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ग्रीस / चर्चों को मिलने वाला सरकारी खर्च बंद, पादरियों का सिविल सर्वेंट दर्जा भी खत्म होगा

Dainik Bhaskar

Nov 09, 2018, 07:40 AM IST


greece leftist government transforming state relations with powerful church
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greece leftist government transforming state relations with powerful church
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  • सरकार ने फैसले को धर्मनिरपेक्ष कदम बताया, सिविल सर्वेंट्स के 10 हजार पद खाली होंगे
  • आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ग्रीस ने बनाया नया नियम 

एथेंस. ग्रीस सरकार ने ताकतवर माने जाने वाले ऑर्थोडॉक्स चर्चों के साथ सालों से चले आ रहे संबंधों में बदलाव करने का फैसला किया है। इसके मुताबिक, चर्चों को मिलने वाली सरकारी मदद बंद कर दी जाएगी। साथ ही पादरियों का सिविल सर्वेंट का दर्जा भी खत्म करने का ऐलान किया गया है।

 

करीब एक करोड़ 10 लाख की आबादी वाले ग्रीस में इसे अब तक का सबसे बड़ा कदम बताया जा रहा है। सरकार इस फैसले को ग्रीस का धर्मनिरपेक्ष बनने की ओर कदम बता रही है। अफसरों का कहना है कि निजी क्षेत्र को किसी भी तरह के धार्मिक काम के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।

 

10 हजार पादरियों को मिला था सिविल सर्वेंट का दर्जा
ग्रीस में लेफ्ट की सरकार है। सरकार के प्रवक्ता दिमित्रिस जनाकोपोलोस के मुताबिक- फैसले के चलते 10 हजार सिविल सर्वेंट्स की पोस्ट खाली होंगी। पादरी नौकरशाह नहीं होते, उन्हें केवल यह दर्जा दिया जाता है। लेकिन वे सिविल सर्वेंट्स की गिनती में आते हैं और उन्हें काफी सारी सुविधाएं मिलती हैं। ग्रीक प्रधानमंत्री एलेक्सिस सिप्रास ने कहा कि हम चर्चों के साथ सरकार के रिश्ते बदलना चाहते हैं। प्रगतिशील सोच यही कहती है कि देश के नियम-कायदे और चर्च अलग-अलग हों।

 

सरकार और चर्चों के बीच करार
सरकार और चर्चों के बीच एक समझौता हुआ है जिसके मुताबिक पादरियों को एक ज्वाइंट फंड से पैसा मिलेगा। लंबे समय से ग्रीस के चर्चों के पास काफी पैसा रहा है। उनका होटल, इंटरप्राइजेज और अन्य संपत्तियों पर मालिकाना हक भी था। चर्च और सरकार के बीच तनाव की वजह ग्रीस में लंबे समय से चल रही आर्थिक मंदी को बताया जा रहा है। डील के मुताबिक, जिन संपत्तियों पर सरकार और चर्चों के बीच 1950 के दशक से तनातनी चली आ रही थी, उन्हें दोनों में आधा-आधा बांट दिया गया है।

 

देश की धर्मनिरपेक्षता बरकरार रखने की कोशिश
सालों से ग्रीस में सरकार पर एक धर्म को संरक्षण देने और अन्य अल्पसंख्यकों मसलन मुस्लिमों, जेहोवा के अधिकारों के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं। सरकार के प्रवक्ता जनाकोपोलोस का कहना है कि नया नियम बनाकर हमने धर्मनिरपेक्षता लाने की कोशिश की है। इसका मतलब है कि अब देश किसी धर्म को ज्यादा या कम अधिकार नहीं देगा। हालांकि ग्रीस में ऑर्थोडॉक्स चर्च के अनुयायी सबसे ज्यादा हैं।

 

चर्च हमेशा समाज के केंद्र में रहे
चर्च और सरकार को अलग करने की पिछली कोशिशें नाकाम ही रहीं। 400 सालों के ओटोमन शासन के दौरान चर्च की भूमिका विश्वास और भाषा को संरक्षित करने की रही। चर्च को अभी भी समाज के केंद्रीय स्तंभ के रूप में देखा जाता है। चर्च की अहमियत को इस बात से समझा जा सकता है कि मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले नेता पहले पारंपरिक रूप से चर्च जाकर शपथ लेते थे। 

 

कई बिशप सरकार के फैसले से राजी नहीं
सरकार के साथ डील करने के फैसले से चर्च और कुछ पादरियों ने असहमति जताई। एक उदार माने जाने वाले पादरी इरोनीमोस ने कहा कि डील को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। समझौता होना एक बात है लेकिन उसे स्वीकार करना अलग बात।

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