Hindi News »National »Latest News »National» World Bank Says Over 40K Cases Filed Since RTE Came Into Force In India

आरटीई के तहत 8 साल में 40 हजार केस दर्ज, गरीब बच्चों के लिए स्कूलों में आरक्षण के सबसे ज्यादा मामले

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, दर्ज मामलों में अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे केस हैं जिनमें न्याय मिलना बाकी है।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 10, 2018, 06:02 PM IST

  • आरटीई के तहत 8 साल में 40 हजार केस दर्ज, गरीब बच्चों के लिए स्कूलों में आरक्षण के सबसे ज्यादा मामले, national news in hindi, national news
    +1और स्लाइड देखें
    आरटीई अधिनियम का उद्देश्य सभी को नि:शुल्‍क और अनिवार्य शिक्षा मिलना है। -फाइल

    • आरटीई अधिनियम 1 अप्रैल, 2010 को लागू हुआ
    • अब तक 41,343 केस दर्ज हुए, इनमें 2,477 सुप्रीम कोर्ट में है

    नई दिल्ली. भारत में शिक्षा के अधिकार के तहत 2010 से अब तक 40 हजार केस से ज्यादा केस दर्ज हो चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले निजी स्कूलों में गरीबों को 25 फीसदी आरक्षण को लेकर हैं। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे केस हैं, जिनमें न्याय मिलना बाकी है।

    आरटीई पर क्या कहती है वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट

    1) दर्ज मामलों में 2,477 सुप्रीम कोर्ट के पास
    - वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, 8 साल में अब तक 41,343 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें से 2,477 केसों में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी चल रही है।
    - सामाजिक न्याय के लिए लड़ने वाले कार्यकर्ताओं ने अब तक 500 से ज्यादा केस गरीब बच्चों को आरटीई के तहत अधिकार दिलाने के लिए दर्ज किए हैं।
    - रिपोर्ट के मुताबिक, अन्य केस निजी स्कूलों में शिक्षक की पात्रता, मानदंड और मान्यताओं के नियमों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं।

    2) शिकायतों का निपटारा करने वाले कमीशन में सदस्यों की कमी
    - शिक्षा का अधिकार शिकायतों के निपटारे के लिए बच्चों के अधिकार के लिए बने नेशनल और स्टेट कमीशन पर निर्भर करता है, लेकिन इनमें सदस्यों की कमी है।
    - रिपोर्ट के मुताबिक, इस अधिकार के तहत कोर्ट तक मामलों के पहुंचने के लिए नियमों में छूट की वजह से दर्ज केसों की संख्या में इजाफा हुआ है।

    3) नियम सही तरीके से लागू होने में दिक्कतें
    - वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में आरटीई के सही तरह से लागू होने को प्रभावित करने वाले कारकों का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया कि जरूरी नहीं है कि निजी स्कूलों में 25 फीसदी कोटा लागू करने से ही गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल जाए। ये भी बताया गया कि आरक्षण के मामले में केस दर्ज कराने वाले ज्यादातर लोग ऐसे गरीब हैं, जो शिक्षित हैं और केस का शुरुआती खर्च उठाने में सक्षम हैं।

    4) स्कूलों की ट्यूशन फीस के चलते खाली रहती हैं सीटें
    - "राज्य सरकार से मिलने वाली सब्सिडी के बाद भी कई कोटा सीटें खाली रह जाती हैं। इसका कारण स्कूलों की ट्यूशन फीस है। इस अधिकार में यह तय नहीं किया गया है कि फीस के अलावा ड्रेस, किताबों और अन्य भुगतान कौन करेगा।"

    1 अप्रैल, 2010 को लागू हुआ था आरटीई
    - आरटीई अधिनियम 1 अप्रैल, 2010 को लागू हुआ था। आरटीई अधिनियम का उद्देश्य सभी को ''निःशुल्‍क और अनिवार्य'' शिक्षा मिलना है। हर बच्चे को अपनी शिक्षा जारी रखने और उसे पूरा करने का अधिकार है। इस अधिनियम में निजी स्कूलों में 25 फीसदी गरीब बच्चों को कोटा के तहत प्रवेश देने का भी प्रावधान है।

  • आरटीई के तहत 8 साल में 40 हजार केस दर्ज, गरीब बच्चों के लिए स्कूलों में आरक्षण के सबसे ज्यादा मामले, national news in hindi, national news
    +1और स्लाइड देखें
    इस अधिकार में यह तय नहीं किया गया है कि फीस के अलावा ड्रेस, किताबों और अन्य भुगतान कौन करेगा। -फाइल
Topics:
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From National

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×