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सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 239एए की व्याख्या की, सिसोदिया ने अधिकार समझ ट्रांसफर और नियुक्ति व्यवस्था बदल डाली

Dainik Bhaskar

Jul 05, 2018, 02:19 AM IST

कानूनी विशेषज्ञों ने डिप्टी सीएम के कदम को गलत बताया

SC interpreted Article 239A Sisodia changed the transfer and appointment system
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  • सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार दोपहर 12 बजे दिल्ली के एलजी और राज्य सरकार के अधिकारों पर फैसला सुनाया
  • मनीष सिसोदिया ने शाम 5 बजे कहा- ट्रांसफर-पोस्टिंग अब मुख्यमंत्री करेंगे
  • सर्विस डिपार्टमेंट ने देर रात सरकार का फैसला मानने से इनकार कर दिया

नई दिल्ली. केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच अधिकारों के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी पिछले चार साल से जारी लड़ाई थम नहीं रही। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने बुधवार को कहा कि उपराज्यपाल (एलजी) स्वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले सकते। वह निर्वाचित सरकार की सलाह के प्रति बाध्य हैं। इसके कुछ घंटे बाद ही उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि अफसरों की पोस्टिंग और ट्रांसफर का अधिकार अब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पास है। लेकिन दिल्ली सरकार के सर्विस डिपार्टमेंट ने आदेश मानने से इनकार कर दिया।

सिसोदिया ने कहा कि सर्विस डिपार्टमेंट के चीफ सेक्रेटरी ने हमें लिखित में भेजा है कि वे पोस्टिंग-ट्रांसफर का अधिकार मुख्यमंत्री के पास होने का आदेश नहीं मान सकते। अब हम हमारे वकीलों से सलाह ले रहे हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब दिल्ली में पोस्टिंग-ट्रांसफर में केंद्र की कोई भूमिका नहीं है। सर्विस डिपार्टमेंट भी केंद्र के अधीन नहीं आता। फिर भी वे सहयोग नहीं करेंगे तो शहर में कामकाज कैसे होगा?

विशेषज्ञों ने डिप्टी सीएम के कदम को गलत बताया : सीनियर एडवोकेट केसी कौशिक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ एलजी और दिल्ली सरकार के अधिकार और कर्तव्य स्पष्ट किए हैं। नियुक्ति-ट्रांसफर जैसे मुद्दों पर कोई फैसला नहीं दिया है। इन मुद्दों पर रेगुलर बेंच सुनवाई के बाद फैसला देगी। सीनियर एडवोकेट विराग गुप्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर में स्पष्ट लिखा है कि इसमें सिर्फ संवैधानिक मुद्दों पर निर्णय दिया है। बाकी मुद्दों पर डिविजन बेंच सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देती केजरीवाल सरकार की अर्जी पर फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि दिल्ली के प्रशासनिक मुखिया उपराज्यपाल ही हैं। कोई भी फैसला उनकी मंजूरी के बिना नहीं लिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आम आदमी पार्टी की सरकार को तीन फायदे, तीन नुकसान

सियासी फायदे सियासी नुकसान
कैबिनेट के अंतिम फैसलों में एलजी के पास फाइल भेजने के नाम पर देरी नहीं होगी। एलजी मंजूरी नहीं देते, ये बहाना नहीं बना पाएंगे और मनमाफिक आदेश भी जारी नहीं कर पाएंगे।
उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री या कैबिनेट के बीच रायशुमारी बढ़ेगी, जिसकी अभी तक काफी कमी थी। मुद्दों पर एलजी का अधिकार होने की दलील देकर जनता को कामकाज के लिए मना नहीं कर पाएंगे।
आप नेताओं ने दावा किया है कि अब ऑफिसर्स भी काम करेंगे, वे हमारी फाइलें दबाकर नहीं बैठेंगे। रुके हुए कामों पर कानूनी फ्रेम चढ़ाना आसान नहीं होगा। उपराज्यपाल अब जवाबदेही से बाहर रहेंगे।

यह भी पढ़ें: दिल्ली के उपराज्यपाल स्वतंत्र फैसले नहीं ले सकते, वे सरकार के काम में बाधक नहीं बन सकते: सुप्रीम कोर्ट

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