अमेरिका / 30 साल बाद इन विट्रो तकनीक से सरोगेट मां ने चीता के दो शावकों को दिया जन्म

प्रजातियों को सहेजने वैज्ञानिकों का यह तीसरा प्रयास था, जिसमें कामयाबी मिली। प्रजातियों को सहेजने वैज्ञानिकों का यह तीसरा प्रयास था, जिसमें कामयाबी मिली।
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प्रजातियों को सहेजने वैज्ञानिकों का यह तीसरा प्रयास था, जिसमें कामयाबी मिली।प्रजातियों को सहेजने वैज्ञानिकों का यह तीसरा प्रयास था, जिसमें कामयाबी मिली।

  • अंडाणु और शुक्राणु को कोलंबस जू लैबोरेटरी में 19 नवंबर को निषेचित करवाया गया था
  • बच्चों का जन्म बुधवार को हुआ, चिड़ियाघर ने इसकी घोषणा सोमवार को की, पहली बार 1990 में तीन बच्चों को जन्म हुआ था

दैनिक भास्कर

Feb 26, 2020, 08:04 AM IST

पोवेल (ओहियो). दुनिया में 30 साल बाद पहली बार इन विट्रो तकनीक द्वारा सरोगेट मदर से चीता के दो शावकों का जन्म हुआ है। इन बच्चों की जैविक मां छह साल की माता चीता किबिबी है। किबिबी अपने जीवनकाल में कभी मां नहीं बन पाई। साथ ही उसकी प्राकृतिक रूप से मां बनने की उम्र भी नहीं रही। इसलिए किबिबी से अंडाणु और एक अन्य नर चीता से शुक्राणु लेकर उन्हें कोलंबस जू लैबोरेटरी में 19 नवंबर को निषेचित करवाया गया था। 

ये भ्रूण 21 नवंबर को सरोगेट इज्जी मादा चीता में प्रत्यारोपित किए गए। करीब एक माह बाद यानी 23 दिसंबर को अल्ट्रासाउंड जांच से पता चला कि इज्जी गर्भवती है और उसके पेट में दो शावक हैं। गर्भधारण के तीन महीने बाद तीन साल इज्जी ने पिछले बुधवार को एक नर और एक मादा शावक को जन्म दिया। 

पहली बार सफलता मिली
चिड़ियाघर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। चिड़ियाघर से जुड़े डॉ. रैंडी जंग के मुताबिक, इस प्रक्रिया से विभिन्न प्रजातियों को सहेजने में मदद मिलेगी। यह तीसरी बार था, जब वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया की कोशिश की गई। हालांकि इसमें पहली बार 1990 में सफलता मिली थी। तब तीन चीता के बच्चों को जन्म हुआ था। अभी दुनिया में चीतों की संख्या करीब 7500 है। इस तकनीक से इनकी संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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