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मप्र / 40 साल की उद्यमी तीन साल कैंसर से लड़ी; घर से फैक्टरी संभाली, टर्नओवर 10 करोड़ सालाना



जासमीन लूला। जासमीन लूला।
40-year-old entrepreneur fought cancer for three years, took over the factory from home, Jasmin Lula of Indore
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जासमीन लूला।जासमीन लूला।
40-year-old entrepreneur fought cancer for three years, took over the factory from home, Jasmin Lula of Indore

  • इंदौर की जासमीन लूला ने 6 साल पहले दो कर्मचारियों के साथ केक बनाने का काम शुरू किया था
  • फैक्टरी में काम करने वालों के परिवार का ख्याल आया तो जासमीन ने सोचा हारेंगी नहीं, बीमारी से लड़ेंगी

Dainik Bhaskar

Oct 10, 2019, 11:29 AM IST

इंदौर(प्रणय चौहान).  इंदौर की 40 साल की उद्यमी जासमीन लूला की केक फैक्टरी का सालाना टर्नओवर करीब 10 करोड़ है। छह साल पहले दो लोगों को साथ लेकर इन्होंने केक बनाने की फैक्टरी शुरू की थी। सब कुछ सही चल रहा था, तभी जासमीन को पता चला कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है। डॉक्टरों ने बताया कि ये शुरुआती स्टेज है। जल्द इलाज शुरू कर देना चाहिए। बकौल जासमीन, 'कैंसर के बाद मैं पूरी तरह टूट चुकी थी। ऐसा लगा कि जिंदगी खत्म हो गई है, लेकिन परिवार ने मुझे हौसला दिया। सबसे ज्यादा इस जंग से लड़ने का जज्बा मेरी उस छोटी सी फैक्टरी ने दिया, जहां मेरे अलावा दो और लोग थे। 


मेरे और उनके परिवार का ख्याल आते ही मैंने कैंसर से लड़ते हुए अपने केक बनाने का सफर भी जारी रखा। तीन साल बाद डॉक्टरों ने बताया कि मैं इस पीड़ा से बाहर निकल गई हूं। जब तक मेरी बीमारी दूर होती मेरी छोटी सी फैक्टरी ने एक कंपनी का रूप ले लिया था। आज मेरा केक ऑनलाइन ब्रांड बन चुका है। शुरुआत में तीन से चार तरह के केक बनाते थे, लेकिन अब 250 से ज्यादा किस्म के केक का निर्माण कर रही हूं। दो साथियों से शुरू हुआ सफर आज 100 को पार चुका है।

 

ऑस्ट्रेलियन स्कूल ऑफ पतेश्री से ऑनलाइन बेकरी कोर्स 
मैंने बच्चों को बीमारी का एहसास नहीं होने दिया। पहली कीमोथैरेपी लेने के बाद मैं बहुत निराश हो गई। दूसरी कीमोथैरेपी के बाद मुझे चिकन पॉक्स हो गया। तब मुझे लगा कि अब मैं नहीं बच पाऊंगी, तब पति और दोस्तों ने हौसला दिया। डॉक्टर ने मुझे कमरे से बाहर निकलने से इनकार कर दिया। मैंने घर पर ही बैठकर ऑस्ट्रेलियन स्कूल ऑफ पतेश्री से ऑनलाइन बेकरी कोर्स किया। घर में ही कैमरे लगवा लिए और वहीं से फैक्टरी का संचालन करने लगी। 

 

तीसरी कीमोथैरेपी के बाद मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और थैरेपी लेने के अगले ही दिन फैक्टरी आने लगी। इस दौरान मैंने छह कीमोथैरेपी ली और 31 रेडिएशन थैरेपी कराई। कैंसर की बीमारी का इलाज बहुत ही दर्दनाक होता है। इसलिए मेरा दूसरे मरीजों से कहना है कि परिवार का सोचकर इलाज पूरा जरूर कराएं, क्योंकि दर्द के कारण मरीज इलाज बीच में ही छोड़ देते हैं।


सीख... मरीज अकेले न रहें, योग करें
इस बीमारी में मरीज को अकेले नहीं रहना चाहिए। योग करें, व्यायाम करें, गेम्स खेलें। खुद से और परिवार से प्यार करना सीखें, क्योंकि खुद से प्यार करने वाला ही इस बीमारी को हरा सकता है। अब मैं कैंसर फाउंडेशन से जुड़ चुकी हूं और दूसरे पीड़ितों को बीमारी से लड़ने का हौसला देती हूं।

 

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