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देखें 8 साल की बच्ची के लेटर पर निर्भया ने क्या जवाब दिया धिक्कार है! मुझे घिन्न आती है....

कठुआ गैंगरेप में 8 साल की बच्ची के रेप को लेकर पूरे देश में गुस्सा है।

Dainik Bhaskar

Apr 14, 2018, 07:43 PM IST
nirbhaya latter to her young kashmiri sister, who was victim of kathua case

कठुआ गैंगरेप में 8 साल की बच्ची के रेप को लेकर पूरे देश में गुस्सा है। आम आदमी से सेलेब्रिटीज तक इस घटना पर अपना रिएक्शन दे रहे हैं। DainikBhaskar.com ने आठ साल की पीड़ित बच्ची की ओर से उसके दर्द को बयां करने की कोशिश की थी। अब उस बच्ची के नाम उसकी निर्भया दीदी का खत आया है। आप भी पढ़िए...

मेरी प्यारी बहन,

मैंने तुम्हारा लेटर पढ़ा। ऐसा लगा 16 दिसंबर की वो काली रात फिर मेरी आंखों में उतर आई हो। एक बार फिर मैं 2012 की उस रात की आग में झुलस गई। तुमने सही लिखा है - जम्मू के कठुआ में जो कुचली गई वो निर्भया ही थी। आठ दरिंदों के दांत मुझपर ही गड़ रहे थे। वो जानवर निर्भया को ही पीटते, ड्रग्स देते और रेप करते रहे....फिर पीटते, फिर रेप करते रहे। जंगल में जब उस पुलिस वाले ने कहा - रुको..तो उम्मीद मुझमें ही जगी थी। लेकिन जब उसने कहा - एक बार और रेप करने दो तो मैं ही मरी थी। उन्नाव से लेकर कठुआ तक मैं ही छलनी हूं।

इस देश के इंसानों से तो क्या कहूं, मैं भगवान से पूछती हूं। भगवान क्या तुम वाकई हो। अगर हो तो भगवान के घर में ऐसा कैसे हुआ? कहते हैं बच्चे भगवान का रूप होते हैं...तो भगवान के रूप के साथ भगवान के घर में ही ऐसा क्यों ?

मेरी बहन, तुम्हारे साथ जो हुआ उसे देखकर अब मुझे यकीन हो गया है कि 16 दिसंबर 2012 के बाद देश भर से जो आवाज़ उठी वो खोखली थी। हिन्दुस्तान के लोगों का गुस्सा भोथर था। उसमें धार होती तो सरकारें यूं बहरी न होतीं। नेता नींद से जगते। निर्भया फंड का इस्तेमाल तक नहीं किया इन लोगों ने। करोड़ों बेकार पड़े हैं वहां। अगर खादी और खाकी में थोड़ी शर्म होती तो कैसे कोई नेता कहता - लड़के हैं, गलतियां हो जाती हैं। कैसे कोई पुलिसवाला मेरे मम्मी-पापा के सामने ही कहता - जब मां इतनी खूबसूरत है तो बेटी कैसी रही होगी।

मैं देश के यूथ से भी कहना चाहती हूं - मुझसे झूठ कहा था, तुम लोगों ने। झूठा था तुम्हारा वादा कि अब कोई निर्भया नहीं कुचली जाएगी। अब कोई निर्भया नहीं होगी। तुम कहोगे कि हमने तो आवाज़ उठाई थी। मैं कहूंगी - अनसुनी हो गई। तुम कहोगे - हम सड़कों पर उतरे थे । मैं सवाल करूंगी- घर क्यों गए? तुम कहोगे - हम और क्या कर सकते थे? मैं पूछूंगी - जिनकी बहनों के साथ ऐसा हो रहा है उनके हलक से निवाला कैसे उतरता है, उन्हें नींद कैसे आती है? धिक्कार है तुमलोगों पर। घिन्न आती है मुझे तुम्हारे झूठ पर। आह!

तुम्हारी निर्भया

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