10 साल का ट्रेंड: आतंकी 1 कश्मीरी को मारता है तो सेना 5 आतंकी मार गिराती है / 10 साल का ट्रेंड: आतंकी 1 कश्मीरी को मारता है तो सेना 5 आतंकी मार गिराती है

आम नागरिकों तथा जवानों की मौत का आंकड़ा 18 साल में पहली बार 100 से नीचे आ गया।

DainikBhaskar.com

Jun 24, 2018, 09:20 AM IST
terrorism in kashmir in goverments reports
  • पिछले साल 57 कश्मीरी नागरिक मरे तो सेना ने 218 आतंकी मार गिराए
  • सबसे ज्यादा 5223 आम नागरिक 1994-98 में राव-देवगौड़ा-गुजराल के समय मरे

श्रीनगर. दो साल पहले घाटी में 14 आम नागरिक आतंकी हमलों में मारे गए तो सेना ने 165 आतंकियों को मार दिया। ऐसा 2010 में भी हुआ था। तब 36 आम लोगों के बदले 270 आतंकी ढेर कर दिए गए थे। वैसे हरेक आम नागरिक के बदले कई आतंकी मार गिराने का यह ट्रेंड इसी दशक (2009 से 2018 के बीच) नजर आया है। वरना इससे पहले के दशक में तो सेना एक आम नागरिक के बदले में औसतन दो आतंकी ही मार पा रही है। अगर एक और दशक पहले मसलन 1989 से 1998 की बात करें तो स्थिति चिंताजनक थी। तब मारे गए आम नागरिकों और आतंकियों की संख्या तकरीबन एक-सी रहती थी। दरअसल इन तीन दशकों में आतंकियों के खिलाफ सेना की मुहिम में और भी कई ट्रेंड नजर आ रहे हैं। पहले दो दशकों में सेना के ज्यादा जवान शहीद होते रहे। इस दशक में 4 से 6 गुना कमी आई।

हालांकि ‘इस कमी’ और ‘पांच गुना आतंकी मारने’ का केंद्र की भाजपा सरकार से खास लेना-देना नहीं है। यह ट्रेंड तो मनमोहन सिंह के पहले कार्यकाल के अंत (2008) से ही दिखाई देने लगा था।

असल में इस दौरान सीमापार से घुसपैठ तथा घाटी में आतंकी वारदातों में ही कमी आ गई। यही वजह रही कि आम नागरिकों और जवानों की मौत का आंकड़ा 18 साल में पहली बार 100 से नीचे आ गया। साथ ही मारे गए अातंकियों की संख्या भी 17 साल बाद घटकर 400 से कम हो गई। वैसे अब एक बार फिर आतंकियों के खिलाफ अभियान में तेजी है। चार दिन में सात आतंकी मार दिए गए हैं। ऐसे में आतंकियों के मारे जाने की दर और बढ़ने की उम्मीद है।

तीन दशक, तीन ट्रेंड: लगातार घटे हमले और जनहानि

1989से 1998: ज्यादा वारदातें हुईं और ज्यादा सैनिक शहीद

मारे गए नागरिकों की संख्या 8640
आतंकी मार गिराए 9403
शहीद हुए जवानों की संख्या 2326

1999 से 2008: आतंकी वारदातों में डेढ़ गुना कमी

मारे गए नागरिकों की संख्या 5842
आतंकी मार गिराए 12526
शहीद हुए जवानों की संख्या 3512


2009 से 2018: 27 गुना तक घट गईं आतंकी घटनाएं

मारे गए नागरिकों की संख्या 312
आतंकी मार गिराए 1518
शहीद हुए जवानों की संख्या 558

एक साल में सबसे ज्यादा आतंकी अटल के समय मारे

अटल के 6 साल: 10147 आतंकी मारे एनडीए सरकार का नेतृत्व कर रहे अटल बिहारी वाजपेयी का कार्यकाल मार्च 1998 से मई 2004 तक रहा। 1998 से 2003 तक की समयावधि में देखें तो मारे गए आम नागरिकों की संख्या 5082 रही। वहीं सुरक्षा बल के 2929 जवान शहीद हुए। मगर 10147 आतंकी मार दिए गए।

मनमोहन के 10 साल: 4241 आतंकी मारे यूपीए सरकार यानी मनमोहन का प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल मई 2004 से मई 2014 तक रहा। 2004 से 2013 तक देखें तो 1788 आम लोग, 1177 जवान तथा 4241 आतंकी मारे गए हैं। हालांकि इनके पहले कार्यकाल में 3424 आतंकी सेना ने मार गिराए।

मोदी के 4.5 साल: 701 आतंकी मारे भाजपा के पूर्णबहुमत के साथ नरेंद्र मोदी मई 2014 से प्रधानमंत्री है। इस बीच 17 जून 2018 तक 161 आम नागरिक आतंकी घटनाओं का शिकार बने। सुरक्षा बल के 303 जवान भी शहीद हो गए। मगर सेना ने 701 आतंकियों को मार गिराने में सफलता हासिल की


राजनीतिक अस्थिरता में सर्वाधिक जनहानि सबसे ज्यादा

1996 में 1333 आम लोग आतंकी घटनाओं में मारे गए। यह राजनीतिक अस्थिरता का दौर था। इस साल शुरुआत में कांग्रेस के नरसिम्हा राव, भाजपा के अटल बिहारी तथा जनता दल के एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री रहे थे। 2001 में 2850 आतंकी मार दिए गए। तब केंद्र में वाजपेयी सरकार थी। 2000 में 638 जवान शहीद हुए। सबसे कम 2016 (मोदी सरकार के दौर) में 14 आम नागरिक आतंकी वारदातों का शिकार हुए। यानी सबसे कम। 1989 में एक भी आतंकी नहीं मारे गए। इसे भी देश में राजनीतिक अस्थिरता से अलग रखकर नहीं देखा जा सकता। इस साल शुरुआत में कांग्रेस के राजीव गांधी फिर जनता दल के वीपी सिंह प्रधानमंत्री थे। 1989 में 13 भारतीय जवान आतंकी घटनाओं में शहीद हुए।


भाजपा और पीडीपी गठबंधन टूटने से अब तक...
19 जून 2018: कश्मीर में भाजपा ने पीडीपी से गठबंधन तोड़ने का ऐलान किया। रमजान में आजमाए सीजफायर की नाकाम और घाटी में आतंकवाद बढ़ने को वजह बताया। राज्यपाल शासन की मांग की ताकि कमान अपने हाथों में रखकर केंद्र कश्मीर को सेना के हवाले कर सके। वैसे इसी दिन सेना को पुलवामा में जैशए-मोहम्मद के 3 आतंकी मारने में सफलता मिल गई। इनमें से एक जैश का ऑपरेशनल कमांडर भी था।
20 जून 2018: जम्मु-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू। राज्यपाल एनएन वोहरा ने 10 साल में चौथी बार राज्य की कमान संभाली। आंतरिक मामलों के जानकार छत्तीसगढ़ के एसीएस (गृह) बीवीआर सुब्रमण्यम को जम्मू-कश्मीर का मुख्य सचिव बनाया गया। चंदन तस्कर वीरप्पन का खात्मा करने वाली टीम का नेतृत्व कर चुके तमिलनाडु कैडर के पूर्व आईपीएस विजय कुमार को राज्यपाल का सलाहकार बनाया गया।
22 जून 2018: अनंतनाग में तड़के हुई मुठभेड़ में सेना ने इस्लामिक इस्टेट जम्मू एंड कश्मीर के सरगना दाऊद अहमद सौफी सहित चार आतंकियों को मार गिराया। पुलिस द्वारा घाटी में पहली बार आईएस के आतंकी मारे जाने की पुष्टि। संघर्षविराम खत्म होने के बाद कुल 7 आतंकी मार गिराए गए। इसी बीच त्राल में आतंकी हमले में 9 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए।

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