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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में 4 दिन से भारी बारिश, 45 गांवों का संपर्क टूटा; कल 16 राज्यों के लिए अलर्ट

3 वर्ष पहले
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- नेपाल में हिल्सा और सिमीकोट में श्रद्धालु फंसे हैं, यहां छोटे विमान और हेलिकॉप्टर के जरिए ही पहुंचा जा सकता है

- पिथौरागढ़ में ग्रामीण इलाकों की सड़कें और पुल भारी बारिश के चलते क्षतिग्रस्त हो गए हैं

 

नई दिल्ली/काठमांडू. 24 घंटों के दौरान पूर्वोत्तर और मध्य भारत के राज्यों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में पिछले 4 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते 45 गांवों और चीन की सीमा से सटी आखिरी भारतीय आउटपोस्ट का संपर्क टूट गया है।

मौसम विभाग ने शुक्रवार को 16 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ में मूसलाधार बारिश हो सकती है। इसके अलावा छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, गुजरात, मराठवाड़ा, तेलंगाना, तटीय और उत्तर कर्नाटक में भारी बारिश हो सकती है। तमिलनाडु, रायलसीमा, तटीय आंध्र प्रदेश और भीतरी कर्नाटक में गरज-चमक के साथ तूफान की आशंका जाहिर की गई है।

 

24 घंटे के दौरान चेरापूंजी में सबसे ज्यादा बारिश

शहर राज्य वर्षा (मिमी)
चेरापूंजी मेघालय 176
माथेरान महाराष्ट्र 165
महाबलेश्वर महाराष्ट्र 160
वलसाड गुजरात 158
जलपाईगुड़ी प. बंगाल 142
हरनाई महाराष्ट्र 138
सिलीगुड़ी प. बंगाल 135
अलीबाग महाराष्ट्र 95
अगरतला त्रिपुरा 88
दहानु महाराष्ट्र 84

* आंकड़े स्काइमेट वेदर डॉट कॉम के मुताबिक

 

पिथौरागढ़ में 25 हजार लोग प्रभावित: पिथौरागढ़ में भारी बारिश के चलते 3 लोग लापता हैं। दो पुल और ग्रामीण इलाकों में कई सड़कें टूट गई हैं। पिथौरागढ़ डीएम ने बताया कि ग्रामीण इलाकों की 17 सड़कों को नुकसान पहुंचा है। जिमीघाट और बोडयार में पुल टूटने से चीन की सीमा पर स्थित भारत की आखिरी आउटपोस्ट का संपर्क टूट गया है। हम तुरंत दोबारा पुल बनाने के काम में जुट गए हैं। 45 गांवों का संपर्क टूट गया है, जिसके चलते 25 हजार लोग प्रभावित हैं। हालांकि, खाद्य सामग्री की कोई कमी नहीं है। एयरफोर्स के चॉपर के जरिए भी राशन पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

 

नेपाल में श्रद्धालुओं के लिए हॉटलाइन, क्षेत्रीय भाषाएं बोलने वाला स्टाफ: खराब मौसम और बारिश के चलते नेपाल के पहाड़ी इलाकों में कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे 1000 श्रद्धालु फंसे हुए हैं। बुधवार को हिल्सा से 250 श्रद्धालुओं को निकाला गया था। गुरुवार को सिमीकोट से 143 यात्रियों को बाहर निकाला गया। बता दें कि इस साल हाई एल्टीट्यूड से होने वाली परेशानियों के चलते 8 श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है। नेपाल में भारतीय दूतावास ने श्रद्धालुओं को सलाह दी है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य जांच करवाएं और करीब एक महीने की अपनी जरूरी दवाएं साथ लेकर जाएं।

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