राहुल गले लगे, अब प्रधानमंत्री अपनी मेडिकल जांच कराएं: स्वामी; कांग्रेस ने नफरत-प्यार वाले पोस्टर लगवाए

4 वर्ष पहले
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- मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव शुक्रवार को गिर गया था 

- 451 सांसद वोटिंग में शामिल हुए, इनमें से 325 सरकार और 126 विपक्ष के साथ थे

 

नई दिल्ली.  भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान राहुल गांधी के प्रधानमंत्री को गले लगाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का व्यवहार अनैतिक था। इससे संसद के अंदर प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर क्या संकेत मिलता है? अब नरेंद्र मोदी को मेडिकल जांच करानी चाहिए। भाजपा इसे राहुल की बचकाना हरकत बता चुकी है। शनिवार को मोदी ने उत्तर प्रदेश में शाहजहांपुर की रैली में कहा था कि जब वे अविश्वास का कारण नहीं बता पाए तो गले पड़ गए।

उधर, कांग्रेस का दावा है कि गले मिलकर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को चौंका दिया। पार्टी प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा कि जब मोदी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से हाथ मिला सकते हैं तो राहुल गांधी से क्यों नहीं? हमें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री खुशी से मुस्कराएंगे, पर वे इससे सकते में आ गए। राहुल ने संसद में कहा था कि कांग्रेस भाजपा नेताओं के अंदर की नफरत को प्यार से जीतेगी। रविवार को मुंबई कांग्रेस ने इसके पोस्टर लगवा दिए। इनमें लिखा है कि नफरत नहीं, प्यार से जीतेंगे। अगले साल महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस इसे टैग लाइन के तौर पर इस्तेमाल करेगी।

स्पीकर ने राहुल को दी थी हिदायत : राहुल गांधी शुक्रवार को अपना भाषण खत्म कर प्रधानमंत्री के पास गए और अचानक उन्हें गले लगा लिया था। मोदी समेत सभी सदस्य इस घटना से हैरान रह गए। राहुल लौटने लगे तो मोदी ने उन्हें आवाज देकर बुलाया और हाथ मिलाकर धन्यवाद दिया। इस पर स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कांग्रेस अध्यक्ष से कहा कि यह संसद की गरिमा के खिलाफ है। वहीं, भाजपा ने इसे राहुल की बचकाना हरकत करार दिया।

मोदी ने भी संसद में कसा था तंज : प्रधानमंत्री ने जवाब में कहा था, ‘‘मोदी हटाओ, ये नारा है। मैं हैरान हूं, अभी तो चर्चा प्रारंभ हुई थी, मतदान नहीं हुआ था, जय-पराजय का फैसला नहीं हुआ था, फिर भी इन्हें यहां (कुर्सी) तक पहुंचने का उत्साह था- उठो! उठो! उठो! न यहां कोई उठा सकता है, न बैठा सकता है। सवा सौ करोड़ देशवासी ही उठा सकते हैं। लोकतंत्र में जनता पर भरोसा होना चाहिए। इतनी जल्दबाजी क्या है? हम खड़े होंगे तो प्रधानमंत्री पंद्रह मिनट तक खड़े नहीं हो पाएंगे। मैं खड़ा भी हूं और चार साल जो काम किए हैं, उस पर अड़ा भी हूं।’’ 

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