देश

--Advertisement--

शाहजहां के दस्तखत वाला वक्फनामा पेश नहीं कर पाया सुन्नी बोर्ड, सुप्रीम कोर्ट ने कहा अदालत का वक्त बर्बाद न करें

बोर्ड ने पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट में दावा किया कि खुद मुगल बादशाह शाहजहां ने बोर्ड के पक्ष में इसका वक्फनामा किया था

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 03:25 PM IST
ताजमहल पर हक को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियाेलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के बीच विवाद चल रहा है। -फाइल ताजमहल पर हक को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियाेलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के बीच विवाद चल रहा है। -फाइल

- बोर्ड ने कहा कि वक्फ को दी जाने वाली संपत्ति खुदा की होती है, इसलिए ताजमहल का असली मालिक खुदा है।
- ताजमहल पर हक को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के बीच विवाद चल रहा है।

नई दिल्ली. ताजमहल पर मालिकाना हक जताने वाला सुन्नी वक्फ बोर्ड मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां के दस्तखत वाला वक्फनामा पेश नहीं कर पाया। इस पर, चीफ जस्टिस ने कहा कि बोर्ड कोर्ट का वक्त बर्बाद कर रहा है। बता दें कि वक्फ बोर्ड ने पिछली सुनवाई में दावा किया था कि मुगल बादशाह शाहजहां ने बोर्ड के पक्ष में ताजमहल का वक्फनामा किया था। इस पर कोर्ट ने सबूत मांगे थे। यह विवाद सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के बीच चल रहा है।

दावेदारी पर नरम पड़ा वक्फ बोर्ड
- ताजमहल पर दावेदारी कर रहा वक्फ बोर्ड मंगलवार को कोर्ट में नरम नजर आया। उसने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने कहा कि उसे कोई दिक्क्त नहीं है कि ताजमहल की देखरेख एएसआई करे, लेकिन बोर्ड का यहां नमाज पढ़ने और उर्स जारी रखने का हक बरकरार रहे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड से कहा कि उसे इस बारे में एएसआई से बात करनी चाहिए। इस पर एएसआई ने विचार करने के लिए वक्त मांगा। केस की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था- शाहजहां जेल में थे तो दस्तखत कैसे किए?
- पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने वक्फ बोर्ड के वकील से पूछा था, "शाहजहां ने वक्फनामे पर दस्तखत कैसे किए? वह तो जेल में बंद थे। वह हिरासत से ही ताजमहल देखते थे।"
- कोर्ट ने शाहजहां के दस्तखत वाला हलफनामा पेश करने को कहा तो बोर्ड के वकील ने एक हफ्ते की मोहलत मांगी थी।

बोर्ड के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था स्टे
- सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जुलाई 2005 में आदेश जारी कर ताजमहल को अपनी प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर करने को कहा था।
- एएसआई ने इसके खिलाफ 2010 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इस पर कोर्ट ने बोर्ड के फैसले पर स्टे लगा दिया था।
- बता दें कि वक्फ का मतलब किसी मुस्लिम द्वारा धार्मिक, शैक्षणिक या चैरिटी के लिए जमीन का दान देना होता है।

एएसआई कहता है- ताजमहल भारत सरकार का
- एएसआई की ओर से पेश एडवोकेट एडीएन राव ने कहा कि वक्फ बोर्ड ने जैसा दावा किया है, वैसा कोई वक्फनामा नहीं है।
- 1858 की घोषणा के मुताबिक, आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर से ली गई संपत्तियों का स्वामित्व ब्रिटिश महारानी के पास चला गया था। वहीं, 1948 के कानून के तहत यह इमारतें अब भारत सरकार के पास हैं।

1666 में हुआ था शाहजहां का निधन
- बता दें कि वारियाना हक की लड़ाई के चलते शाहजहां के बेटे औरंगजेब ने जुलाई 1658 में उन्हें आगरा के किले में नजरबंद कर दिया था। अपनी बेगम मुमताज महल की याद में ताजमहल बनवाने के करीब 18 साल बाद 1666 में शाहजहां का निधन आगरा के किले में ही हुआ था।

सुन्नी वक्फ बोर्ड के खिलाफ एएसआई ने 2010 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। -फाइल सुन्नी वक्फ बोर्ड के खिलाफ एएसआई ने 2010 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। -फाइल
X
ताजमहल पर हक को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियाेलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के बीच विवाद चल रहा है। -फाइलताजमहल पर हक को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियाेलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के बीच विवाद चल रहा है। -फाइल
सुन्नी वक्फ बोर्ड के खिलाफ एएसआई ने 2010 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। -फाइलसुन्नी वक्फ बोर्ड के खिलाफ एएसआई ने 2010 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। -फाइल
Click to listen..