बिहार / नवादा का मोतीविगहा अकेला गांव जहां 300 ट्रक चालक, 200 के पास अपने वाहन



Bihar,  Nawada,  Motivigha village where 300 truck drivers
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Bihar,  Nawada,  Motivigha village where 300 truck drivers

  • पहले ठेला-रिक्शा चलाकर गुजारा करते थे, अब गांव में 40 ट्रक, 50 मिनी ट्रक और 110 ऑटो
  • ग्रामीणों को गरीबी से निकालने में मददगार बना ड्राइवरी का पेशा, 50 साल में बदले गांव के हालात

Dainik Bhaskar

Sep 17, 2019, 11:11 AM IST

नवादा(अशोक प्रियदर्शी). रिक्शा, ठेला और मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले लोगों का गांव मोतीविगहा आज चालकों (ड्राइवर्स‌‌) का गांव है। यहां करीब 300 ड्राइवर हैं। इतना ही नहीं गांव में करीब 200 छोटे-बड़े वाहन हैं। इसमें 40 ट्रक, 50 मालवाहक वाहन के अलावा 110 ऑटो समेत कई तरह की गाड़ियां हैं।

 

चालकों के गांव बनने की शुरुआत पांच दशक पहले हुई थी। जिले के सदर प्रखंड की गोनावां पंचायत के गोनावांडीह के मथुरा सिंह ट्रक ड्राइवर थे। तभी गोनावां के मोतीविगहा निवासी कपिल यादव उनके साथ घूमने के बहाने निकले थे। कई माह तक ट्रक क्लीनर का काम किया। फिर गाड़ी चलाना सीखा। कपिल की माली हालत सुधरी तो गांव में ड्राइवर बनने का सिलसिला शुरू हो गया। अब क्लीनर बनने का दौर खत्म हो गया है। पूरे गांव में मुश्किल से दो तीन ट्रक क्लीनर हैं।

पेशे में चुनौतियां हैं पर गर्व भी

  1. ग्रामीण बताते हैं कि सड़क हादसे और अपराध की घटनाओं के कारण ड्राइवर बनने के प्रति लोगों में दिलचस्पी कम हुई है। पिछले तीन दशक में गांव के तीन चालकों की सफर के दौरान हत्या कर दी गई, जबकि चार की दुर्घटना में मौत हो गई है। इन घटनाओं से लोग थोड़ा सहम गए हैं। ग्रामीण गुलाब यादव बताते हैं कि ड्राइवरों के मान सम्मान में थोड़ी कमी आई है।

  2. गांव में नौसिखुओं की होड़ हो गई है। पैसे कम मिलते हैं। इसलिए दूर दराज के बजाय लोग स्थानीय स्तर पर कम पैसे में लोग काम करने पर मजबूर हैं। गुलाब कहते हैं कि चुनौतियां जरूर हैं लेकिन इस पेशे पर आज भी गर्व है क्योंकि इस पेशे ने गांव वालों को नया जीवन दिया है।

  3. तीन पीढ़ियों का पेशा, परिवार में 11 ड्राइवर

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    गांव में तीन पीढ़ियों से यह परंपरा चली आ रही है। यमुना यादव रिक्शा चलाते थे। चार बेटे थे। चारों बेटे कपिल, विजय, लालो और हीरा यादव ड्राइवर बन गए। कपिल के तीन बेटे भी इसी पेशे में हैं। दो ट्रक भी हैं। यही नहीं, विजय यादव के तीन में से दो और लालो के दो बेटों ने भी ड्राइवरी की। इस तरह एक परिवार के 11 लोग इस पेशे में रहे हैं। हालांकि हीरा के दो बेटे हैं। दोनों पढ़ाई कर रहे हैं।

     

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