--Advertisement--

पवन किस तरफ

आंध्र प्रदेश में एक और सितारे का उदय हो रहा है। यह सितारा बहुत चमक भी रहा है। नाम है पवन।

Dainik Bhaskar

Jul 03, 2018, 10:59 PM IST
Power Gallery By Dr. Bharat Agrawal

दिल्ली के मीडिया की नजर में आंध्र प्रदेश माने चंद्रबाबू नायडू और जगन रेड्डी हैं। और उधर आंध्र प्रदेश में एक और सितारे का उदय हो रहा है। यह सितारा बहुत चमक भी रहा है। नाम है पवन। पवन कल्याण, माने तेलुगु जेम्स बांड चिरंजीवी के लघुभ्राता। जब चिरंजीवी कांग्रेस में शामिल हो गए, तो पवन ने नया संगठन शुरू किया। पवन एक बहुत लोकप्रिय तेलुगु फिल्म स्टार भी हैं। वह चंद्रबाबू नायडू के घोर विरोधी हैं। सवाल यह है कि वे किस करवट बैठेंगे? बीजेपी की तरफ या राहुल गांधी की तरफ? देखना पड़ेगा। अभी तो दोनों तरफ वाले पवन से संपर्क रखे हुए हैं।

विजिटिंग बाबू मोशाय

यह तो सभी को समझ में आ रहा है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह इन दिनों पश्चिम बंगाल और ओडिशा को काफी महत्व दे रहे हैं। यह भी जाहिर है कि उनका इरादा 2019 में इन नए इलाकों से थोड़ी अधिक सीटें निकालने का है, ताकि यूपी, राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि में होने वाली कमी की पूर्ति की जा सके। अब आगे की बात ये है कि अमित शाह कोलकाता में किराए पर एक फ्लैट लेने की योजना बना रहे हैं। वे 8-10 दिन कोलकाता में ही रहा करेंगे। माने ममता की राह में अब एक और सिरदर्द।

गया युद्धविराम काम से

रमजान के महीने में कश्मीर में युद्धविराम के लिए महबूबा मुफ्ती के अनुरोध पर मोदी राजी हुए थे। लेकिन अब बाजी उलट चुकी है। संघ परिवार इससे नाराज होने लगा है। उनका कहना है कि पाकिस्तान कभी भी युद्धविराम का पालन नहीं करता। उधर पाकिस्तान पहले ही गोलीबारी शुरू कर चुका है। दरअसल पाकिस्तान में इस महीने चुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव में पाकिस्तानी सेना के अपने दांव हैं। लिहाजा वहां से तो फायरिंग बढ़ेगी। उधर राजनाथ जल्द ही पाकिस्तान जाने वाले हैं। सरकार चाहती है कि उनकी यात्रा शुरू होने के पहले एक निर्णय ले लिया जाए कि हम भी युद्धविराम रद्द कर देंगे। बीएसएफ भी जैसे को तैसा करते हुए कुछ पाकिस्तानी बंकरों को मटियामेट कर चुकी है। फिर युद्धविराम का समर्थक बचा कौन? माने सिर्फ औपचारिकता बाकी है।

स्टाइल दरबारी

कभी अजनबी थे। कब के बिछड़े? पर अब दिग्विजय और कमलनाथ दोस्त हैं। इतने बड़े वाले दोस्त कि दिग्गी राजा ने कमलनाथ का समर्थन किया और ज्योतिरादित्य अभियान समिति के अध्यक्ष बन गए। और इस व्यवस्था में दिग्गी राजा के पुत्र चुपचाप से बड़े आदमी बन गए हैं। वह कमलनाथ के साथ हैं।

बढ़ रहा है असंतोष

उत्तरप्रदेश में बीजेपी के और 'संगी-साथी' कैटेगरी के कुछ विधायकों ने सरकार की परोक्ष और खुली आलोचना शुरू कर दी है। हालांकि वे यह ध्यान रख रहे हैं कि आलोचना यूपी की नौकरशाही की हो और मोदीजी के खिलाफ कुछ न कहा जाए। सुना यह गया है कि वास्तव में इन गैर मंत्री विधायकों का इरादा योगी के खिलाफ षड्यंत्र शुरू करना है। टारगेट यह है कि 2019 से पहले मुख्यमंत्री बदलवा दिया जाए। तर्क यह कि योगी गोरखपुर से लेकर फूलपुर और कैराना तक सभी उपचुनाव हार गए हैं, इसलिए एक नया चेहरा लाया जाना चाहिए। मनोज सिन्हा का नाम फिर से सामने आ रहा है। लेकिन अमित शाह यह स्पष्ट कर चुके हैं कि 2019 से पहले कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। क्योंकि ऐसा करना और विनाशकारी साबित होगा। लेकिन यूपी में असंतुष्ट गतिविधियां बढ़ रही हैं।

पांडा क्या करेंगे!

जय पांडा बीजेडी से बाहर हो चुके हैं और अब सवाल यह है कि क्या वे बीजेपी में शामिल होंगे? और अगर हुए, तो बीजेपी में उनकी भूमिका क्या होगी? अगर धर्मेंद्र प्रधान को मुख्यमंत्री के तौर पेश किया गया, तो फिर जय पांडा क्या करेंगे? बीजेपी भविष्य में उन्हें ओडिशा के बजाए दिल्ली में मंत्री बनाना पसंद करेगी। लेकिन क्या जय पांडा बीजेडी में विभाजन करा सकते हैं? बीजेपी का सोचना है कि उनमें बीजेडी तोड़ने की क्षमता नहीं है। यहां तक कि वे उड़ीसा में उतने लोकप्रिय भी नहीं हैं। वे रणनीतिकार भी नहीं हैं। तो फिर हैं क्या? माने मुकुल रॉय से भी फिसड्डी? जवाब है कि वे बातचीत बहुत बढ़िया कर लेते हैं। अच्छी छवि है ही, लिहाजा उन्हें दिल्ली में एक प्रवक्ता बनाया सकता है। इससे बीजेपी को जितना लाभ होना है, वह भी हो जाएगा और जय पांडा को भी काम मिल जाएगा। वैसे बीजेपी प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा भी ओडिशा के ही हैं।

घर-घर मोदी। पार्ट टू

अमित शाह मशहूर हस्तियों के घर जा रहे हैं। यही अभियान मोदी भी शुरू करेंगे। घर-घर मोदी असल में तो यही होगा। लेकिन वास्तव में न केवल मोदी-शाह, बल्कि अन्य बीजेपी नेता भी 50 लोगों का लक्ष्य बनाकर यही अभियान चलाएंगे। जैसे मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी 50 मीडिया मालिकों, संपादकों, पत्रकारों के घर जाएंगे।

प्रॉब्लम बंगाल

राष्ट्रपति भवन में राज्यपालों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों का दो दिवसीय सम्मेलन हुआ। तमाम राज्यपालों ने तमाम रिपोर्ट जमा कीं। लेकिन सबसे सनसनीखेज और महत्वपूर्ण रिपोर्ट पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने दी। वह यह कि पंचायत चुनावों के बाद से आतंक का राज चल रहा है। राज्यपाल ने इन अत्याचारों के लिए राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी पर आरोप लगाए। एक जमाना था, जब वीरेन शाह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल होते थे और वह मार्क्सवादी सरकार के खिलाफ आडवाणी को रिपोर्ट दिया करते थे। अब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल राजनाथ को ममता के खिलाफ रिपोर्ट दे रहे हैं।

एक एनडीए ये भी

यूपी में एनडीए की सरकार है। इस एनडीए में आजकल एक और एनडीए चल रहा है- नो डिस्टर्बेंस अलाउन्स। ये वाला एनडीए काफी चर्चित भी है और फुलस्पीड पर चल भी रहा है।

टाइम लगेगा

केंद्र सरकार इस बार एनएचएआई का अध्यक्ष नियुक्त करने में थोड़ा ज्यादा समय लगाएगी। कारण यह है कि संसद से पारित अधिनियम 1998, जो 2000 में पुनरीक्षित हुआ है, उसके नियमानुसार एक सर्च कमेटी बनेगी। कैबिनेट सचिव, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव, वित्त सचिव, आईआईएम के निदेशक, ए लेवल बैंक के एक अध्यक्ष इस सर्च कमेटी के सदस्य होंगे। और सर्च के लिए सर्च से पहले एक विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। जाहिर है, टाइम तो लगेगा।

X
Power Gallery By Dr. Bharat Agrawal
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..