सख्ती / जर्मनी में चेचक का टीका ना लगवाने पर 1 लाख 94 हजार रु का जुर्माना लगेगा, कानून जल्द आएगा

Dainik Bhaskar

May 08, 2019, 10:25 AM IST


Germany proposes $ 2800 fine for parents skipping measles vaccination
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Germany proposes $ 2800 fine for parents skipping measles vaccination

  • पेरेंट्स को टीके का प्रूफ दिखाना होगा, ऐसा न करने पर भरना होगा फाइन
  • जर्मनी में मीसेल्स के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह कदम उठाया जाएगा

हेल्थ डेस्क. बच्चों को चेचक (मीसेल्स) का टीका न लगवाने पर जर्मनी के पेरेंट्स को 194201 रुपए का जुर्माना भरना पड़ सकता है। सरकार जल्द ही यह कानून लाने जा रही है। इसकी पुष्टि स्वास्थ्य मंत्रालय ने की है। स्कूल जाने वाले बच्चे को टीका अगर लग चुका है, तो पेरेंट्स को इसका प्रूफ भी दिखाना होगा। ऐसा न करने पर फाइन भरना होगा।

2017 में मीसेल्स से 1 लाख से ज्यादा मौतें

  1. स्वास्थ्य मंत्री जेंस स्पान का कहना है, "मैं यहां चेचक को पूरी तरह खत्म करना चाहता हूं। हर वो बच्चा जो स्कूल या किंडरगार्टेन जा रहा है, उसे इसका टीका लगवाना चाहिए।" जर्मनी में चेचक के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह कानून लाने की तैयारी हो रही है। स्पान का यह प्रस्ताव तब आया है लंदन के स्वास्थ्य सचिव मैट हैंकॉक ने एंटी-वैक्सीन अभियान चलाने वालों को गैर-जिम्मेदार करार दिया है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, ऐसे लोगों के हाथ खून से रंगे हैं।

  2. 95% वैक्सीनेशन बेहद जरूरी

    चेचक के बचाने के लिए टीके की दो डोज दी जाती हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के 2017 में जारी बयान के मुताबिक, 97% जर्मनी के बच्चों ने पहला टीका लगवाया है। वहीं, 93% बच्चों ने वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं ली थी। विशेषज्ञों का कहना है बीमारी से बचने के लिए कम से कम 95% वैक्सीनेशन बेहद जरूरी है।

  3. जर्मनी में अब तक 300 नए मामले

    मार्च 2018 और फरवरी 2019 में यूरोप में सबसे ज्यादा इसके मामले जर्मनी में सामने आए थे। सिर्फ इस साल ही करीब 300 मामले देखे गए। यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल के आंकड़ों से इसकी पुष्टि भी हुई थी। चेचक के मामलों में इटली सबसे टॉप पर था जिसमें 2498 केसेस सामने आए थे। 

  4. यूनिसेफ के एक अध्ययन के मुताबिक, 2017 में चेचक के कारण दुनियाभर में 110000 लोगों की मौत हुई थी। इसमें सबसे ज्यादा बच्चे थे। इसके मामले 2016 के मुकाबले 22% अधिक थे। इस रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में 2 करोड़ ऐसे बच्चे थे जिन्हें इसका चेचक का पहला टीका नहीं लग पाया था। मामले बढ़ने का यह एक बड़ा कारण था।

  5. जर्मनी से पहले न्यूयॉर्क में हुई थी फाइन की शुरुआत

    जर्मनी फाइन लगाने वाला पहला देश नहीं है, अप्रैल में न्यूयॉर्क में भी इसकी शुरुआत की गई है। यहां चेचक के मामले बढ़ने आसपास रहने वालों में टीका न लगे होने की स्थिति में करीब 70 हजार रुपए फाइन भरना होगा। यहां कई समुदायों में चेचक, रूबेला और मम्स के मामले बढ़ने पर यह नियम लागू किया गया था। 

  6. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, कभी उच्च आय वाला देश संयुक्त राज्य अमेरिका टीके की पहली खुराक न लेने वाले बच्चों की सूची में शीर्ष पर रहा था। इसके मामले सर्वोधिक बढ़ने पर 2000 में बीमारी को पूरी तरह से खत्म घोषित कर दिया गया था।

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