Hindi News »National »Latest News »National» Shanghai Cooperation Organisation Narendra Modi Xi Jinping Vladimir Putin Pak India China News And Updates

चीन में जिनपिंग से मिले मोदी, 2 करार हुए; ब्रह्मपुत्र का पानी छोड़ने से पहले बीजिंग से मिलेगी सूचना

एक्सपर्ट कहते हैं कि भारत को किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने मुद्दे साफ रखने चाहिए।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 09, 2018, 10:07 PM IST

  • चीन में जिनपिंग से मिले मोदी, 2 करार हुए; ब्रह्मपुत्र का पानी छोड़ने से पहले बीजिंग से मिलेगी सूचना, national news in hindi, national news
    +1और स्लाइड देखें
    नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर 2019 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आएंगे।

    • समिट में कोई देश द्विपक्षीय बात नहीं करेगा यानी भारत वहां पाकिस्तान की बात नहीं कर सकेगा
    • भारत और पाकिस्तान को मेंबर बनाने के लिए 3 साल पहले शुरू हुई थी प्रक्रिया

    बीजिंग. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई को-ऑपरेशन आर्गनाइजेशन समिट (एससीओ) में हिस्सा लेने शनिवार को चीन के किंगदाओ पहुंचे। यहां उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। पिछले दो महीनों में दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात है। दोनों देशों के बीच ब्रह्मपुत्र और खेती को लेकर दो अहम समझौते हुए हैं। करार के तहत चीन ब्रह्मपुत्र का पानी छोड़ने से पहले भारत को सूचना देगा। चीन ने भारत से बासमति के अलावा दूसरे किस्म के चावल खरीदने पर भी सहमति जताई है। इस समिट में भारत-पाकिस्तान बतौर सदस्य पहली बार शामिल हो रहे हैं। भारत ने साफ किया है कि पाक के साथ कोई आधिकारिक मुलाकात नहीं होगी।

    2019 में भारत की यात्रा करेंगे जिनपिंग

    - विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि जिनपिंग ने मोदी आमंत्रण स्वीकार किया है। वे 2019 में भारत आएंगे।
    - गोखले के मुताबिक, "जिनपिंग ने इस समिट को काफी सकारात्मक बताया। उन्होंने हमारे द्विपक्षीय संबंधों में इस समिट को नई शुरुआत करार दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे दोनों देशों के रिश्ते के लिए मील का पत्थर बताया।"
    - उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच पीपुल टू पीपुल तंत्र बनाया जाएगा। भारत की ओर से विदेश मंत्रालय इसकी अगुआई करेगा। वहीं, चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी इसकी देखरेख करेंगे। इसकी पहली बैठक इसी साल होगी।

    एक्सपर्ट व्यू

    एससीओ समिट में भारत की रणनीति को लेकर दैनिक भास्कर ने विदेश मामलों के जानकार रहीस सिंह से बात की। रहीस सिंह के मुताबिक, "एससीओ एक आर्थिक और सैन्य मंच है, जिसमें मध्य एशिया के अहम देश शामिल हैं। इसमें आपसी व्यापार और सुरक्षा मुख्य मुद्दा हैं। नाटो इस संगठन पर लगातार आरोप लगाता है कि ये एक प्रतिद्वंदी संगठन है, जो उसे ओवरटेक करना चाहता है। हमारे शामिल होने के बाद भी वहां मुद्दे तो वही रहेंगे जो पहले रहते थे।"

    पाकिस्तान के मसले पर विरोधाभास

    - "एससीओ के संविधान का आर्टिकल 1 कहता है कि समिट में कोई देश द्विपक्षीय बात नहीं करेगा यानी आप वहां पाकिस्तान की बात नहीं कर सकते।"

    - "जब प्रधानमंत्री मोदी चीन के वुहान से लौटकर भारत आए थे तो ये बात आई थी कि आतंकवाद से लड़ने के लिए भारत पाक के साथ युद्धाभ्यास करेगा। अब जो देश आतंकियों को सहयोगी मानता हैं, उनके साथ आतंकवाद को खत्म करने का युद्धाभ्यास किया जाए, ये कैसे संभव है?"
    - "चीन लगातार पाकिस्तान को समर्थन दे रहा है, क्योंकि वो जानता है कि पाक भारत को परेशान करता है फिर भी वो सपोर्ट कर रहा है। साथ ही मसूद अजहर और हाफिज सईद पर जब भी भारत कोई प्रतिबंध लाता है तो चीन उसको वीटो कर सकता है। क्या ये माना जाए कि भारत समिट के दौरान चीन के सामने वीटो ना करने का मुद्दा रखेगा। ऐसा लगता नहीं।"

    हर समिट में अब आतंकवाद ही मुद्दा
    - "आतंकवाद अब सदाबहार मुद्दा हो गया है। हर समिट में आतंकवाद की बात होती है चाहे जी-20 की बात हो या ब्रिक्स की, लेकिन प्रगति नहीं होती। चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को जो करना है वो करते हैं। हम किसी भी पाकिस्तानी आतंकी को अदालतों में सजा नहीं दिला पाए हैं, क्योंकि वो सबूतों को नहीं मानते।"
    - "भारत और पाक की इतनी दुश्मनी है कि हम लगातार कई सालों से सार्क बैठक में शामिल नहीं हो रहा। लेकिन हम एससीओ में पाक के साथ बैठेंगे। अगर वो इतना बड़ा दुश्मन है तो हमें एससीओ में भी उसके साथ नहीं बैठना चाहिए।"

    भारत अपने मसले साफ रखे
    - "हमारे डिफेंस चैलेंज मालदीव में हैं, नेपाल में हैं, चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) में हैं। जहां चीन फंडिंग कर रहा है। तो हम जब द्विपक्षीय बात करें तो हमारे मुद्दे क्लियर होने चाहिए।"
    - "हाल ही में वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा था- ‘डिप्लोमेसी विद प्रोपेगैंडा’। लेकिन डिप्लोमेसी विद प्रोपेगैंडा नहीं डिप्लोमेसी विद सब्जेक्ट होनी चाहिए, जिसमें देश का हित भी हो। लेकिन हम हर मंच पर बार बार विषय दोहराते हैं। हम विषयों का खुलासा भी नहीं करते हैं। हम उसकी समीक्षा भी नहीं करते कि उस विषय पर कितने कदम आगे बढ़ें।"
    - "भारत सरकार की जवाबदेही होनी चाहिए कि जो चीन या किसी देश से जो पिछले समझौते हुए थे उनपर कुछ प्रगति हुई या नहीं। वर्ना मुद्दे हमेशा असमंजस की स्थिति में रह जाते हैं।

    सीपैक और एनएसजी पर चीन का रुख
    - "वन बेल्ट वन रोड सीपैक का एक फेस पार्ट है। चीन चाहता है कि भारत इससे जुड़ जाए। लेकिन भारत ने आधिकारिक तौर पर इसे चीन की साम्राज्यवादी नीति बताया है। ये बयान विदेश मंत्रालय की ओर से लिखित जारी किया गया था। साथ ही संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में भी दिया गया था। यानी ऐसे में भारत चीन की इस नीति में शामिल नहीं हो सकता। अगर होता है तो इसका मतलब होगा कि भारत चीन की साम्राज्यवादी नीति में उसका साथ दे रहा है।"
    - "एनएसजी (न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप) में चीन भारत का कतई समर्थन नहीं करेगा। हमारी मीडिया ने भी काफी लिखा कि दुनिया के कई देशों ने भारत का इस मामले पर समर्थन किया है। लेकिन अगर कोई एक देश भी इसमें भारत का विरोध करता है तो भारत इसमें शामिल नहीं हो सकता। दुनिया जानती है कि चीन इसमें भारत का साथ नहीं देगा।"
    - "अगर भारत ने चीन से एनएसजी पर बात की है तो ये बताना जरूरी है कि उनके बीच क्या बात हुई। सिओल में एनएसजी को लेकर तब मोदी ने जिनपिंग से कहा था कि आप इस तरफ सकारात्मक कदम बढ़ाइए लेकिन जिनपिंग ने इसे गूढ़ विषय बताते हुए टाल दिया था।"

    एससीओ में इस बार क्या रहेगा मकसद?
    - चीन में भारत के राजदूत गौतम बंबावले के मुताबिक, "मोदी, शी जिनपिंग समेत कई नेताओं से मुलाकात करेंगे।"
    - "इस बार की समिट में मुख्य मुद्दे सुरक्षा सहयोग, आतंकवाद, आर्थिक विकास के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान होगा।"
    - "भारत-चीन तरक्की के मुद्दे पर सहयोगी देश हैं। कई मसलों पर दोनों देशों के बीच सहमति है तो कुछ पर ही असहमति है। जहां पर दोनों देश एकराय हैं, उन मामलों पर दोनों देशों के नेता की आगे की रणनीति तय करेंगे।"
    - "मई में सोची में व्लादिमीर पुतिन के साथ मोदी की अनौपचारिक मुलाकात हुई थी। चीन, रूस और भारत तीनों एससीओ के सदस्य हैं। ऐसे में ये संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका अदा कर सकता है।"

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: भारत और पाकिस्तान को मेंबर बनाने के लिए 3 साल पहले शुरू हुई थी प्रक्रिया...

  • चीन में जिनपिंग से मिले मोदी, 2 करार हुए; ब्रह्मपुत्र का पानी छोड़ने से पहले बीजिंग से मिलेगी सूचना, national news in hindi, national news
    +1और स्लाइड देखें
Topics:
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From National

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×