केंद्र को सुप्रीम कोर्ट की फटकार; कहा- प्रदूषण से 60 हजार मौते हुईं, लोगों की जान अहम या उद्योग

4 वर्ष पहले
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नई दिल्ली.  “अखबारों में रिपोर्ट छपती हैं कि प्रदूषण के कारण 60 हजार लाेग मारे गए। साफ-साफ समझ लें कि देश के लोगों की जान उद्योगों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।’ प्रदूषण के मुद्दे पर सोमवार को पर्यावरण और वन मंत्रालय को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की। 
 दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के मुद्दे पर पर्यावरणविद् एमसी मेहता ने 33 साल पहले 1985 में याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई के दौरान मंत्रालय ने उद्योगों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल होने वाले पेट कोक के आयात पर पाबंदी के प्रभावों के अध्ययन के लिए कोर्ट से मोहलत मांगी। इस पर जस्टिस एमबी लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा, “पेट कोक के आयात को इजाजत देने के लिए आप बेहद उत्सुक दिखते हैं। क्या आप बिना अध्ययन किए देश में पेट कोक के आयात की इजाजत दे रहे थे? अखबारों में छपता है कि प्रदूषण से 60 हजार लोग मारे गए। आप कर क्या रहे हैं?’ बेंच ने कहा, “हमें नहीं पता कि यह रिपोर्ट सच है या झूठ। लेकिन आपकी रिपोर्टों ने भी संकेत दिए हैं कि प्रदूषण से लोग मर रहे हैं।’

 

लोग उद्योगों से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं: हालांकि, मंत्रालय की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) की रिपोर्ट में मंत्रालय को अति उत्साही बताया गया है। एेसा नहीं है। अध्ययन और ईपीसीए के साथ चर्चा में बुराई क्या है?’ इस पर बेंच ने कहा, “एक बार साफ-साफ समझ लें। इस देश के लोग उद्योगों से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।’ कोर्ट ने मंत्रालय को आदेश दिया कि एक हफ्ते में ईपीसीए के साथ बैठक कर सूचित करें।

 

 

चांद-तारे के निशान वाले हरे झंडे पर पाबंदी की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा:  इधर, चांद-तारे के निशान वाले हरे झंडे पर देशभर में पाबंदी की मांग से जुड़ी याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा। केंद्र को चार हफ्ते के अंदर हलफनामे के रूप में जवाब दायर करना होगा। जस्टिस एके सिकरी और अशोक भूषण की बेंच के समक्ष एडिशनल सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र से निर्देश प्राप्त कर जल्द ही जवाब दायर करेंगे।

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