राफेल सौदे की कीमत न बताने के राहुल के बयान को फ्रांस सरकार ने झुठलाया

4 वर्ष पहले
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  • राहुल ने कहा था- पीएम के दबाव में रक्षा मंत्री ने झूठ बोला, सौदे की कीमत नहीं बताई
  • फ्रांस ने कहा- 2008 में हुए समझौते में गोपनीयता की शर्त थी


नई दिल्ली.   मोदी सरकार के खिलाफ चार साल में लाए गए पहले अविश्वास प्रस्ताव पर शुक्रवार को लोकसभा में चर्चा हुई। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भाषण पर जमकर हंगामा हुआ और ठहाके भी लगे। राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में तीखे बयान दिए। उन्होंने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर राफेल लड़ाकू विमान की फ्रांस से हुई डील की कीमत छुपाने का आरोप लगाया। यह तक कहा कि मोदी के दबाव में रक्षा मंत्री ने देश से झूठ बोला था। हालांकि, कुछ घंटों के भीतर ही फ्रांस सरकार ने राहुल के बयान को झुठला दिया। फ्रांस सरकार ने कहा- हमारे राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में पहले ही साफ कर दिया था कि राफेल डील संवेदनशील है। समझौते की शर्तों के तहत इसकी कीमत का खुलासा नहीं कर सकते।

फ्रांस सरकार के जवाब पर राहुल ने कहा- मैं अपने बयान पर कायम हूं। अगर वे (फ्रांस के राष्ट्रपति) इसे नकारना चाहते हैं तो इसे नकारते रहें। उन्होंने ये मेरे सामने कहा था। मैं वहां पर था। आनंद शर्मा और डॉ. मनमोहन सिंह भी मौजूद थे। उधर, भाजपा ने राहुल के आरोपों पर कहा कि हम उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएंगे। 

 

राहुल का रक्षा मंत्री पर झूठ बोलने का आरोप : राहुल ने लोकसभा में दो हिस्सों में करीब 48 मिनट भाषण दिया। राहुल ने कहा, "यहां रक्षा मंत्री बैठी हैं। उन्होंने कहा था कि वे देश को राफेल हवाई जहाज का दाम बताएंगी। लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि करार के चलते वे दाम नहीं बता सकतीं। हालांकि, फ्रांस के राष्ट्रपति ने मुझे बताया कि ऐसा कोई करार भारत-फ्रांस के बीच नहीं है जो कहे कि आप लड़ाकू विमान के दाम नहीं बता सकते। नरेंद्र मोदी के दबाव में आकर निर्मला सीतारमण ने देश से झूठ बोला।" राहुल के बयान पर लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ और कार्यवाही एक बार स्थगित कर दी गई। बाद में संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा- संसद को गुमराह करने और गलत बयानबाजी करने के लिए भाजपा सांसद राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार हनने का प्रस्ताव लाएंगे। 

 

 

रक्षा मंत्री ने कहा- सीक्रेसी डील 2008 में यूपीए के वक्त हुई : राहुल के भाषण के बाद निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘‘फ्रांस के साथ सीक्रेसी एग्रीमेंट पर 2008 में दस्तखत हुए थे। इस समझौते के दायरे में राफेल डील भी आती थी। समझौते पर तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने दस्तखत किए थे।''

 

मोदी ने कहा- राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर बचकाना हरकत ठीक नहीं : ‘‘यहां राफेल डील पर बात हुई। क्या सत्य को इस तरह कुचला जा सकता है? बार-बार चीख-चीखकर गुमराह करने का काम? ये देश कभी माफ नहीं करेगा। ये दुखद है कि इस सदन में लगाए गए आरोप है कि दोनों देश को बयान जारी करना पड़ा और खंडन करना पड़ा। क्या ऐसी बचकाना हरकत हम करते रहेंगे क्या? कुछ जिम्मेदारी है या नहीं? बिना सबूत के चिल्लाते रहोगे? हर बार जनता ने आपको जवाब दिया। सुधरने का मौका दिया है, सुधरने की कोशिश कीजिए। ये समझौता दो देशों के बीच हुआ है। ये दो व्यापारियों के बीच नहीं हुआ है। पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ है। क्या हर जगह बचकाना हरकत करते रहोगे?’’

 

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