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  • Chhattisgarh, Schools opened in 5 villages after 14 years, places of worship made a school for the education of children

छत्तीसगढ़ / 5 गांवों में 14 साल बाद स्कूल खुले, बच्चों की शिक्षा के लिए पूजा स्थलों को स्कूल बनाया



गांववालों की निगरानी में घरों में तो कहीं पेड़ों के नीचे ये छोटे स्कूल खुल गए हैं। (फाइल फोटो) गांववालों की निगरानी में घरों में तो कहीं पेड़ों के नीचे ये छोटे स्कूल खुल गए हैं। (फाइल फोटो)
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गांववालों की निगरानी में घरों में तो कहीं पेड़ों के नीचे ये छोटे स्कूल खुल गए हैं। (फाइल फोटो)गांववालों की निगरानी में घरों में तो कहीं पेड़ों के नीचे ये छोटे स्कूल खुल गए हैं। (फाइल फोटो)

  • बीजापुर जिले में इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में मौजूद 5 गांवों में देवगुड़ी को ज्ञानगुड़ी में बदला
  • नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्कूल भवन नहीं थे, अधिकारी ने गांव के लोगों के सामने प्रस्ताव रखा था

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2019, 12:28 PM IST

बीजापुर/रायपुर. छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में मौजूद 5 गांवों में बच्चों की पढ़ाई शुरू कराने का जिम्मा गांववासियों ने चुनौती की तरह लिया। इसके लिए उन्होंने देवगुड़ी (झोपड़ीनुमा पूजा स्थल) को ज्ञानगुड़ी (स्कूल) में बदल दिया है। गांववालों की निगरानी में घरों में तो कहीं पेड़ों के नीचे ये छोटे स्कूल खुल गए हैं। 

 

नक्सलवाद के चलते केरपे संकुल के पांच गांवों में पिछले 14 साल से स्कूल बंद पड़े थे। अब फरसनार, करकावाडा, गोंडनुगुर, दुधेपल्ली और केरपे में स्कूल की घंटी फिर से बजने लगी है। करकावाडा, गोंडनुगुर गांव में स्कूल देवगुड़ी में खोले गए हैं। 

 

देवगुड़ी को ज्ञानगुड़ी में बदलने का पहला मामला
बस्तर संभाग में यह संभवत: पहला मामला है कि स्कूल के लिए भवन नहीं मिलने पर गांव की देवगुड़ियों में बच्चों के लिए पढ़ने-लिखने की व्यवस्था की गई है। गांव के प्रमुख हिड़मा जोगा ने बताया कि यहां के 56 गांवों में 13 हजार से ज्यादा आबादी है। इनमें करीब ढाई हजार बच्चे पढ़ाई से दूर थे। 

 

अब स्कूल की घंटी सुनाई देती है
जोगा ने बताया, हम बच्चों को हर हाल में पढ़ाना चाहते हैं। अब तक हमने इलाके में गोलियों-धमाकों की आवाजें सुनी है, पर अब स्कूल की घंटी सुनाई देती है। इस अभियान में बड़ा योगदान खंड शिक्षा अधिकारी सुखराम चिंतूर का है। चिंतूर ने ही करकावाडा और गोंडनुगुर में स्कूल के लिए भवन न मिलने पर देवगुड़ियों में स्कूल का प्रस्ताव गांववासियों के सामने रखा था।

 

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