शख्सियत / हरीश साल्वे ने दिलीप कुमार के केस से शुरू किया था कॅरिअर, एक पैरवी का 15 लाख रु. लेते हैं



इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में हरीश साल्वे। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में हरीश साल्वे।
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इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में हरीश साल्वे।इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में हरीश साल्वे।

  • इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में कुलभूषण जाधव केस देश का पक्ष रखा, एक रुपए ली फीस
  • संविधान विशेषज्ञ नानी पालखीवाला की सलाह पर सीए की जगह वकील बन गए थे
  • बड़े केस की तैयारी में प्रेरणा के लिए पालखीवाला की तस्वीर अपने पास रखते हैं

Dainik Bhaskar

Jul 20, 2019, 09:25 AM IST

नई दिल्ली.  पद्मभूषण से सम्मानित 64 साल के हरीश साल्वे देश के सबसे महंगे वकीलों में शुमार हैं। हाल ही में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में कुलभूषण जाधव केस में देश का पक्ष रखा। फीस के रूप में महज एक रुपया लिया। हरीश ने कॅरिअर में पहला बड़ा केस दिलीप कुमार का लिया था। दिलीप कुमार पर काला धन रखने का आरोप था।

 

अलग-अलग स्रोत पर मौजूद आंकड़ों के हिसाब से हरीश कोर्ट में एक बार की पैरवी के लिए औसतन 15 लाख रुपए तक लेते हैं। 1999 से 2002 तक भारत के सॉलिसिटर जनरल रह चुके हरीश सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट हैं। वे इंग्लैंड-वेल्स की बार एसोसिएशन में भी रजिस्टर्ड हैं। देश के बड़े कॉर्पोरेट घरानों के साथ-साथ हरीश कई सेलिब्रिटीज़ के केस भी लड़ चुके हैं।

 

प्रोफेशनल गुण बहुत कम उम्र में ही आ गए थे: हरीश
उनका बचपन नागपुर में बीता। पिता चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) थे और उनकी सीए फर्म थी। टैक्सेशन में रुचि के कारण पिता के रसूखदार और संपन्न लोगों से संपर्क थे। इन लोगों का उनके घर आना-जाना होता था। उनकी मां अम्ब्रिती डॉक्टर थीं। दादा क्रिमिनल लॉयर थे, तो परदादा सबऑर्डिनेट जज रहे। हरीश के मुताबिक घर पर इस तरह का माहौल होने से उनमें प्रोफेशनल गुण बहुत कम उम्र में ही आ गए थे। घर में अनुशासन रहता था। हरीश ने एक इंटरव्यू में बताया कि उस समय रेडियो के रूप में इंटरटेनमेंट के साधन भी मौजूद थे, लेकिन घर में पढ़ाई पर ज्यादा जोर होता था। इस कारण उनमें किताबें पढ़ने की आदत कम उम्र से ही विकसित हो गई। हरीश बचपन से इंजीनियर बनना चाहते थे, लेकिन पिता को देखकर सीए बनने की प्रेरणा मिली।

 

पिता के कानून की ड्राफ्टिंग खोजा था महत्वपूर्ण पॉइंट
1975 में बीकॉम करने के साथ ही वह दो साल की चार्टर्ड अकाउंटेंट की आर्टिकलशिप खत्म कर चुके थे। वह सीए इंटर परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। उन दिनों पिता व्यस्तताओं के कारण दिल्ली में रहते थे और हरीश अपने पिता के पार्टनर का नागपुर में काम में हाथ बंटाते थे। एक केस की तैयारी के लिए पिता के दोस्त ने उन्हें नोट्स बनाने को कहा। नोट्स में हरीश ने जो बिंदु उठाए, उनसे उनके पिता बहुत प्रभावित हुए। इस कानून की ड्राफ्टिंग कमेटी में उनके पिता थे, लेकिन उनकी समझ में यह पॉइंट नहीं आया था। बाद में जब इसी मुद्दे को लेकर मशहूर वकील और संविधान विशेषज्ञ नानी पालखीवाला से हरीश के पिता और हरीश मिले, तो पालखीवाला भी उनसे बहुत प्रभावित हुए। पालखीवाला ने हरीश को सीए छोड़कर वकील बनने की नसीहत दे डाली और यही उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। 

 

खाली समय में पियानो बजाते हैं हरीश
हरीश ने 1978 में नागुपर से वकालत की पढ़ाई करने के साथ-साथ दिल्ली-मुंबई की फर्म में इंटर्नशिप की। बाद में सोली सोराबजी के लिए काम किया। हरीश के मुताबिक नानी पालखीवाला का उनकी जिंदगी पर गहरा प्रभाव है। वह बड़े केस की तैयारी में प्रेरणा के लिए पालखीवाला की तस्वीर अपने पास रखते हैं। दिल्ली में रहने वाले हरीश खाली वक्त में पियानो बजाना पसंद करते हैं। वह क्यूबा के जैज पियानिस्ट गोंजालो रूबालकाबा के बहुत बड़े फैन हैं। उन्हें दूसरे विश्व युद्ध पर चर्चिल के लेख बेहद पसंद हैं।

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