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कंपनी नहीं दे रही सैलरी, पीएफ तो इन तरीकों से अपना पैसा ले सकते हैं आप

कई कंपनी ऐसी होती हैं, जो इम्प्लॉई को रिक्रूट तो कर लेती हैं लेकिन उन्हें समय पर पेमेंट नहीं देतीं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - May 01, 2018, 01:43 PM IST

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    न्यूज डेस्क।कई कंपनी ऐसी होती हैं, जो इम्प्लॉई को रिक्रूट तो कर लेती हैं लेकिन उन्हें समय पर पेमेंट नहीं देतीं। कुछ पीएफ डिडक्ट नहीं करतीं। जबकि कानून के मुताबिक एक तय टाइम लिमिट में सैलरी से लेकर पीएफ देना तक जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर आप संबंधित कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।

    सैलरी न मिले तो क्या करें

    > सबसे पहले ऐसे लॉयर जो इस तरह के मामले देखता हो, उनके जरिए इम्प्लॉयर को लीगल नोटिस भेज सकते हैं।


    > फिर भी कंपनी सैलरी नहीं दे रही तो पुलिस में इसकी शिकायत कर सकते हैं। हालांकि ऐसे अधिकांश मामलों में पुलिस की तरफ से पुख्ता कार्रवाई नहीं हो पाती।

    > ऐसा होन पर आप लेबर कमिशनर को इसकी शिकायत कर सकते हैं।


    > यदि कमिशनर ऑफिस से भी आपकी समस्या का समाधान नहीं होता तो आप कोर्ट जा सकते हैं। कोर्ट में आप इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट, 1947 के सेक्शन 33 (C) के तहत केस कर सकते हैं।

    कैसे क्लेम कर सकते हैं

    > यदि इम्प्लॉयर की तरफ से सैलरी रोकी गई है तो इम्प्लॉई खुद या अथॉराइज्ड पर्सन के जरिए मनी के लिए क्लेम कर सकता है।


    > यदि इम्प्लॉई की डेथ हो जाती है तो उसके लीगल वारिस लेबर कोर्ट में जा सकते हैं।


    > यदि कोर्ट संतुष्ट होता है तो कंपनी को तय अमाउंट देने के लिए निर्देशित कर सकता है।

    इम्प्लॉई कम्पनसेशन एक्ट होता है लागू, देखिए अगली स्लाइड्स में...

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    इम्प्लॉई कम्पनसेशन एक्ट होता है लागू

     

    >हाईकोर्ट एडवोकेट संजय मेहरा ने बताया कि, इम्प्लॉई कम्पनसेशन एक्ट के तहत अब मजदूर से लेकर क्लर्क तक आते हैं। यदि कंपनी बिना किसी कारण से छंटनी करती है तो इम्प्लॉई लेबर कोर्ट में शिकायत कर सकते हैं। 

     

    >ग्रेजुएटी नहीं मिल रही तो एडिशनल लेबर कमिशनर के ऑफिस में इसकी शिकायत कर सकते हैं। वहीं दिया पीएफ रोका जा रहा है तो पीएफ कमिशनर को इसकी शिकायत करना होगी। 

     

    >यदि किसी इम्प्लॉई का पद क्लर्क से ज्यादा लेवल का है तो वो सिविल कोर्ट और हाईकोर्ट में केस कर सकता है। 

     

    कितनी होती है सजा, देखिए अगली स्लाइड में...

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    कितनी होती है सजा

     

    >यदि कोई इम्प्लॉयर फ्रॉड करता है तो उसके खिलाफ कंपनीज एक्ट, 2013 के सेक्शन 447 के तहत केस दर्ज हो सकता है।


    > एम्प्लॉयर को 6 माह से लेकर 10 साल तक की जेल हो सकती है। इम्प्लॉई इंडियन पैनल कोड के तहत एम्प्लॉयर के अगेंस्ट 

    क्रिमिनल केस भी दर्ज करवा सकते हैं। 

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