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12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को मिलेगी फांसी, नए विधेयक पर संसद की मुहर

कठुआ में एक नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म और हत्या, उन्नाव में महिला से दुष्कर्म की घटनाओं के बाद सरकार ने यह कदम उठाया

Danik Bhaskar | Aug 06, 2018, 10:12 PM IST
विधेयक 30 जुलाई को लोकसभा से पार विधेयक 30 जुलाई को लोकसभा से पार

- आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक को अब राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा

- राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक कानून में तब्दील हो जाएगा

नई दिल्ली. 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को फांसी की सजा देने और ऐसे यौन अपराधों के खिलाफ कठोर कानून बनाने के लिए सोमवार को राज्यसभा ने एक विधेयक पारित किया। यह विधेयक 21 अप्रैल को लागू किए गए आपराधिक कानून (संशोधन) की जगह लेगा। 30 जुलाई को लोकसभा से आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक, 2018 भी पारित हो चुका था। संसद के दोनों सदनों से विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद अब इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी मिलते और विधि मंत्रालय के अधिसूचित करते ही यह विधेयक कानून में तब्दील हो जाएगा।

विधेयक के मुताबिक, 16 से कम उम्र की बच्ची से दुष्कर्म करने पर कम से कम 10 से 20 साल की सजा का प्रावधान है। इस सजा को उम्रकैद में भी बदला जा सकता है। 12 साल से कम उम्र की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को कम से कम 20 साल जेल की सजा का प्रावधान है। यह उम्रकैद या मौत की सजा में तब्दील हो सकती है। 12 साल से कम उम्र की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों को कम से कम उम्रकैद या मौत की सजा का प्रावधान है। महिला से दुष्कर्म करने वालों की सजा भी बढ़ाई गई है। अब ऐसे दोषियों को 7 से 10 साल तक के कठोर कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।

सदस्यों की चिंताओं पर विचार करेगी सरकारः राज्यसभा में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने सदन को भरोसा दिलाया कि सदस्यों द्वारा जताई गई चिंताओं और मुद्दों पर सरकार विचार करेगी। हालांकि वे बहुत से सदस्यों की उस मांग से सहमत नहीं हुए, जिसमें विधेयक को स्क्रूटनी के लिए प्रवर समिति के पास भेजने की बात कही गई थी। विधेयक को देश के लिए अहम बताते हुए रिजिजू ने कहा कि कानून का उद्देश्य नाबालिग बच्चियों को सुरक्षा पहुंचाना है। पिछले कुछ महीनों में देश में नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म की दिल-दहलाने वाली घटनाएं सामने आईं। इसके बाद सरकार यह विधेयक लाया गया।

4 राज्यों में पहले से ही लागू है कानूनः रिजिजू ने कहा कि 4 राज्यों की विधानसभाओं में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को मौत की सजा देने का कानून पहले ही पारित हो चुका है। वे राज्य मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और अरुणाचल प्रदेश हैं। उन्होंने कहा, "हमने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), आपराधिक दंड संहिता (सीआरपीसी), साक्ष्य अधिनियम और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम में कुछ विशेष बदलाव किए हैं।"

एससी-एसटी (अत्याचार रोधी) अधिनियम, संशोधित विधेयक लोकसभा से मंजूरः अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोधी) अधिनियम, के वास्तविक प्रावधानों की बहाली के मांग वाले संशोधित विधेयक को लोकसभा की मंजूरी मिल गई। विधेयक को पेश करते हुए केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि मोदी सरकार की पहल के तहत वंचित समुदायों के लोगों के खिलाफ अत्याचार के मामलों की जांच के लिए 30 राज्यों में जिला अदालतें स्थापित की गई हैं। इसके अलावा, एससी-एसटी को सुनिश्चित न्याय दिलाने के लिए 14 राज्यों में एक से ज्यादा जिला अदालतें बनाई गईं।