को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए थे। शुक्रवार रात अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर जवाब दिया और कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि हमारे सत्ता में आने से पहले देश के बैंकों में अंडरग्राउंड लूट चल रही थी। आजादी के बाद से 2008 तक बैंकों द्वारा दिए कर्ज की राशि 18 लाख करोड़ रुपए थी। पर कांग्रेस सरकार ने अगले 6 साल में ही इस आंकड़े को बढ़ाकर 52 लाख करोड़ तक पहुंचा दिया।

मोदी ने कहा, ‘‘देश के लिए यह जानना जरूरी है। हम 2014 में आए तब कई लोगों ने हमें कहा था कि अर्थव्यवस्था पर श्वेत-पत्र लाया जाए। लेकिन एक के बाद एक ऐसी जानकारी सामने आई कि हम चौंक गए।  अर्थव्यवस्था की क्या हालत बनाकर रखी थी। आज मैं एनपीए की कहानी बताना चाहता हूं। 2008 की बात है। कांग्रेस को लगा कि जितना बैंक खाली करना है, करो। जब आदत लग गई तो बैंकों की अंडरग्राउंड लूट 2014 तक चलती रही। इनके सत्ता में रहने तक बैंकों को लूटने का खेल चलता रहा। एक आंकड़ा सदन के लोगों को भी चौंका देगा। आजादी के 60 साल में देश के बैंकों ने लोन के रूप में जो राशि दी थी, वह 18 लाख करोड़ रुपए थी। लेकिन 2008 से 2014 के बीच 6 साल में यह रकम बढ़कर 52 लाख करोड़ रुपए हो गई। 60 साल में 18 लाख करोड़ रुपए, छह साल में 52 लाख करोड़ रुपए।’’

नेट बैंकिंग से पहले कांग्रेस की फोन बैंकिंग : मोदी ने कहा, ‘‘कांग्रेस के लोग इतने बुद्धिमान हैं कि उन्होंने नेट बैंकिंग से पहले फोन बैंकिंग के जरिए अपने चहेतों के लिए हजारों करोड़ रुपए लुटा दिए। कागज नहीं देखे। फोन पर लोन दे दिए। पुराने लोन पर नए लोन देते गए। ये एनपीए का जंजाल एक तरह से भारत की बैंकिंग व्यवस्था के लिए लैंडमाइन की तरह बिछाया गया। एनपीए की सही स्थिति जानने के लिए हमने मैकेनिज्म शुरू किया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि कैपिटल गुड्स का इम्पोर्ट कस्टम ड्यूटी कम कर इतना बढ़ाया गया कि देश के आयात के बराबर हो गया। 50 करोड़ रुपए से ज्यादा के सभी डिफॉल्टर्स की अब पहचान की गई है। 2.10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि बैंकों के दोबारा पूंजीकरण के लिए दी जा रही है।’’

 

 

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