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मुहिम / कृषि वैज्ञानिकों की अपील- आम खाएं पर गुठलियां नहीं फेकें, इन्हें घर से हम ले जाएंगे



प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर कृषि कॉलेज एवं अनुसंधान केंद्र ने आमों के पेड़ों को बचाने के लिए यह पहल शुरू की 
  • वैज्ञानिक गुठलियां जमा करने के लिए कंटेनर ठेले, गुमटियां और दुकानों के पास रखेंगे

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2019, 12:08 PM IST

बिलासपुर (छत्तीसगढ़). बिलासपुर में ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर कृषि कॉलेज एवं अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने आम के घटते पेड़ों पर चिंता जताते हुए एक अनूठी मुहिम शुरू की है। उन्होंने शहरभर के लोगों से कहा है कि वे आम खाएं पर गुठलियां फेकें नहीं। इसे वे सहेजकर रख लें। वैज्ञानिक उनके घर आएंगे या कंटेनर भिजवाएंगे। ताकि हम इन्हें एकत्रित कर सकें और इन गुठलियों से आम के पौधे तैयार करवा सकें।

 

कृषि विज्ञान केंद्र के डीन आर तिवारी के मुताबिक, "14 जून से यह स्कीम शुरू हो जाएगी। नगर निगम से कंटेनर मंगवाए हैं और खरीदे भी हैं। इसे ही शहर में ठेले, गुमटियां और दुकानों के पास रखेंगे।" कृषि कॉलेज ने अपील की है कि लोग आम खाकर गुठलियां इकट्‌ठी करने के लिए 98271-60450 और 07752-354379 हेल्पलाइन की मदद ले सकते हैं।

 

 

बूढ़े पेड़ों को बनाया जवान

 

  • कृषि विज्ञान केंद्र ने बूढ़े पेड़ों को जवान बनाने के लिए नया प्रयोग किया है। आम के पेड़ों को क्रॉफ्ट कर इनमें बोडोपेस्ट किया गया। इससे करीब डेढ़ सौ बूढ़े पेड़ों पर पौधों हरियाली छा गई है। नए तने, पत्ते और आने वाले दिनों में इन पर फिर से फल नजर आ रहे हैं। 
  • इन पेड़ों की उम्र 40 से 50 साल है। वैज्ञानिकों का दावा है कि नए जीवन में आम के ये पेड़ पहले से ज्यादा फल देंगे। पुनर्जीवित करने कटाई कर केमिकल का लेप लगाया गया है। इनमें लंगड़ा, बादामी, चौसा, दशहरी, तोतापरी और सुंदरजा आम की प्रजातियों पर यह प्रयोग किया गया। 
     
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