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अमेरिका में पहली बार / काम करना बंद कर चुके हृदय को ऑक्सीजन, ब्लड और इलेक्ट्रोलाइट देकर फिर धड़काया

For the first time in America, the heart of the deceased was smashed again by giving oxygen, blood and electrolyte.
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For the first time in America, the heart of the deceased was smashed again by giving oxygen, blood and electrolyte.

  • ड्यूक पहला अमेरिकी अस्पताल है जिसने कार्डियक डेथ से मृत व्यक्ति के दिल को दोबारा धड़काकर ट्रांसप्लांट किया
  • यह तकनीक सबसे पहले 2015 में यूके के रॉयल पापवर्थ हॉस्पिटल में तैयार की गई थी, रॉयल अस्पताल अब तक 75 से अधिक ऐसे दिलों को प्रत्यर्पित कर चुका है

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2019, 02:11 PM IST

वॉशिंगटन. अमेरिकी की ड्यूक यूनिवर्सिटी के डॉक्टर्स ने मृत व्यक्ति के दिल को फिर धड़काने में कामयाबी हासिल की है। यह तकनीक सबसे पहले 2015 में यूके के रॉयल पापवर्थ हॉस्पिटल में तैयार की गई थी और अब ड्यूक पहला अमेरिकी अस्पताल बन गया है, जिसने सडन कार्डियक डेथ (एससीडी) से मृत व्यक्ति के दिल को दूसरे व्यक्ति के शरीर में सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया।

दरअसल, एससीडी के बाद व्यक्ति के दिल ने काम करना बंद कर दिया था और शरीर में रक्त का संचार बंद हो गया था। इसके बाद डॉक्टर्स ने मृतक के हृदय को ब्लड, ऑक्सीजन और इलेक्ट्रोलाइट्स देकर फिर धड़काया। ट्रांसप्लांट से पहले टीम ने दिल को धड़काने का वीडियो फिल्माया जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।  

मौत के बाद दिल को थोड़ी ऑक्सीजन मिलती रहती है
ड्यूक यूनिवर्सिटी की सर्जरी करने वाली टीम के सदस्य डॉक्टर जैकब श्रोडर के मुताबिक, ब्रेन डेड व्यक्ति के दिल का प्रत्यर्पण किया गया, तब उसके शरीर के बाकी अंग भी काम कर रहे थे। अंगों के दान में समय सबसे प्रमुख भूमिका निभाता है। जैसे ही व्यक्ति की मौत होती है। ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है। इससे टिश्यू तेजी से खत्म होकर हार्ट की धड़कन को कम करने लगते हैं। प्राकृतिक मौत के बाद जब दिल की धड़कन रुक जाती है, तब भी दिल तक थोड़ी मात्रा में ऑक्सीजन पहुंच रही होती है।


ऐसे दोबारा धड़काया दिल
डॉक्टर जैकब श्रोडर ने बताया, दिल को संक्रमण से बचाने के लिए अत्यधिक ठंडे वातावरण में रखा जाता है। यही एक अंग है, जो शरीर के बाहर 4 से 6 घंटे तक रहकर भी कार्य कर सकता है। इसके लिए दिल को मृतक के शरीर से निकालकर तुरंत मशीन से जुड़ी नली से जोड़ दिया। मशीन से दिल को जैसे ब्लड, ऑक्सीजन और इलेक्ट्रोलाइट्स सप्लाई हुई। वह तुरंत धड़कने लगा। इस तकनीक को परफ्यूजन कहा जाता है। इसका पहली बार इस्तेमाल 2015 में यूके में किया गया था। तब से लेकर अब तक रॉयल अस्पताल ने 75 से अधिक ऐसे दिलों को प्रत्यर्पित किया जो शरीर में रक्त का संचार बंद कर चुके थे। 

दिल का पहला प्रत्यर्पण 1967 में हुआ
दुनिया में पहली बार दिल का प्रत्यर्पण 1967 में दक्षिण अफ्रीका में किया गया था। इसके एक साल बाद स्टैंफोर्ड यूनिवर्सिटी के डॉक्टर्स ने अमेरिका में हार्ट ट्रांसप्लांट करने में सफलता पाई थी। तब से लेकर 2018 तक अमेरिका में 3400 से अधिक हार्ट ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। हालांकि अब दिल का प्रत्यर्पण सामान्य बात हैं लेकिन इसका उपलब्ध होना अब भी चुनौती है।

यूस में 45% से कम लोग अंग दान का रजिस्ट्रेशन कराते हैं
अमेरिका ही नहीं दुनिया में अंग दाताओं द्वारा बड़ी संख्या में लीवर, गुर्दा (किडनी) दान दिया जाता है, लेकिन हार्ट डोनर अब भी बहुत कम है। अकेले यूएस में ही 45% से कम लोग अंग दान के लिए खुद का रजिस्ट्रेशन कराते हैं। 

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