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नाइजीरिया / महिला जज ने छेड़ी ट्रैफिक सुधार की मुहिम, ड्राइवरों को नियम सिखाने के साथ मुफ्त ट्रेनिंग भी दे रहीं

जस्टिस मोनिका बताती हैं कि इससे मेरे बेटे की आत्मा को सुकून मिलेगा। वो जिस भी दुनिया में होगा, मुझे धन्यवाद देगा। जस्टिस मोनिका बताती हैं कि इससे मेरे बेटे की आत्मा को सुकून मिलेगा। वो जिस भी दुनिया में होगा, मुझे धन्यवाद देगा।
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जस्टिस मोनिका बताती हैं कि इससे मेरे बेटे की आत्मा को सुकून मिलेगा। वो जिस भी दुनिया में होगा, मुझे धन्यवाद देगा।जस्टिस मोनिका बताती हैं कि इससे मेरे बेटे की आत्मा को सुकून मिलेगा। वो जिस भी दुनिया में होगा, मुझे धन्यवाद देगा।

  • महिला जज मोनिका डोंगबन-मेंसेम ने हिट एंड रन में बेटे को खो दिया था, पिछले 8 साल से कोर्ट बंद होते ही वे ट्रैफिक नियंत्रित करने पहुंच जाती हैं
  • जज ने कहा- मैं नहीं चाहती किसी और मां की गोद उजड़े, इसलिए ट्रेनिंग ली; अब स्कूल खोलूंगी

दैनिक भास्कर

Feb 17, 2020, 09:43 AM IST

अबुजा. नाइजीरिया की राजधानी अबुजा में 38 डिग्री की गर्मी में पसीने से तरबतर एक महिला ट्रैफिक संभालने में जुटी हुई हैं। यह ट्रैफिक पुलिस अफसर नहीं बल्कि जस्टिस मोनिका डोंगबन-मेंसेम हैं। बेटे की कार एक्सीडेंट में मौत के बाद से ही उन्होंने अबुजा का ट्रैफिक सुधारने का बीड़ा उठाया है। पिछले 8 साल से कोर्ट बंद होते ही वे ट्रैफिक नियंत्रित करने पहुंच जाती हैं।

मोनिका के मुताबिक, ड्राइवरों को ट्रेनिंग-ट्रैफिक नियमों की जानकारी नहीं है, इसलिए हादसे होते हैं। उन्हें लगता है कि उनकी कोशिश से कुछ लोग भी सुधर जाएं तो मेहनत सफल होगी। 

इस निर्णय के पीछे की कहानी

  • जस्टिस मोनिका डोंगबन-मेंसेम ने बताया, ‘‘2011 में बेटे क्वाप्डास (32) के एक्सीडेंट की खबर मिली। जब तक पहुंची, वह दम तोड़ चुका था। आसपास के लोगों से बात की तो पता चला एक कार ने टक्कर मारी थी। दोनों पैर बुरी तरह जख्मी थे। यदि उसे वक्त पर अस्पताल पहुंचाया जाता तो वह बच सकता था। जिस जगह दुर्घटना हुई, वहां सड़क की बनावट भी खराब थी। पता चला कई बार शिकायत के बाद भी सड़क सुधारी नहीं गई। मैं यह तो नहीं जानती कि मेरे बेटे को किसने मारा, पर मैं चाहती हूं, किसी और मां की गोद न उजड़े। इसलिए मैंने समस्या की जड़ में जाने का फैसला लिया।’’ 
  • ‘‘मैंने बस स्टैंड, पार्किंग में जाकर ड्राइवरों से बात की तो हैरान रह गई। उनकी ट्रैफिक को लेकर जानकारी तो कम थी ही, नियम भी पता नहीं थे। मैंने ट्रैफिक विभाग से ट्रैफिक ऑफिसर की ट्रेनिंग ली, फिर स्थानीय कार-भारी वाहन के ड्राइवरों को सिखाना शुरू किया। इसके बाद क्वाप्डास रोड सेफ्टी डिमांड नाम से संस्था शुरू की। जहां पर ड्राइवरों को सड़क सुरक्षा के बारे में मुफ्त सिखाया जाता है। जल्द ही एक स्कूल खोलने जा रही हूं, जहां ड्राइविंग मुफ्त में सिखाई जाएगी। मुझे लगता है कि इससे मेरे बेटे की आत्मा को सुकून मिलेगा। वो जिस भी दुनिया में होगा, मुझे धन्यवाद देगा।’’ 

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