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देश के पहले दिव्यांग आयरनमैन ने बताया- 5 साल पहले ग्लूकोमा ने नजर छीनीं, प्रेम से विजन मिला और दुनिया जीती

9 महीने पहले
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निकेत दलाल अपने परिवार के साथ ।
  • 38 साल के दिव्यांग निकेत दलाल ने वैलेंटाइन डे पर अपनी प्रेम कहानी दैनिक भास्कर के साथ साझा की
  • उन्होंने बताया कि पत्नी पल्लवी ने हर मुश्किल में साथ दिया और प्रेम से मेरे जीवन के अंधेरे को दूर किया
  • निकेत की एक आंख की रोशनी हादसे से और दूसरी की ल्यूकेमिया की वजह से चली गई थी

औरंगाबाद. महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के 38 साल के दिव्यांग निकेत दलाल हाल ही में दुबई में हुई आयरनमैन रेस में सेकंड विनर रहे। यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय हैं। आज वैलेंटाइन डे पर उन्होंने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने में उन्हें उनकी पत्नी पल्लवी का साथ मिला। दैनिक भास्कर के साथ उन्होंने अपनी प्रेम कहानी साझा की।


निकेत ने बताया, ‘‘प्रेम अंधा होता है। इसे सुनकर हर कोई यही कहेगा। सच भी है। हाल ही में मैंने दुबई में आयरनमैन प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया। इस स्पर्धा में शामिल होने वाला मैं भारत का पहला और दुनिया का पांचवां दिव्यांग बना। हालांकि, यह इतना आसान नहीं था। छोटी-छोटी बातें भी चुनौतीपूर्ण लगती थीं, लेकिन हर बार मेरी पत्नी ही मेरी ताकत बनीं। मैं कक्षा दूसरी में था। साइकिल का स्पोक लगने से एक आंख से दिखना बंद हो गया था।' 


उन्होंने बताया कि ल्यूकेमिया की वजह से दूसरी आंख कभी भी धोखा दे सकती है, यह तय था। इसी दौरान मेरे जीवन में पल्लवी आईं। 1996 में वे नौवीं में थीं और मैं दसवीं में, जब उन्होंने मुझे प्रपोज किया था। भविष्य में मेरी नजर जा सकती है, यह जानते हुए भी उन्होंने अपने प्रेम से मेरे जीवन में रोशनी की। प्रेम निभाने के बड़े-बड़े वादे सब करते हैं, लेकिन जो पल्लवी ने किया, वह शब्दों में व्यक्त नहीं हो सकता। शादी भी इतनी आसान नहीं थीं। घर-परिवार और रिश्तेदारों ने पल्लवी को समझाने की कोशिश की कि जिंदगी मुश्किल रहने वाली है। मुझे भी पता था कि नजर रहने वाली नहीं है। इस वजह से मैं भी पूरी तरह तैयार नहीं था, लेकिन वह पूरी ताकत से अड़ी रही।’’

परिवार में पत्नी बहू के साथ बेटे की भूमिका निभा रही है
वह बताते हैं कि हम साथ-साथ हैं, मंत्र गुनगुनाते हमने 2008 में शादी की। प्रेम बढ़ता गया। दोनों ने ही अपना करियर, संसार और जिंदगी को आगे बढ़ाया। बेटा भी हुआ, जो आज दस साल का है। शादी के पांच साल बाद मेरी रही-सही नजर भी चली गई। तबसे पल्लवी मेरी ताकत है। मेरी आंखें हैं। आज पल्लवी न केवल बहू बल्कि मेरे घर में बेटे की भूमिका भी बखूबी निभा रही हैं। नजर गई, लेकिन विजन आ गया। इसी वजह से मैं आज भी अर्थपूर्ण जीवन जी रहा हूं। यह सब पल्लवी के प्रेम की बदौलत ही संभव हुआ।

दूसरी बार शुरू किया जीवनः पल्लवी
पल्लवी बताती हैं, ‘‘जब आप आगे बढ़ रहे हों, तब नजर गंवाना दुखदायक है। निकेत से ज्यादा बड़ी चुनौती मेरे लिए थी। निकेत हमेशा कहते हैं कि मुझे दिखना बंद हुआ है, विजन नहीं गया है। उनके इसी विचार से मुझे ताकत मिली। सच कहूं तो नजर जाने के बाद हमारा जीवन दूसरी बार शुरू हुआ है। पहले वे थोड़े चिड़चिड़ाए, सख्ती दिखाई, लेकिन अब हम सभी को उन पर गर्व है।

अब अगला मिशन: माउंट एवरेस्ट
निकेत दलाल बताते हैं,  “दुबई में आयरनमैन’ के तहत 1.9 किमी की तैराकी, 90 किमी की साइकिलिंग और 21.1 किमी की दौड़ को बिना रुके पूरा किया। आठ घंटे के तय समय में से महज 7 घंटे 44 मिनट में कर लिया था।’’ निकेत ने यह उपलब्धि अपने पार्टनर अर्हम शेख के साथ मिलकर हासिल की। अब वे माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करना चाहते हैं।

(जैसा उन्होंने एकनाथ पाठक को बताया)

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