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1 करोड़ एनआरआई वोटरों पर नजर? उन्हें प्रॉक्सी वोटिंग का अधिकार देने लोकसभा में बिल पास करा चुकी सरकार

अभी देश में सरकारी नौकरी करने वालों को ही प्रॉक्सी वोटिंग का अधिकार

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2018, 06:32 PM IST
proxy voting to overseas Indian bill passed by Lok Sabha

- मानसून सूत्र में लोकसभा ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (संशोधन) 2017 विधेयक पारित किया

- फिलहाल देश के 543 लोकसभा क्षेत्रों में कुल 1.1 करोड़ एनआरआई वोटर

नई दिल्ली. चुनावों के दौरान विदेश में रह रहे 1.1 करोड़ प्रवासी भारतीयों का वोट बेकार नहीं जाए, इसके लिए सरकार ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (संशोधन) 2017 विधेयक लोकसभा से पारित करा लिया। अब इसे राज्यसभा भेजा जाएगा। उच्च सदन में यह बिल पारित होने, राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने और विधि मंत्रालय के अधिसूचित करते ही यह कानून में तब्दील हो जाएगा।
विधेयक में प्रस्ताव है कि अनिवासी भारतीय अपने मताधिकार के प्रयोग के लिए इलाके के किसी व्यक्ति को नॉमिनेट कर सकेंगे। इस प्रक्रिया को प्रॉक्सी या छद्म वोटिंग कहा जा रहा है। यूपीए सरकार ने फरवरी 2011 में जन प्रतिनिधित्व कानून में संशोधन करके एनआरआई को वोट देने का अधिकार दिया था। फिलहाल देश में सरकारी नौकरी करने वाले को ही प्रॉक्सी वोटिंग का अधिकार है।
अब तक देश से बाहर रहने वाले भारतीय खुद आकर ही अपने क्षेत्र (जहां की मतदाता सूची में उनका नाम है) में वोट डाल सकते हैं। लोकसभा में चर्चा के दौरान कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह बिल एनआरआई को चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने का मौका देगा। लोकसभा से पारित होने के बाद अब इस विधेयक का 6 महीने के भीतर राज्यसभा से पास होना जरूरी है।

प्रॉक्सी वोटिंग पर कैसे भरोसा करें : बहस के दौरान तृणमूल सांसद ममताज संघमित्रा ने कहा कि हर परिवार में लोगों की राजनीतिक सोच अलग-अलग होती है। ऐसे में एनआरआई कैसे भरोसा कर सकता है कि जिन लोगों को उसने अधिकार दिया है, वे उसकी इच्छानुसार ही वोट डालेंगे? आप सांसद धर्मवीर गांधी ने कहा कि एनआरआई को इस तरह वोटिंग का अधिकार देने से केवल बड़ी पार्टियों को फायदा होगा, क्योंकि वे ही उन तक पहुंच सकती हैं। एक सदस्य ने ई-वोटिंग या डिजिटल वोटिंग की सलाह दी। रविशंकर प्रसाद ने प्रसाद ने कहा कि प्रॉक्सी वोटिंग ही सही फैसला है। ई-वोटिंग या दूसरे देशों से डिजिटल वोटिंग कराना पूरी तरह से भरोसेमंद नहीं है। इसके ऑनलाइन होने से मतदान की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है।

नए बिल का क्या असर होगा : देश के 543 लोकसभा क्षेत्रों में 1.1 करोड़ एनआरआई वोटर हैं। इस हिसाब से प्रति लोकसभा सीट इनकी संख्या औसतन 21 हजार है। चुनावों में जीत का अंतर लगातार कम होता जा रहा है। ऐसे में एनआरआई वोटर अहम भूमिका निभा सकते हैं।

विपक्षी दलों को आशंका- भाजपा उठाएगी संशोधित कानून का फायदा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवंबर 2014 के बाद से दुनिया के ज्यादातर देशों का दौरा कर चुके हैं। इस दौरान वे एक करोड़ एनआरआई में से अधिकांश से मिल चुके हैं। विपक्षी दलों को आशंका है कि संशोधित कानून का भाजपा सबसे ज्यादा फायदा उठा सकती है।

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