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  • For the first time, a liter of water made by air at the railway station for 5 rupees, including a bottle is 8 rupees.

पहली बार / रेलवे स्टेशन पर हवा से बनाया एक लीटर पानी 5 रुपए में, बोतल समेत कीमत 8 रु.

सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक हवा से बना पानी मिलता है। सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक हवा से बना पानी मिलता है।
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सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक हवा से बना पानी मिलता है।सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक हवा से बना पानी मिलता है।

  • तेलंगाना के सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर मेघदूत तकनीक से बने पानी की ब्रिकी गुरुवार से शुरू हो गई है 
  • इसे कंपनी मैत्री एक्वाटेक ने मेक इन इंडिया के तहत विकसित किया
  • जल शक्ति मंत्रालय ने भी इसे सेहत के लिए सुरक्षित घोषित किया है

Dainik Bhaskar

Dec 14, 2019, 03:28 PM IST

सिकंदराबाद. तेलंगाना के सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर सीधे हवा से बनाया गया पानी बेचा जा रहा है। मेघदूत तकनीक से बने इस पानी की कीमत बोतल के साथ 8 रुपए है। ग्राहक अपनी बोतल में इसे पांच रुपए में खरीद सकता है। जल शक्ति मंत्रालय की ओर से इस तकनीक को सेहत के अनुकूल और सुरक्षित घोषित करने के बाद साउथ सेंट्रल रेलवे ने यहां गुरुवार को कियोस्क इंस्टॉल किया है। इसका ऑटोमैटिक वॉटर जेनरेटर रोजाना 1000 लीटर पानी बनाता, जो स्टील के एक टैंक में जमा होता है। 

खाद्य मानकों के अनुरूप यह टैंक पानी को खराब नहीं होने देता और हमेंशा ताजा बनाए रखता है। साउथ सेंट्रल रेलवे (एससीआर) ने कियोस्क को जल संरक्षण और हरित प्रयासों के तहत अपनाया है। हवा से पानी निकालने की मेघदूत नाम की तकनीक को मैत्री एक्वाटेक ने 'मेक इन इंडिया' के तहत विकसित किया है।

हर मौसम में काम करता है सिस्टम

एससीआर के अधिकारियों के मुताबिक, मशीन पर्यावरण के अनुकूल है। यह किसी पानी के स्रोत पर निर्भर नहीं है। कुछ भी वेस्ट उत्पन्न नहीं करती और हर मौसम में काम कर सकती है। यह शोर भी कम करती है। हमेशा तापमान और नमी के स्तर को डिस्प्ले पर दिखाती है। मशीन हवा से सीधे पानी सोखती है और कई चरणों से गुजरने के बाद पानी टैंक में जमा होता है।

कियोस्क का ऑटोमैटिक वॉटर जेनरेटर रोजाना 1000 लीटर पानी बनाता है। 

इन चरणों में हवा से बन जाता पानी 

  • सबसे पहले हवा का बहाव मशीन से गुजरता है, जहां उसमें मौजूद डस्ट पार्टिकल समेत दूसरे प्रदूषक तत्वों को सोख लिया जाता है। 
  • मशीन से छनकर निकलने वाली हवा सीधे कूलिंग चैंबर में जाती है, जहां इसे अत्यधिक (कंडेंस) ठंडा किया जाता है। यहीं कंडेस्ड एयर पानी की बूंद में बदलती है। इसके बाद बूंद-बूंद जमा होती है।
  • जमा हुआ पानी भी कई स्तर पर फिल्टर होता है। इससे पानी में मौजूद दूसरे प्रदूषक तत्व हट जाते हैं और पानी शुद्ध हो जाता है। 
  • इस पानी को भी अल्ट्रा (यूवी-रे) वॉयलेट किरणों वाले सिस्टम से गुजारा जाता है। इसके बाद पानी पीने योग्य बनता है।
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