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काई के पंख हैं क्या, जो उड़कर ताजमहल पर चिपकती है: खराब रखरखाव पर एएसआई को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

एएसआई ने कोट में दलील दी थी कि गंदे जुराबों, यमुना की काई व कीटों से बदरंग हो रहा ताजमहल।

DainikBhaskar.com| Last Modified - May 10, 2018, 12:12 AM IST

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Supreme Court slams Archaeological Survey of India for not protecting Taj Mahal
भारत में प्राचीन स्मारकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पास है। (फाइल)

 

  • एएसआई की ओर से सीनियर एडवोकेट एडीएन ने ताज का रंग सफेद से पीला और फिर हरा होने पर रिपोर्ट पेश की
  • कोर्ट ने कहा कि ताज के रखरख्सव में एएसआई ने लापरवाही बरती है। खुद के बचाव के लिए उनके तरीके से हम हैरान हैं
  • केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस काम के लिए विदेशी एक्सपर्ट नियुक्त करने के सुझाव पर विचार जारी है

 

नई दिल्ली.  ताजमहल का रंग लगातार खराब होने के लिए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अजीबोगरीब कारण गिनाए। ताज की देखरेख करने वाली इस एजेंसी ने कहा कि पर्यटकों के गंदे जुराबों (मोजों) से इमारत की फर्श खराब हो रही है। यमुना में जमी काई उड़-उड़कर ताजमहल पर जमा हाे रही है। इसलिए इमारत का रंग खराब हो रहा है। हालांकि, जस्टिस एमबी लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच ने एएसआई को फटकार लगाते हुए दलीलें खारिज कर दीं। उन्होंने पूछा, "क्या काई के पंख निकल आए हैं जो उड़कर ताजमहल पर जाकर जम जाती है?"

 

एएसआई ने 3 कारण गिनाए; सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी

1) पर्यटकों के गंदे मोजे: एएसआई की ओर से सीनियर एडवोकेट एडीएन ने ताज का रंग सफेद से पीला और फिर हरा होने पर रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कहा कि ताज पहुंचने वाले कई पर्यटकों के जुराबे गंदे होते हैं। इससे फर्श को नुकसान पहुंच रहा है।

2) यमुना में जमी काई: यमुना में भारी मात्रा में जमी काई से ताजमहल का रंग खराब हो रहा है। जस्टिस लोकुर ने पूछा, "काई ताजमहल पर कैसे पहुंची? जवाब में एएसआई ने कहा कि उड़कर पहुंची। इस पर जस्टिस लोकुर ने तंज कसा कि क्या काई को पंख लग गए हैं, जो उड़कर ताजमहल पर चिपकती है।"

3) यमुना में पनप रहे कीड़े:  यमुना में काई पर पनप रहे कीट-पतंगे ताजमहल पर बैठकर मल भी करते हैं। जस्टिस गुप्ता ने कहा- "कीट-पतंगे तो पहले भी थे, अब समस्या क्यों हुई। एएसआई ने कहा कि पहले मछलियां इन्हें खा जाती थीं। नदी पर बैराज बनने से मछलियां नहीं रहीं। स्थिर हो चुके पानी में काई जमती है।"

 

केंद्र सरकार ने कहा- एएसआई की दलीलों से हम भी हैरान हैं 
केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलीसिटर जनरल एएसजी एएनएस नाडकर्णी ने कहा कि एएसआई ने लापरवाही बरती है। खुद के बचाव के लिए उनके तरीके से हम हैरान हैं। ताजमहल के संरक्षण के लिए विदेशी एक्सपर्ट नियुक्त करने संबंधी कोर्ट के सुझाव पर विचार कर रहे हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आप इसे समस्या मानने को तैयार नहीं

दलीलों को बेकार बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा- "एएसआई यह मानने को तैयार नहीं है ताज के साथ कोई समस्या है। वह जिम्मेदारी दिखाता तो ऐसे हालात नहीं बनते। हमने 22 साल पहले 1996 में इस मुद्दे पर आदेश दिए थे, लेकिन आज तक अमल नहीं हुआ। अगर एएसआई इसे समस्या नहीं मान रहा तो उसे ताज के संरक्षण का जिम्मा नहीं देना चाहिए। यही रवैया रहा तो ताजमहल की देखरेख के लिए कोई और विकल्प देखना पड़ेगा।"

 

चार हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट

इस पर केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस काम के लिए विदेशी एक्सपर्ट नियुक्त करने के सुझाव पर विचार जारी है। सुनवाई जुलाई तक टालते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि यमुना पर कितने बैराज बनाए जा रहे हैं। रिपोर्ट चार हफ्ते में देनी होगी। यूपी सरकार से पूछा है कि ताज के लिए संरक्षित क्षेत्र के ढाई एकड़ में लगाए पौधों में से कितने जीवित हैं? साथ ही केंद्र और एएसआई से ताज के सदियों तक संरक्षण पर विजन डाक्यूमेंट भी मांगा है।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर एएसआई अपनी जिम्मेदारी ठीक ढंग से निभा रहा होता ऐसी परेशानी नहीं आती। (फाइल)
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