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एससी/एसटी को सभी राज्यों में समान आरक्षण के लिए पेश हुआ बिल, वोटिंग में राज्यसभा ने नकारा

संसद का मानसून सत्र शुक्रवार को खत्म हुआ

DainikBhaskar.com| Last Modified - Aug 10, 2018, 09:35 PM IST

Rajya Sabha reject resolution to treat SC ST equally across states
एससी/एसटी को सभी राज्यों में समान आरक्षण के लिए पेश हुआ बिल, वोटिंग में राज्यसभा ने नकारा

- कांग्रेस, राजद समेत विपक्षी दलों ने सपा सांसद के बिल का समर्थन किया

 

नई दिल्ली. एससी/एसटी समुदाय को सभी राज्यों में समान आरक्षण और सुविधाएं मुहैया कराने के लिए शुक्रवार को राज्यसभा में एक बिल पेश किया गया इसमें समाजवादी पार्टी के सांसद विशम्भर प्रसाद निषाद ने एससी/एसटी कानून में बदलाव की मांग की। हालांकि, राज्यसभा ने इस बिल को नकार दिया। वोटिंग में उच्च सदन के 66 सदस्यों ने इसके विरोध और 32 ने समर्थन में मतदान किया।

निषाद ने बिल पेश करते हुए कहा कि एससी/एसटी के लोग नौकरी पाने के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं और वहीं रहने लगते हैं। लेकिन उस राज्य की सूची में नहीं होने के चलते उन्हें आरक्षण और अन्य सुविधाओं का फायदा नहीं मिल पाता। इसीलिए देश में एक जैसे एससी/एसटी कानून की जरूरत है। 70 साल में इस व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ।

केंद्रीय मंत्री ने बिल वापस लेने की मांग की : सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने सपा सांसद से बिल वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि एससी/एसटी और ओबीसी को सूची में अंदर रखा जाए या बाहर, संसद पहले ही इसकी प्रक्रिया निर्धारित कर चुकी है। राज्य सरकारें इसके लिए प्रस्ताव भेजती हैं। एससी/एसटी कमीशन और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया की सहमति के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाता है। इसके बाद ही संसद में बिल लाया जाता है।

वोटिंग में हार हुई तो विपक्ष ने लगाए नारे : केंद्रीय मंत्री के जवाब से असंतुष्ट निषाद ने वोटिंग की मांग की। उपसभापति एचएन सिंह ने वोटिंग प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। इस दौरान कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि किसी प्राइवेट बिल के लिए वोटिंग कराना नियमों के खिलाफ है। इस पर उपसभापति ने कहा कि एक बार वोटिंग शुरू होने पर इसे रोका नहीं जा सकता। जब बिल के विरोध में वोटिंग हुई तो विपक्ष ने 'दलित विरोधी हाय-हाय' के नारे लगाए।

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