इनकम टैक्स रिटर्न : पैटर्न में हुए इन बदलावों में उलझकर परेशान हो रहे करदाता, जानिए क्या है समाधान

4 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने में करदाताओं को पैटर्न में हुए बदलाव और नए कॉलम जोड़े जाने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।कई बार तो ऐसा भी होता है कि आयकर का फार्म सिस्टम में अपग्रेड होने के बाद नया फार्म आता है तब नियमों में बदलाव की जानकारी होती है। पार्टनरशिप फर्म के मामले में नया नियम एक ही दिन पहले आया है। इसके तहत केवल पार्टनरशिप फर्म से आय अर्जित करने वालों को बैलेंस शीट देने की अनिवार्यता से मुक्त कर दिया है। उनके लिए केवल कोड 00001 डालना ही काफी होगा। 


क्यों नहीं देनी पड़ेगी बैलेंस सीट 

इसके पीछे आयकर विभाग का तर्क है कि जब पार्टनर की किसी अन्य कारोबार से कोई बिजनेस आय है ही नहीं तो वह बैलेंस शीट कहां से लाएगा। भास्कर आपको कुछ ऐसे बदलावों के बारे में बता रहा है जिनमें पहली बार जानकारी देनी पड़ रही हैं।

 


इस बार क्या हुए हैं बदलाव 

पार्टनरशिप फर्म : इस बार से आईटीआर फार्म -3 भरना होगा। हालांकि इस फॉर्म को भरने वाले को पहले की तरह बैलेंस शीट नहीं भरनी होगी। 

बैलेंस शीट : आयकर की धारा 44 एडी, 44 एई, 44 एडीए में रिटर्न फाइल करने के लिए बैलेंस शीट देनी होगी। 

प्रॉपर्टी : एक से अधिक प्रॉपर्टी है तो आईटीआर-2 में रिटर्न फाइल करना होगा। 

टीडीएस : पहली बार टीडीएस बांटने की छूट, यानी पति का जो टीडीएस कटा, वह पत्नी के आयकर खाते 26 एएस में ट्रांसफर हो सकता है। 

सेक्शन 87 ए : 5,000 रुपए की मिलने वाली छूट की सीमा घटाकर 2,500 रुपए कर दी गई है, लेकिन यहां यह छूट केवल उन्हीं को मिलेगी जिनकी सालाना आय 3.50 लाख से कम होगी। इससे अधिक पर छूट नहीं मिलेगी। 

कैपिटल गैन : लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन पर टैक्स गणना करने की समय सीमा 3 साल से घटाकर दो साल कर दी गई है। शेयर से मिलने वाले लाभ पर समय सीमा 12 माह की अवधि ही रखी गई है।

कंट्री कोड : पहली बार माेबाइल नंबर के साथ कंट्री कोड डालना होगा। आयकरदाता भारतीय है तो उसे मोबाइल नंबर से पहले 91 दर्ज करना होगा। 

लाभांश : अगर किसी करदाता को कंपनी में लिए गए शेयरों के एवज में 10 लाख रुपए से अधिक का लाभांश मिला है तो उसे टैक्स देना होगा। आमतौर पर डीडीटी की अदायगी के बाद ही लाभांश देती हैं, इसलिए पिछले साल तक इसमें कोई टैक्स नहीं देना पड़ रहा था।

 

नए नियम मुश्किल पैदा कर रहे हैं

आयकर विशेषज्ञ राजेश जैन का कहना है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के नियमों में लगातार बदलाव हो रहे हैं। इस बार कई जानकारियां पहली बार देनी पड़ रही हैं इसके कारण करदाता कन्फयूज हैं।  आयकरदाता को इसकी कम ही जानकारी है, लेकिन कई नए नियम बीच-बीच में आते जा रहे हैं। इससे भी मुश्किलें आ रही हैं। 

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