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अमेरिका / आग में जल चुके घर, स्कूल और कार की 18000 चाबियों से मूर्ति बनाई, लोगों ने कहा- आशा का प्रतीक



18000 चाबियों से एक विशाल पक्षी की मूर्ति बनाई। 18000 चाबियों से एक विशाल पक्षी की मूर्ति बनाई।
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18000 चाबियों से एक विशाल पक्षी की मूर्ति बनाई।18000 चाबियों से एक विशाल पक्षी की मूर्ति बनाई।

  • कैलिफोर्निया के पैराडाइज की रहने वाली 34 साल की आर्ट थैरेपिस्ट ने इसे एक साल के दौरान बनाया
  • आग में जल चुके स्कूल, चर्च, घर, अपार्टमेंट, ऑफिसेस और कार की चाबियों को मूर्ति में लगाया गया है 
  • चाबियों के संकलन के लिए पांच शहरों में 13 केंद्र बनाए गए थे, 30577 किलोमीटर का सफर भी किया
  • मूर्ति बनाने का मकसद लोगों को संदेश देना है कि सबकुछ खोकर भी उभरा जा सकता है

Dainik Bhaskar

Nov 19, 2019, 12:36 PM IST

कैलिफोर्निया. अमेरिका के पैराडाइज की रहने वाली 34 साल की आर्ट थैरेपिस्ट जेसी मरसर ने 18 हजार चाबियों से एक पक्षी की मूर्ति बनाई है। ये चाबियां पिछले साल नवंबर में कैलिफोर्निया के जंगलों में फैली आग की चपेट में आए स्कूल, चर्च, घर, अपार्टमेंट, ऑफिसेस और कार की हैं। इन्हें दान के माध्यम से एक साल के दौरान संकलित किया गया है। लोगों ने कहा, उनकी चाबियों से बनी यह मूर्ति आशा का प्रतीक है, जो संदेश देती है कि खाक से भी उठा जा सकता है। 

 

362 किलो वजनी इस मूर्ति को बनाने में कलाकार जेसी को एक साल का वक्त लगा। चाबियों के संकलन के लिए पैराडाइज समेत पांच शहरों में 13 केंद्र बनाए गए थे, जहां लोगों ने पोस्ट के माध्यम से और खुद जाकर चाबियां दान दीं।

 

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1 लाख 53 हजार एकड़ क्षेत्र तबाह हुआ था, 85 की मौत हुई थी

पिछले साल नवंबर में कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी आग से 153000 एकड़ का क्षेत्र जलकर राख हो गया था। इसमें 85 लोगों की मौत हो गई थी। आग ने बड़े पैमाने पर बस्तियों को नुकसान पहुंचाया था। इसमें पैराडाइज क्षेत्र में जेसी का घर और आर्ट स्टूडियो भी था। 

 

मूर्ति बनाने में पहली चाबियां खुद के घर की
जेसी ने बताया, आग में पैराडाइज स्थित मेरा चिको आपर्टमेंट भी जल गया था। मेरे पिता आग से बचने के लिए घर से बाहर भागे, लेकिन वे अपने साथ चाबियां ले आए। तब मैंने सोचा, उनके पिता की तरह बहुत से पड़ोसी भी चाबियों के साथ घर से निकले होंगे। इसी से प्रेरित होकर चाबियों को संकलन शुरू किया था और पीड़ितों से मिलने के लिए 30 हजार किलोमीटर का सफर भी किया।

 

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