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सभी हाईकोर्ट तय करें कि बच्चों से यौन शोषण के केसों की सुनवाई तेजी से हो: सुप्रीम कोर्ट

2016 के आंकड़ों के अनुसार बाल यौन उत्पीड़न के एक लाख मामले कोर्ट में लंबित हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - May 01, 2018, 03:23 PM IST

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    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट पॉक्सो एक्ट के मामलों की मॉनिटरिंग के लिए 3 जजों की कमेटी भी बना सकते हैं।

    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि पॉक्सो एक्ट (बच्चों के साथ यौन शोषण) के मामलों की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में तेजी से हो। इनके लिए हाईकोर्ट चाहें तो इसकी निगरानी के लिए 3 जजों की एक कमेटी बना सकते हैं। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने अलख आलोक श्रीवास्तव की पिटीशन पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए।

    सुनवाई बेवजह आगे न बढ़ाई जाए
    - न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा हाईकोर्ट को ट्रायल कोर्ट के जजों को सुझाव देना चाहिए कि वे पॉक्सो एक्ट के मामलों की सुनवाई बेवजह आगे न बढ़ाएं।

    नए कानून में 2 महीने में जांच होगी, 2 महीने में ट्रायल पूरा

    - सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडीशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) पिंकी आनंद ने बताया कि नए कानून में केस के तेजी से निपटारे का भी प्रावधान है। ऐसे मामलों में दो महीने में जांच पूरी होगी और दो महीने में ट्रायल पूरा किया जाएगा। वहीं, ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ 6 महीने में अपील की जा सकेगी।

    - याचिकाकर्ता ने बताया कि हाईकोर्ट की रिपोर्टों के मुताबिक 25 राज्यों में पॉक्सो एक्ट के तहत 1 लाख 12 हजार 628 केस लंबित हैं। यूपी में सबसे ज्यादा 30 हजार 884 केस हैं, इसमें 58.55% केस सबूत पेश करने के चरण में हैं। महाराष्ट्र, गोवा, दमन-दीव, दादरा-नगर हवेली में 16 हजार 99 और मध्य प्रदेश में 10 हजार 117 केस लंबित हैं। दिल्ली में 6 हजार 100 केसों में 4 हजार 155 अभियोजन की ओर से सबूत पेश करने के चरण में हैं।

    कठुआ केस के बाद पॉक्सो एक्ट चर्चा में

    - बता दें कि कठुआ गैगरेप मामला सामने आने के बाद पॉक्सो एक्ट फिर चर्चा में है। हाल ही में सरकार इसमें संशोधन का अध्यादेश लाई जिसे राष्ट्रपति ने मंजूर कर लिया। अब इस कानून के तहत 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म के मामलों में मौत की सजा का प्रावधान किया गया है। पहले अधिकतम उम्रकैद की सजा थी।

    कम उम्र के लड़कों के यौन शोषण पर भी सख्त सजा हो
    - केंद्र सरकार ने पॉक्सो एक्ट को जेंडर न्यूट्रल बनाने का प्रस्ताव भी रखा है। यह मंजूर हुआ तो कम उम्र के लड़कों का यौन शोषण करने वालों को भी सख्त सजा दी जा सकेगी। अभी इस एक्ट में सिर्फ बच्चियों का यौन शोषण करने वालों के लिए गंभीर सजा का प्रावधान है।

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    कठुआ गैंगरेप का मामला सामने आने के बाद देशभर में विरोध-प्रदर्शन हुए।
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