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पीएनबी के 54 अधिकारियों की खामियों की वजह से पकड़ में नहीं आई 13,600 करोड़ की जालसाजी: रिपोर्ट

रिपोर्ट 5 अप्रैल को पीएनबी की फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट शाखा के सामने पेश की गई थी, लेकिन अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई थी।

Danik Bhaskar | Jun 20, 2018, 08:48 PM IST

मुंबई/नई दिल्ली. पंजाब नेशनल बैंक में 13,600 करोड़ रुपए की जालसाजी भले ही चंद अधिकारियों की साजिश का नतीजा हो, लेकिन इसके पकड़ में नहीं आने की वजह 54 अधिकारियों की खामियां रहीं। पीएनबी की अंदरूनी जांच रिपोर्ट में ये बात सामने आई है। इस मामले में हीरा व्यवसायी नीरव मोदी और ज्वेलर मेहुल चौकसी आरोपी हैं। ये लोग मामले का खुलासा होने से पहले ही देश छोड़कर भाग गए थे।

क्लर्क से लेकर रीजनल हेड तक बेपरवाह रहे: 162 पन्नों की रिपोर्ट की एक कॉपी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को मिली है। इसमें कहा गया है कि किसी शाखा और कुछ अधिकारियों से ज्यादा बड़े पैमाने पर खामियां थीं। जिन 54 अधिकारियों का जिक्र रिपोर्ट में किया गया है, उनमें क्लर्क से लेकर रीजनल हेड तक शामिल हैं। इनमें 8 वो हैं, जिनके नाम पुलिस की चार्जशीट में भी हैं। रिपोर्ट में बैंक के अंदरूनी मेल और रिकॉर्ड की भी कॉपियां हैं, जिन्हें पुलिस ने भी कोर्ट के सामने पेश किया था।


जिम्मेदारियां ताक पर रखने से बैंक तबाही की ओर बढ़ा: रिपोर्ट में ये साफ नहीं किया गया है कि जिन अफसरों-कर्मचारियों की खामियों का जिक्र किया गया है, उन्हें इस जालसाजी के बारे में जानकारी थी या नहीं। इसमें ये कहा गया है कि ये घोटाला इस वजह से नहीं पकड़ा जा सका, क्योंकि बैंक के दिल्ली मुख्यालय में कुछ महत्वपूर्ण जगहों पर खामियां थीं। ऐसा पाया गया कि व्यवस्था का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन, अनैतिक कामों, जिम्मेदारियों को सही से ना निभाने की वजह से बैंक इस तबाही की ओर बढ़ा।

बैंक ने कहा था- लापरवाही में शामिल किसी अफसर को बख्शेंगे नहीं: पीएनबी के सीईओ सुनील मेहता ने अप्रैल में न्यूज एजेंसी से कहा था कि 21 अधिकारियों निलंबित किया गया है। अगर और भी अधिकारी लारवाही में शामिल पाए गए तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, रिपोर्ट में इसका जिक्र नहीं है कि खामियों के जिम्मेदार अफसरों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।