--Advertisement--

विमान के इंजनों में खराबी से जमीन पर आ गई थी किंगफिशर, विजय माल्या ने 2 साल पहले पीएम को पत्र लिखकर रोया था दुखड़ा

माल्या की खराब नीतियां किंगफिशर को ले डूबी।

Dainik Bhaskar

Jun 26, 2018, 07:41 PM IST
vijay-mallya-letters-to-prime-minister

नेशनल डेस्क, नई दिल्ली। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो साल पहले लिखे पत्र में अपनी एयरलाइन किंगफिशर के जमीन पर आने की कई वजह गिनाई थी। इसमें एक बड़ी वजह एयरलाइन के विमानाें के इंजनों में गड़बडी थी। इसके कारण एयरलाइन के आधे विमानों का संचालन बंद करना पड़ा था।

विजय माल्या ने प्रधानमंत्री को यह पत्र 15 अप्रैल 2016 को लिखा था जिसे उन्होंने मीडिया के लिए मंगलवार को जारी किया। इस खत में उन्होंने लिखा, एयरलाइन के विमानों में लगे v2500

इंजनों में टेक्नीकल गड़बड़ी के कारण हमारे आधे से अधिक विमानों का संचालन बंद करना पड़ा। ये हमारी कंपनी के लिए अप्रत्याशित झटका था। बता दें कि किंशफिशर के फ्लीट में कुल 34 विमान थे। माल्या ने इसके लिए इंजन बनाने वाली कंपनी से 2000 करोड़ रुपए का मुआवजा भी मांगा था जो नहीं मिला।

क्रूड ऑयल के दामों में बढ़ोतरी :

पत्र में उन्होंने यह भी लिखा, क्रूड ऑयल के दाम 60 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 145 डॉलर होने, एविएशन टरबाइन फ्यूल पर टैक्स 20 से 30 प्रतिशत होने और इंडियन करेंसी में 20 फीसदी की गिरावट से कंपनी को काफी नुकसान उठाना पड़ा।

क्या थी किंगफिशर के फेल होने की असली वजह?

माल्या की खराब नीतियां किंगफिशर को ले डूबी :


किंगफिशर एयरलाइन्स की शुरुआत मई 2005 में हुई थी। दिसंबर 2011 तक देश के डोमेस्टिक एयर ट्रेवल मार्केट में इसकी करीब 50 फीसदी हिस्सेदारी थी। हालांकि यह शुरू से ही घाटे में रही और अंतत: 2012 में कर्ज चढ़ने के कारण इसे बंद करना पड़ा। इसके बंद होने की ये 3 मुख्य वजह थी :


1. एयर डेक्कन का अधिग्रहण :
विजय माल्या ने केवल कंपनी के विस्तार के नाम पर एयर डेक्कन का अधिग्रहण किया। इस मर्जर से प्रॉफिट बढ़ाने के लिए उनके पास कोई प्लान नहीं था। यहां तक कि एयर डेक्कन के फाउंडर जी.आर. गोपीनाथ को अपने साथ जोड़कर नहीं रखा जो इस फील्ड के एक्सपर्ट थे।

2. इंटरनेशनल रूट्स :
किंगफिशर डोमेस्टिक मार्केट में 50 फीसदी हिस्सेदारी के बावजूद लगातार घाटे में चल रही थी। इस घाटे की पूर्ति के लिए उन्होंने ग्राउंड रिएलिटी को जाने बगैर इंटरनेशनल रूट्स पर किंगफिशर को उतार दिया। वहां पहले ही ज्यादा कॉम्पीटिशन होने के कारण कंपनी और भी घाटे में चली गई।

3.अस्थाई मैनेजमेंट :
किंगफिशर का कोई भी सीईओ एक साल भी कंपनी में नहीं टिका। टॉप मैनेजमेंट में लगातार बदलाव होते रहे। विजय माल्या ने इसे अपने बेटे सिद्धार्थ को जन्मदिन के गिफ्ट के रूप में दिया था। इसलिए न विजय और न ही सिद्धार्थ इसको लेकर कभी सीरियस रहे। उनकी दिलचस्पी किंगफिशर कैलेंडर्स में ज्यादा रही।

प्रधानमंत्री को लिखे खत में माल्या ने ये 7 बातें भी लिखी :

1. मुझ पर मीडिया और नेताओं ने इस तरह इल्जाम लगाया, जैसे मैं नौ हजार करोड़ चुराकर भाग गया, जबकि ये कर्ज किंगफिशर एयरलाइंस को दिया गया था।

2. कर्ज देने वाले कुछ बैंकों ने मुझ पर विलफुल डिफॉल्टर जैसा तमगा लगा दिया। मैं जनता के गुस्से की ज्वलंत वजह बन गया।

3. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्डरिंग एक्ट के तहत मेरी और मेरे परिवार की संपत्ति अटैच कर दी, जिनका मूल्य करीब 13,900 करोड़ रुपए है।

4. मैं बैंकों का बकाया वापस करने की पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन मुझे बैंकों को चूना लगानेवालों के 'पोस्टर बॉय' के तौर पर पेश किया जा रहा है।

5. मैं सम्मानपूर्वक कहता हूं कि मैंने सरकारी बैंकों की बकाया राशि वापस करने के पूरे प्रयास किए हैं। अगर राजनीति से प्रेरित कोई फैक्टर इसमें शामिल होता है तो मैं कुछ भी नहीं कह सकता।

6. मैंने वन टाइम सेटलमेंट के लिए एसबीआई को 4,400 करोड़ रुपए चुकाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन बैंक ने उसे नामंजूर कर दिया।

7. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने उनकी एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की पर्सनल असैट को भी अटैच कर लिया।

2016 में भारत से भागा था माल्या : 31 जनवरी 2014 तक किंगफिशर एयरलाइंस पर बैंकों का 6,963 करोड़ रुपए बकाया था। इस कर्ज पर ब्याज के बाद माल्या की कुल देनदारी 9000 करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुकी है। माल्या 2016 में भारत से भाग गया था। तब उसने यह कहा था कि वह अपने बच्चों के पास जा रहा है। हालांकि, बाद में उसने भारत लौटने से इनकार कर दिया। भारत सरकार की ओर से जारी वारंट पर कार्रवाई करते हुए माल्या को पिछले साल 18 अप्रैल को लंदन में गिरफ्तार किया गया था। उसे तुरंत जमानत मिल गई थी।

X
vijay-mallya-letters-to-prime-minister
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..