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  • Cultivated vegetables, herbs in 70 to 80% less water on the foam pads that were wasted in Refugee camps, named 'Desert Garden'.

जॉर्डन / रिफ्यूजी कैंपों के पुराने फोम के गद्दों पर 80% कम पानी में सब्जियां, जड़ी-बूटी उगाईं, नाम दिया ‘डेजर्ट गार्डन’

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पौधों को मिट्‌टी के बजाय पानी और आवश्यक पोषक तत्वों के घोल में उगाया जाता है। हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पौधों को मिट्‌टी के बजाय पानी और आवश्यक पोषक तत्वों के घोल में उगाया जाता है।
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हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पौधों को मिट्‌टी के बजाय पानी और आवश्यक पोषक तत्वों के घोल में उगाया जाता है।हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पौधों को मिट्‌टी के बजाय पानी और आवश्यक पोषक तत्वों के घोल में उगाया जाता है।

  • रिफ्यूजी कैंप में प्रयोग सफल रहा है, अब इसे रेगिस्तानी इलाकों और बंजर जमीन पर आजमाया जाएगा
  • यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड के वैज्ञानिक प्रोफेसर टोनी रयान ने बताया, कैंपों की खराब मैट्रेस को उपजाऊ बनाया

दैनिक भास्कर

Feb 26, 2020, 04:21 PM IST

अम्मान. ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने खराब हो चुकी मैट्रेस के गद्दों का उपयोग करके जॉर्डन के रेगिस्तान में टमाटर, हरा धनिया, मिर्च, बैंगन सहित अन्य सब्जियों व जड़ी-बूटियों की हरियाली पैदा कर दी है। इसे ‘डेजर्ट गार्डन’ नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि रिफ्यूजी कैंप में यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा है, अब इसे अन्य रेगिस्तानी इलाकों व बंजर जमीन पर आजमाया जाएगा।

यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड के वैज्ञानिक प्रोफेसर टोनी रयान ने बताया कि रिफ्यूजी कैंपों में हजारों ऐसी मैट्रेस ट्रेंचिंग ग्राउंड पर फेंक दी जाती हैं जिससे कचरा बढ़ रहा था। हमने इन मैट्रेस में कुछ उपजाऊ व पोषक तत्व शामिल किए और इससे सिंथेटिक मिट्‌टी बनाई। इस मिट्‌टी में सब्जियां और जड़ी-बूटियां उगाने का प्रयास किया। हमें चमत्कारिक रूप से परिणाम मिले। सबसे अच्छी बात तो यह है कि इस तरह के प्रयोग में 70 से 80% पानी कम इस्तेमाल होता है। यानी कि रेगिस्तानी इलाकों में आप 80 फीसदी पानी की बचत कर सकते हैं।

ऐसे तैयार होते पौधे
रेयान ने बताया कि इस हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पौधों को मिट्‌टी के बजाय पानी और आवश्यक पोषक तत्वों के घोल में उगाया जाता है। जब जड़ें निकल आती हैं और ये कुछ बड़े हो जाते हैं तो उन्हें फोम के गद्दों से बनाई सिंथेटिक मिट्‌टी में रोप दिया जाता है। इस तकनीक का एक फायदा यह भी है कि आपको इसमें कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती। यह प्रयोग 1000 सीरियाई शरणार्थियों और वहां के किसानों के सहयोग से सफल हुआ है। 

रेगिस्तानी इलाकों में इस तकनीक से 80% पानी की बचत कर सकते हैं।

3,000 शरणार्थियों को सिखाएंगे डेजर्ट गार्डन तकनीक 
शेफील्ड के शोधकर्ता इस तकनीक से 2 लाख 50 हजार पाउंड जुटाने को तत्पर हैं, ताकि इस पैसे से अन्य 3,000 शरणार्थियों को डेजर्ट गार्डन तकनीक सिखाई जा सके। उनके लिए बीज, पौधे व प्रशिक्षण का इंतजाम किया जा सके। वैसे तो संयुक्त राष्ट्र सीरिया के इन शरणार्थियों के लिए रोटी और छोले का इंतजाम करता है, लेकिन इन्हें पौष्टिक फल, सब्जियां और अन्य अनाज देने के लिए डेजर्ट गार्डन बहुत जरूरी हैं।

डेजर्ट गार्डन तकनीक से शरणार्थियों को ताजा अनाज मिलने लगेगा।

टॉर्चर होने के बीच यह सुखद मुस्कान है
डेजर्ट गार्डन के प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. मोएद अल मेसेलमनी ने कहा- कि वे खुद एक शोधकर्ता और सीरियाई शरणार्थी हैं। जब आप अपना घर छोड़कर भागने के लिए मजबूर होते हैं, तो यह इतना आसान नहीं होता। शरणार्थी होना अपने आप में एक टॉर्चर है। ऐसे में आपको डेजर्ट गार्डन तकनीक से ताजा अनाज मिलने लगे तो चेहरे पर मुस्कान आना सुखद होता है।

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