रिसर्च / झारखंड की खगोल वैज्ञानिक मैत्रेई ने खोजा छोटे तारे में पानी, दूसरे ग्रह पर जीवन की तलाश आगे बढ़ी



Astronomer Maitreyee bose of Jharkhand discovered water in small stars
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Astronomer Maitreyee bose of Jharkhand discovered water in small stars

  • नासा के मार्गदर्शन में किया रिसर्च, क्षुद्र ग्रह पर पानी की खाेज काे वैज्ञानिक मान रहे बड़ी उपलब्धि
  • मैत्रेई बोस का जन्म सोनारी में हुआ, अभी एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर हैं
  • पानी के बाद अमोनिया एसिड की खोज होगी, यह दोनों मिले तो जीवन की संभावनाएं बढ़ेगी

Dainik Bhaskar

Aug 08, 2019, 09:02 AM IST

जमशेदपुर (चंद्रशेखर सिंह). खगोल वैज्ञानिक वर्षों से दूसरे ग्रहों पर जीवन की खोज में जुटे हैं। इसके लिए अंतरिक्ष में ग्रहों की स्थिति पर शोध कर रहे हैं। किसी भी ग्रह पर जीवन होने का मूल प्रमाण पानी की उपलब्धता पर निर्भर करता है। इस रहस्य से पर्दा सोनारी की खगोल वैज्ञानिक मैत्रेई बोस ने उठाया है।

 

उन्हाेंने नासा के सहयोग से अंतरिक्ष के क्षुद्र ग्रह इटोकावा के कणों में पानी हाेने की खाेज की है। अंतरिक्ष से लाए गए क्षुद्र ग्रह के कणों पर रिसर्च के दौरान उन्हें उसमें पानी हाेने का पता चला। अमेरिका की एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्राेफेसर मैत्रेई ने यह रिसर्च अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के दिशा-निर्देशन में किया। क्षुद्र ग्रह पर पानी की उपलब्धता काे नासा के वैज्ञानिक अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

 

नैनो सिम्स इंस्ट्रूमेंट से खोजे माइक्रो वॉटरवेपर

मैत्रेई ने लैब में नैनो सिम्स इंस्ट्रूमेंट के जरिए मानव शरीर के बाल से भी दस गुना छोटे कणों पर रिसर्च कर पानी के अंश को निकाला। रिसर्च पूरा हाेने के बाद मैत्रेई इन दिनों सोनारी स्थित अपने आवास में आई हैं। उन्होंने बताया कि यह खोज अंतरिक्ष विज्ञान के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इससे दूसरे ग्रहों में जीवन के रहस्यों से तो पर्दा उठेगा ही, पृथ्वी पर पानी कैसे आया इसके बारे में भी पता चल सकेगा।

 

शोध की सफलता से हूं खुश, भारत का नाम हाेगा राेशन : मैत्रेई

ग्रहों के पार्टिकल पर पानी मिलना एक अद्भुत घटना है। इससे पहले यह केवल रिसर्च तक सीमित था। नए शोध से इसकी संभावना बढ़ गई है कि दूसरे ग्रह पर भी जीवन हो सकता है। हालांकि, यूएसए और जापान सिरिसरेक्स और हायाबुआ टू मिशन से क्षुद्र ग्रह के कुछ अवशेष अक्टूबर में आने पर और शोध किए जाएंगे। इसके बाद वहां पानी और अमोनिया एसिड की उपलब्धता पर शोध हाेगा। शाेध में यदि दोनाें तत्व पाए जाते हैं, तो वहां जीवन की संभावना साबित हो जाएगी। शोध की सफलता से वे काफी खुश हैं। नए शोध करने की याेजना है, जिससे भारत का नाम राेशन होगा।

 

सोनारी में जन्मीं, सेक्रेट हार्ट कान्वेंट स्कूल से की पढ़ाई
मैत्रेई सोनारी बी रोड निवासी पूर्णेंदु घोष और शुक्ला घोष की बेटी हैं। पिता पू्र्णेंदु घोष टाटा स्टील के सेंटर फॉर एक्सीलेंस में कार्यरत थे। मैत्रेई ने वर्ष 1996 में सेक्रेड हार्ट कान्वेंट स्कूल से दसवीं की पास की। पुणे के फरगोशन कॉलेज में बीएससी तक पढ़ाग् की। इसके बाद अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई करने अमेरिका चली गईं। वहां वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। अभी एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर हैं।

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