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क्या होता है 'हॉर्स ट्रेडिंग' का मतलब, क्यों राजनीति में हैं इसके बहुत खास मायने

कर्नाटक में फिर शुरू हो गई 'हॉर्स ट्रेडिंग' ....

dainikbhaskar.com | Last Modified - May 18, 2018, 07:25 PM IST

क्या होता है 'हॉर्स ट्रेडिंग' का मतलब, क्यों राजनीति में हैं इसके बहुत खास मायने

न्यूज डेस्क। कर्नाटक में भाजपा को कल बहुमत साबित करना है। भाजपा ने दावा किया है कि, वे बहुमत साबित करेंगे। अभी भाजपा के पास कुल 104 विधायक हैं। बहुमत के लिए 112 विधायकों का समर्थन चाहिए। कांग्रेस ने अपने विधायको को भाजपा से बचाने के लिए हैदराबाद के एक रिसॉर्ट में छुपाकर रखा है। वहीं भाजपा नेता विधायकों का समर्थन जुटाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच एक बार फिर 'हॉर्स ट्रेडिंग' शब्द चर्चा में आ गया है। हम बता रहे हैं ये शब्द आया कहां से और क्या होते हैं इसके मायने?

# सौदेबाजी के सेंस में होता है यूज...

- इंडिया में 'हॉर्स ट्रेडिंग' वर्ड का नॉर्मल यूज पॉलिटिक्स में किया जाता है। जब कोई सरकार फेल हो जाती है तो हॉर्स ट्रेडिंग शुरू हो जाती है। यह तब तक चलती है जब तक नई सरकार का गठन न हो जाए।

- हॉर्स ट्रेडिंग का मतलब हार्ड बार्गिनिंग (सौदेबाजी) से होता है। इसमें सौदेबाजी करने वाली दो पार्टियां अपने हितों को ध्यान में रखते हुए चतुराई से निर्णय करती हैं।

- ब्रिटिश इंग्लिश में यह टर्म नार्मली डिसअप्रूवल (अस्वीकृति) को बताती है।

# कैंब्रिज डिक्शनरी में क्या है मतलब

- कैंब्रिज डिक्शनरी में इसका मतलब, ऐसी अनौपचारिक बातचीत से है, जिसमें दो पार्टियां ऐसी आपसी संधि करती हैं जिसमें दोनों का फायदा हो।

- पॉलिटिक्स में जब कोई पार्टी विपक्षी सदस्यों को लालच देकर अपने साथ मिलाने की कोशिश करती है तो इस खरीद फरोख्त की पॉलिटिक्स को हॉर्स ट्रेडिंग कहा जाता है।

# क्या है इस शब्द का इतिहास


- 'हॉर्स ट्रेडिंग' टर्म 1820 में सामने आया। हॉर्स ट्रेडिंग का मतलब घोड़ों की बिक्री से है। Macmillan इंग्लिश डिक्शनरी के मुताबिक, इसका मतलब कठिन और कभी-कभी उन लोगों के बीच बेईमान चर्चा है, जो किसी एक एग्रीमेंट पर पहुंचना चाह रहे हैं।

- कुछ जगह यह भी पता चलता है कि, 18वीं शताब्दी में इस शब्द का इस्तेमाल घोड़ों की बिक्री के दौरान किया जाने लगा। उस समय व्यापारी जब घोड़ों की खरीद-फरोक्त करते थे और कुछ अच्छा पाने के लिए जो जुगाड़ जमाते थे या चालाकी के लिए जो तकनीक अपनाते थे। इसे ही हॉर्स ट्रेडिंग कहा जाने लगा।

- 20वीं और 21वीं सदी में इसका इस्तेमाल राजनीति तक पहुंचा। ऐसा बताया जाता है कि उस दौरान व्यापारी अपने घोड़ों को छुपा देते थे। फिर पैसों के लेनदेन की दम पर सौदा किया जाता था।

# एक किस्सा ये भी...

- एक किस्सा ये भी है कि पुराने समय में व्यापारी अपने कारिंदों को घोड़े खरीदने के लिए अरब देशों में भेजा करते थे। इतनी दूर से वापस आते वक्त कुछ घोड़े मर भी जाते थे।

- कारिंदे मालिक को संतुष्ट करने के लिए मरे हुए घोड़ों की पूंछ दिखाया करते थे। बाद में कारिंदों ने बेईमानी शुरू कर दी।

- उन्होंने मालिक से 100 घोड़ों के ही पैसे लिए। 90 घोड़े खरीदे और 10 घोड़ों की पूंछ के बाल खरीद लिए। मालिक को पूंछ दिखाकर संतुष्ट कर दिया और 10 घोड़ों से मिले पैसों का फायदा उठा लिया। हालांकि इस किस्से का कोई प्रमाण नहीं है।

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Web Title: kyaa hotaa hai hors tredinga ka mtlb, kyon raajniti mein hain iske bahut khaas maayne
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