जर्मनी की इस कॉलोनी में 500 साल से नहीं बढ़ा किराया, सालभर के लगते हैं सिर्फ 70 रुपए

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

लाइफस्टाइल डेस्क. जर्मनी में ऑग्सबर्ग में स्थित फुग्गेरी कॉलोनी में पिछले 500 सालों से घरों का किराया नहीं बढ़ा है। यहां के निवासी सालभर में सिर्फ 1 डॉलर (70 रुपए) किराया चुकाते हैं। फुग्गेरी की स्थापना 1514 में ऑग्सबर्ग के गरीब लोगों के लिए एक सोशल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के रूप में जैकब फुग्गर ने की थी। 

 

 

1) कौन थे जैकब फुग्गर

  • जैकब फुग्गर परिवार के साथ 14 वीं शताब्दी में जर्मन शहर में आए थे। यहां आकर उन्होंने कपड़ा व्यापार शुरू किया था।
  • 16 वीं शताब्दी तक फुग्गर परिवार ऑग्सबर्ग में सबसे अमीर परिवार बन गया था। कपड़े के व्यापार के साथ उन्होंने रियल एस्टेट और बैंकिंग के क्षेत्र में विस्तार किया। इस वजह से जैकब फुग्गर के सबसे धनी बैंकर बन गए थे।
  • ऑग्सबर्ग के लोगों ने उन्हें "जैकब फुग्गर द रिच" नाम दिया था। उन्होंने वहां के गरीब और बेसहारा लोगों के लिए 1514 में फुगेरेई कॉलोनी का निर्माण शुरू किया।
  • जैकब फुग्गर का सपना सामाजिक स्थिति, उम्र या फैमिली बैकग्राउंड की परवाह किए बिना लोगों को कम कीमत में रहने की जगह उपलब्ध कराना था। 
  • यहां केवल वही लोग आवेदन कर सकते थे जो कैथोलिक धर्म को मानते हों और ऑग्सबर्ग में कम से कम दो सालों से रह रहे हों।
  • जैकब फुग्गर ने कॉलोनी में रहने वाले लोगों से शर्त भी रखी थी जिसमें आवेदकों को वहां के स्थानीय चर्च में दिन में तीन बार फुग्गर परिवार के लिए प्रार्थना करना होगा। इस परंपरा को स्थानीय लोग आज भी मानते हैं।
  • फुग्गेरी कॉलोनी में रहने वालों लोगों को 500 साल पहले उस वक्त की करंसी के हिसाब से हर महीने 1 रेनिश गिल्डर का भुगतान करना होता था। आज भी इतना ही किराया है। हालांकि, रेनिश गिल्डर आज के समय की करंसी के हिसाब से बदल गई है। आज यहां रहने वालों लोगों को सालाना 1 डॉलर (70 रुपए) किराया देना होता है।
  • स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फुग्गेरी कॉलोनी में रहने वाले लोगों को किराए के अलावा 1 डॉलर का भुगतान स्थानीय चर्च के रख-रखाव के लिए देना पड़ता है। साथ ही, 95 डॉलर (6,650 रुपए) कॉलोनी के मैंटेनेंस के लिए देना होता है।
  • फुग्गेरी कॉलोनी के बारे में पता चलने के बाद पर्यटकों की संख्या भी बढ़ती जा रही है, जिसके बाद यहां के ट्रस्ट ने यहां आने वाले पर्यटकों से 300 रुपए बतौर एंट्री फीस लेनी शुरू कर दी है। इसके साथ ही, इस कॉलोनी के अंदर ही एक संग्रहालय भी बना है जिससे पर्यटक यहां के घरों को अंदर से देख सकते हैं।
  • दूसरे विश्व युद्ध के दौरान फुग्गेरी कॉलोनी को नुकसान हुआ था। इसके बाद कॉलोनी को न केवल फिर से बनाया गया बल्कि इसका विस्तार भी हुआ। आज इसमें 67 घर और 147 अपार्टमेंट हैं और यह 142 निवासियों का घर है। यह दुनिया का सबसे पुराना सामाजिक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स है।