वैलेंटाइन डे / पत्नी की याद में मंदिर बनाया, मूर्ति स्थापित की; रोज होती है पूजा

एक समय ऐसा भी था, जब लालाराम अपने गांव में दातून बेचकर अपने परिवार का गुजारा करते थे। एक समय ऐसा भी था, जब लालाराम अपने गांव में दातून बेचकर अपने परिवार का गुजारा करते थे।
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एक समय ऐसा भी था, जब लालाराम अपने गांव में दातून बेचकर अपने परिवार का गुजारा करते थे।एक समय ऐसा भी था, जब लालाराम अपने गांव में दातून बेचकर अपने परिवार का गुजारा करते थे।

  • 65 साल के लाला राम भाई ने यह मंदिर दूधरेज नगरागाम में बनवाया है, यहां वृद्धाश्रम भी है
  • लाला बताते हैं- पत्नी कहती थी कि कुछ ऐसा करना, जिससे हम दोनों को लोग बरसों तक याद रखें 

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2020, 05:14 PM IST

बढ़वाल.  गुजरात में एक व्यक्ति ने अपनी दिवंगत पत्नी की याद में मंदिर बनवाया है। इसमें नियमित रूप से पूजा-आरती होती है। यह मंदिर बढ़वाल के दूधरेज नगरागाम में 65 साल के लाला राम भाई ने बनवाया है। मंदिर परिसर में ही उन्होंने दो करोड़ की लागत से वृद्धाश्रम भी बनाया है।

एक समय ऐसा भी था, जब लालाराम अपने गांव में दातून बेचकर अपने परिवार का गुजारा करते थे। इसके बाद वे दिल्ली चले गए। यहां एंटिक चीजों का व्यापार शुरू किया। यह व्यापार खूब चला। वे बताते हैं कि मेरी पत्नी ललिता बेन का निधन 51 साल की उम्र में हुआ था। वह अक्सर मुझसे कहती थी कि आप कुछ ऐसा करना, जिससे हम दोनों को लोग बरसों तक याद रखें। 

पहले आश्रम बनवाया, फिर मंदिर का निर्माण किया 
पत्नी के निधन के बाद लाला राम ने पत्नी की याद में पहले तो दूधरेज नगरागाम में दो करोड़ रुपए की लागत से 4 एकड़ जमीन पर वृद्धाश्रम बनाया। उसके बाद वहीं मंदिर बनाया। फिर पत्नी की मूर्ति स्थापित की। अब वहां नियमित रूप से पूजा-आरती होती है। 65 साल उम्र होने के बाद भी लाला राम काफी सक्रिय रहते हैं। उनके 3 बेटे-बेटियां हैं। सारा काम वे स्वयं करते हैं।

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