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सादी ड्रेस में सेना प्रमुख करते थे मीटिंग, वॉर रूम में मोदी भी पहुंचे थे, 11 दिन में बनी थी सर्जिकल स्ट्राइल की प्लानिंग

Dainik Bhaskar

Jun 28, 2018, 11:35 AM IST

यह ऑपरेशन सटीक इसलिए बन गया क्योंकि इसकी प्लानिंग बहुत ही सिस्टेमैटिक ढंग से की गई थी।

surgical-strike-video came : Planning of surgical strike
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नेशनल डेस्क। उड़ी आतंकी हमले का बदला लेने के लिए 29 सितंबर 2016 को सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में सर्जिकल स्ट्राइक किया था। इस सर्जिकल स्ट्राइक को दुनिया के सैन्य इतिहास का सबसे सटीक ऑपरेशन बताया जाता है जिसमें भारतीय सेना का केवल एक जवान घायल हुआ था। यह ऑपरेशन सटीक इसलिए बन गया क्योंकि इसकी प्लानिंग बहुत अच्छे से की गई थी। इस स्ट्राइक के 21 महीने बाद एक वीडियो सामने आया है। इसमें सेना के जवानों को ऑपरेशन को अंजाम देते दिखाया गया है। करीब आठ मिनट के इस वीडियो के सोर्स की पुष्टि नहीं हुई है। सेना ने भी वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं की है।

इस तरह से चला था घटनाक्रम, ऐसी हुई थी प्लानिंग :

पाक को दिए सबूत, लेकिन उसने खारिज कर दिए :

18 सितंबर 2016 को जैश-ए-मोहम्मद फिदाइन दस्ते ने भारतीय सेना की 12 ब्रिगेड के एडमिनिस्ट्रेटिव स्टेशन पर हमला किया था। इस हमले में 19 जवान शहीद हो गए थे। मौके पर मारे गए आतंकियों से जब्त जीपीएस सेट्स से हमलावरों के पाकिस्तान से जुड़ाव का पता चला। हमले के तीन दिन बाद भारतीय विदेश सचिव एस. जयशंकर ने पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित को समन कर बुलाया। उन्हें उरी हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता के सबूत सौंपे। लेकिन इस्लामाबाद ने इन सबूतों को खारिज कर दिया।

जवाबी कार्रवाई का फैसला लिया :

इस पर सरकार ने पाक को उचित जवाब देने का निश्चय किया। इस बारे में दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह सुहाग और डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को जवाबी कार्रवाई के तौर पर सभी सैन्य विकल्पों के बारे में जानकारी दी।

मोदी भी पहुंचे थे वॉर रूम :

23 सितंबर की रात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायसीना हिल के साउथ ब्लॉक स्थित भारतीय सेना के टॉप सीक्रेट वॉर रूम में पहुंचे। सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों और अजीत डोभाल ने भारत की अगली कार्रवाई के बारे में उन्हें जानकारी दी।

सेना प्रमुखों के मोबाइल फोन स्विच ऑफ किए :
इसके बाद स्ट्राइक होने तक सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों और इंटेलीजेंस एजेंसियों ने अपने मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर दिए। उनकी जितनी भी मीटिंग्ह हुईं, वे अत्यंत गोपनीय ढंग से हुईं। इन बैठकों में जाने के लिए वे बिना यूनिफॉर्म और बिना स्टाफ कार के पहुंचते थे। ये सभी बैठकें रायसीना हिल्स से दूर अज्ञात स्थानों होती थीं। इसके बाद आर्मी की स्पेशल फोर्सेज की 4 और 9 पैरा बटालियन्स के कमांडिंग ऑफिसर्स को उनके आगामी मिशन के बारे में बताया गया। उनसे अपने सबसे बेहतरीन जवानों को चुनने को कहा।

अग्रिम मोर्चों पर पहुंचाए गए कमांडोज :
एमआई-17 ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर्स ने कमांडोज और उनके उपकरणों को एलओसी के पास अग्रिम क्षेत्रों में पहुंचाना शुरू कर दिया गया। उनसे वहां अगले आदेश का वेट करने के लिए कहा गया। 6 बिहार और 10 डोगरा बटालियन्स को भी अपने घातक कमांडोज को निर्णायक ऑपरेशन के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया। इनकी घातक टीम को एलओसी के पास लॉन्च लोकेशन्स पर स्ट्राइक फोर्स को ज्वाइन करने के ऑर्डर मिले।

26 सितंबर को प्लान को अंतिम रूप दिया :
इस दिन एनएसए डोभाल ने सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों और इंटेलीजेंस हेड्स के साथ बैठक की। सीमा पार 8 ठिकानों पर एक साथ धावे की ऑपरेशनल डिटेल्स को अंतिम रूप दिया गया। POK के जिस इलाके में भारतीय जवानों को जाना था, वह पाक सेना की तीन डिविजन्स के दायरे में आते थे। यहीं कमांडोज को 3 किलोमीटर तक भीतर जाना था।

सर्जिकल स्ट्राइक
28-29 सितंबर की मध्य रात्रि को ऑपरेशन शुरू हुआ। एलओसी के पार सेना के ये कमांडो पैदल ही अंधेरे में अदृश्य हो गए। पैदल पहुंचने के कारण इन कमांडो की ना तो पाकिस्तानी रडार और ना ही हवा में पूर्व चेतावनी देने वाला एयरक्राफ्ट कोई टोह ले सका। इनके अलावा 30 पैरा कमांडो को काफी ऊंचाई पर खुलने वाले विशेष हाहो पैराशूट्स से उतारा गया। ये पैराट्रूपर्स करीब 35,000 फीट की ऊंचाई से कूदे ताकि पाकिस्तानी रडार उन्हें पकड़ ना पाएं। इन कमांडोज ने तेजी और पूरे कोआर्डिनेशन के साथ आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया।


इस पूरे ऑपरेशन की वीडियोग्राफी स्पेशल फोर्सेज कमांडो के हेलमेट पर लगे कैमरों से की जाती रही। जो वीडियो वायरल हुआ है, संभवत: उसे इन्हीं कैमरों से लिया हुआ बताया जा रहा है।

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