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हवाई सफर में भी मिलेगी मोबाइल कॉल और इंटरनेट की सुविधा, प्रस्ताव को मिली मंजूरी

टेलीकॉम रेग्युलेटर अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने जनवरी में सरकार से अपने प्रस्ताव में इन सेवाओं के लिए सिफारिश की थी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - May 01, 2018, 04:46 PM IST

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    ट्राई ने यात्री विमानों में कॉलिंग और इंटरनेट सेवाएं देने का प्रस्ताव दिया था। -फाइल
    • मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं देने के लिए खास कैटेगरी बनाने और उसी नेटवर्क के जरिए सेवाएं देने का प्रस्ताव है।
    • टेलीकॉम विभाग ने पिछले साल अगस्त में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं देने के लिए ट्राई से सलाह मांगी थी।

    नई दिल्ली.टेलीकॉम कमीशन ने मंगलवार को हवाई सफर में मोबाइल कॉलिंग और इंटरनेट सेवाएं मुहैया कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके लिए टेलीकॉम रेग्युलेटर अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने सरकार से सिफारिश की थी। यानी अब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विमानों में सफर के दौरान यात्री मोबाइल पर बात करने के साथ इंटरनेट का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके अलावा टेलीकॉम सेक्टर की शिकायतों से निपटने के लिए एक लोकपाल की नियुक्ति भी होगी।

    हर तिमाही में 1 करोड़ शिकायतें मिलती हैं

    - न्यूज एजेंसी के मुताबिक, टेलीकॉम सचिव अरुणा सुंदरराजन ने बताया कि इस फैसले से टेलीकॉम सेक्टर में सुधार होंगे। मौजूदा वक्त में विभाग को हर तिमाही में टेलीकॉम सेक्टर से जुड़ी करीब 1 करोड़ शिकायतें मिलती हैं। इससे निपटने के लिए एक लोकपाल (ओमबड्समैन) बनाए जाने के प्रस्‍ताव को भी मंजूरी दी गई है। लोकपाल को ट्राई के तहत स्‍थापित किया जाएगा और इसके लिए ट्राई एक्‍ट में संशोधन की जरूरत होगी।

    ट्राई ने प्रस्ताव में क्या कहा था?

    - जनवरी में ट्राई ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि फ्लाइट में सैटेलाइट या टेरेस्ट्रीयल नेटवर्क से इंटरनेट और मोबाइल कम्यूनिकेशन ऑन बोर्ड (MCA) जैसी सर्विसेज इस्तेमाल करने की इजाजत दी जानी चाहिए।
    - प्रस्ताव के मुताबिक, मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं देने के लिए खास कैटेगरी बनेगी और उसी नेटवर्क के जरिए सेवा दी जाएगी। लेकिन ये भी शर्त है कि प्लेन की ऊंचाई कम से कम 3,000 मीटर या करीब 9 हजार फीट होनी चाहिए। मतलब प्लेन के उड़ान भरने के बाद एक खास ऊंचाई पर पहुंचने के बाद ही ये सर्विस मिलेगी।
    - यह भी कहा गया था कि वाई-फाई ऑनबोर्ड से इंटरनेट सर्विस देते वक्त इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस सिर्फ फ्लाइट या एयरप्लेन मोड में हों। साथ ही प्लेन के उड़ान भरने से ठीक पहले पैसेंजर्स को इस बारे में बताया जाए।

    लाइसेंस फीस सालाना 1 रुपए होगी

    - ट्राई के मुताबिक, हवाई सफर में मोबाइल और इंटरनेट देने के लिए अलग-अलग कैटेगरी बनाई जाएं। एक जो इंडियन सैटेलाइट सिस्टम का इस्तेमाल कर सेवाएं दे और दूसरी जो विदेशी सैटेलाइट्स का इस्तेमाल करे। ऐसे ऑपरेटर्स को टेलीकॉम डिपार्टमेंट के पास रजिस्टर्ड कराना होगा। इसमें भी शर्त यही है कि ऑपरेटर भारतीय होना चाहिए। इसकी लाइसेंस फीस सालाना 1 रुपए होगी।

    अमेरिका समेत कई देशों में पहले से सुविधा

    - टेलीकॉम विभाग ने पिछले साल 10 अगस्त को फ्लाइट में इंटरनेट और मोबाइल और वीडियो टेलीफोन सेवाएं देने के लिए ट्राई से सलाह मांगी थी।
    - भारतीय यात्री लंबे वक्त से इन सेवाओं को मंजूरी देने की मांग कर रहे थे। अमेरिका समेत कई देशों में यह सेवा पहले ही चालू है।

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    भारतीय एयरलाइंस में फिलहाल मोबाइल सेवाएं नहीं मिलती थीं। -फाइल
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