दावा / आठ हजार पौधे वाली बिल्डिंग में 10 साल से किसी ने बीमारी के नाम पर छुट्‌टी नहीं ली



बिल्डिंग के मालिक कमल मित्तल। बिल्डिंग के मालिक कमल मित्तल।
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बिल्डिंग के मालिक कमल मित्तल।बिल्डिंग के मालिक कमल मित्तल।

  • बिल्डिंग को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण और दूसरी कई संस्थाओं से पुरस्कार मिला, यह दिल्ली की सबसे शुद्ध हवा वाली इमारत  
  • इमारात दिल्ली के नेहरू प्लेस स्थित पहाड़पुर बिजनेस सेंटर की है, 3 दशक से यहां इंडोर पॉल्यूशन कम करने के लिए रिसर्च चल रही है

Dainik Bhaskar

Oct 20, 2019, 12:29 PM IST

नई दिल्ली (अमित कुमार निरंजन). दिल्ली के नेहरू प्लेस स्थित पहाड़पुर बिजनेस सेंटर की बिल्डिंग में बाहर के मुकाबले हवा अधिक साफ है। एंट्री गेट पर ही 6 एयर प्यूरिफायर लगे हुए हैं। रिसेप्शन पर पीएम 2.5 मापने के लिए मशीन लगी हुई है। लिफ्ट से जाने के लिए बढ़िए तो यहां सेनिटाइजर से हाथ साफ करवाया जाता है। ताकि गंदे हाथों से कोई लिफ्ट के बटन या इमारत की दीवारों को न छुए। यह प्रदूषण से घिरे रहने वाले दिल्ली की सबसे स्वच्छ इमारत है। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से इसे दिल्ली की सबसे शुद्ध हवा वाली इमारत का सर्टिफिकेट मिल चुका है।

 

तीन दशक पुरानी इस बिल्डिंग में करीब आठ हजार पौधे हैं। बिल्डिंग में रिसेप्शन से लेकर गलियारों, केबिन, मीटिंग हॉल यहां तक कि टॉयलेट तक में पौधे लगे हैं। इस बिल्डिंग में माइक्रोसॉफ्ट जैसी कई अमेरिकी कंपनियों ने अपना ऑफिस बनाया था। यह बिल्डिंग 55 हजार स्कवायर फीट में बनी है और इसमें छह मंजिल हैं।
 

इनोवेशन में बिल्डिंग के नाम करीब 10 पेटेंट हैं

  1. पिछले तीन दशक से यहां इंडोर पॉल्यूशन कम करने पर रिसर्च चल रही है। इस बिल्डिंग के मालिक कमल मित्तल बताते हैं कि यहां ताजी हवा को बनाए रखने के लिए हर रोज नए प्रयोग किए जाते हैं। अभी तक करीब तीन हजार प्रयोग यहां हो चुके हैं। ताजी हवा को लेकर किए गए इनोवेशन में इस बिल्डिंग के नाम करीब 10 पेटेंट हैं।

  2. मित्तल कहते हैं, हर रोज सुबह 10 बजे से छह मंजिला वाली इस इमारत की ताजी हवा की रिपोर्ट तैयार होती है। अगर रिसेप्शन के पास पीएम 2.5 ठीक कंट्रोल में है तो समझो पूरे बिल्डिंग का प्रदूषण संभल जाएगा। क्योंकि सबसे ज्यादा पॉल्यूटेड हवा यहीं रहने की संभावना रहती है। इस इमारत की अंदरूनी हवा शुद्ध रखने में सबसे ज्यादा अहम योगदान दो ग्रीन हाउस का है। छत खुली नहीं है यह कवर्ड है। मिरर और वैक्यूम ट्यूब की मदद से सूरज की रोशनी पौधों तक पहुंच जाती है।

  3.  ग्रीन हाउस में भी शुद्ध हवा पहुंचाने का सिस्टम तैयार किया गया है। पहले पानी के तापमान नियंत्रित किया जाता है, फिर उससे हवा के तापमान। इसके बाद बाहर की प्रदूषित हवा को शुद्ध करके ग्रीन हाउस तक पहुंचाई जाती है। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो हवा के साथ आने वाली धूल पत्तियों पर जम जाएगी, और इसे हटाने के लिए हर तीन घंटे में पत्तियों को साफ करना पड़ेगा। जो अभी तीन दिन में एक बार साफ करनी पड़ती है। इमारत में एक रसोई भी है सब्जी धोने, काटने, पकाने और परोसने तक की प्रक्रिया डॉक्यूमेंटेड है।

  4. 150 का स्टाफ, हर हफ्ते मेडिकल चेकअप

    इमारत में करीब डेढ़ सौ लोगों का स्टाफ है। इनका रोज ऑक्सीजन लेवल मापा जाता है। हर हफ्ते मेडिकल चेकअप होता है। पिछले एक दशक में इनके यहां से किसी ने बीमारी के नाम पर कोई छुट्‌टी नहीं ली। कर्मचारियों के ज्वाइनिंग लेटर में लिखा है कि अगर कोई बीमार होता है तो कंपनी को अधिकार है कि वह उसकी दोहरी जांच करे। मित्तल इसके बारे में बताते हैं कि यह क्लॉज इसलिए जोड़ा गया क्योंकि कर्मचारी बीमार होता है तो इसका मतलब है कि हमारे प्रयोगों में कहीं कमी है।
     

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