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सबरीमाला मंदिर में नए तीर्थयात्रा सीजन से अधिक गुणवत्ता वाला मिलेगा प्रसाद, सीएफटीआरआई की ली जाएंगी सेवाएं

सीएफटीआरआई, वैज्ञानिक और अनुसंधान परिषद के तहत बनाई गई 40 राष्ट्रीय शोध प्रयोगशालाओं में से एक है।

Dainik Bhaskar

Apr 29, 2018, 07:48 PM IST
सबरीमाला मंदिर चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इस तक पहुंचने के लिए 18 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। हर सीढ़ी के अलग-अलग अर्थ हैं। - फाइल सबरीमाला मंदिर चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इस तक पहुंचने के लिए 18 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। हर सीढ़ी के अलग-अलग अर्थ हैं। - फाइल

तिरुअनंतपुरम. यहां से करीब 175 किमी दूर पहाड़ियों पर स्थित अयप्पा मंदिर में मिलने वाले प्रसाद 'अप्पम' और 'अरावण' की गुणवत्ता, रंग, रूप और स्वाद में अगले सीजन से बदलाव होने वाला है। अयप्पा मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवोसम बोर्ड (टीडीबी) ने इसके लिए केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) की मदद ली है। बता दें कि सीएफटीआरआई तिरुमाला स्थित पहाड़ियों पर स्थित प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर और पलानी के भगवान मुरुगन मंदिर में 'लड्‌डू' और 'पंचामृत' बनाने में भी मंदिर प्रबंधन का मार्गदर्शन करता है।

हर साल लाखों श्रद्धालु करते हैं दर्शन

- हर साल नवंबर से जनवरी तक विदेशियों समेत लाखों श्रद्धालु पत्तनमतिट्टा जिले में सबरीमाला की पहाड़ी पर स्थित मंदिर में भगवान अयप्पा का दर्शन करते हैं।
- टीडीबी अध्यक्ष ए पद्मकुमार ने बताया कि मासिक पूजा के लिए मंदिर 15 मई को खोला जाएगा। इसके अगले दिन बोर्ड और सीएफटीआरआई के बीच एमओयू (समझौता

ज्ञापन) हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
- सरकार द्वारा संचालित सीएफटीआरआई के उत्पादन तंत्र का मूल्यांकन करने के लिए हाल ही में टीडीबी के पदाधिकारियों के एक दल ने उसके मैसूर स्थित कैम्पस का दौरा

किया था।

सीएफटीआरआई विशेषज्ञ देंगे प्रशिक्षण

- पद्मकुमार के अनुसार, 'चूंकि सीएफटीआरआई एक सरकारी एजेंसी है। इसलिए हमे नियम और शर्तों को तय करना और अंतिम रूप देना है। हमें उम्मीद है कि उनके और हमारे बीच 16 मई को एमओयू साइन हो जाएगा। सीएफटीआरआई के विशेषज्ञ मंदिर में अपने दौरे के दौरान उन लोगों को प्रशिक्षण भी देंगे जो प्रसाद तैयार करते हैं।'

- पद्मकुमार ने बताया कि यदि सबकुछ योजनाबद्ध हुआ तो अगले तीर्थयात्रा सीजन (नवंबर 2018 से जनवरी 2019 तक) में श्रद्धालुओं के लिए बदले हुए रूप और स्वाद वाला प्रसाद उपलब्ध होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारी 'डिब्बाबंद प्रसादम' के दाम बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।

मीठा और मुलायम होगा नया 'अप्पम'

- सबरीमाला में प्रसाद के रूप में मिलने वाला 'अप्पम' चावल, कादलिपाझाम (केले की एक किस्म), घी से तैयार किया गया लड्‌डू होता है। वहीं 'अरावण' गुड़ से बनी मोटी परत वाली मिठाई होती है।

- प्रसाद में क्या बदलाव किया जाएगा, इसके सवाल पर पद्मकुमार ने कहा कि इसमें डाली जाने वाली सामग्री में कोई बहुत बदलाव नहीं होगा, लेकिन कुल मिलाकर इसका स्वाद बढ़ाया जाएगा।

- मौजूदा समय में, 'अप्पम' कड़ा होता है। इसे मुलायम और अधिक मीठा बनाया जाएगा। वहीं 'अरावण' की मोटाई कम की जाएगी। इसमें गुड़ की मात्रा को 30-40 फीसदी तक कम किया जाएगा।

पैकिंग के तरीके में भी होगा बदलाव
- सीएफटीआरआई वैक्यूम तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। उनके विशेषज्ञों की देखरेख में प्रसाद की तैयारी और उसके पैकिंग के तरीके में भी बदलाव किया जाएगा।
- गुणवत्ता और स्वाद सुनिश्चित करने के लिए टीडीबी अपने प्रबंधन के तहत आने वाले सभी मंदिरों में प्रसाद बनाने की जिम्मेदारी सीएफटीआरआई को सौंपने पर विचार कर रहा है

- पद्मकुमार के अनुसार, इस संबंध में अंतिम फैसला अयप्पा मंदिर से संबंधित एमओयू साइन होने के बाद लिया जाएगा।

प्रसाद के रूप में मिलने वाली 'अरावण' गुड़ से बनी एक मोटी परत वाली मिठाई होती है। - फाइल प्रसाद के रूप में मिलने वाली 'अरावण' गुड़ से बनी एक मोटी परत वाली मिठाई होती है। - फाइल
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सबरीमाला मंदिर चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इस तक पहुंचने के लिए 18 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। हर सीढ़ी के अलग-अलग अर्थ हैं। - फाइलसबरीमाला मंदिर चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इस तक पहुंचने के लिए 18 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। हर सीढ़ी के अलग-अलग अर्थ हैं। - फाइल
प्रसाद के रूप में मिलने वाली 'अरावण' गुड़ से बनी एक मोटी परत वाली मिठाई होती है। - फाइलप्रसाद के रूप में मिलने वाली 'अरावण' गुड़ से बनी एक मोटी परत वाली मिठाई होती है। - फाइल
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