यूनेस्को / सोवा रिग्पा पर चीन ने भी दावा ठोका, भारत ने कहा- यह हमारी चिकित्सा पद्धति

India and China stake claim on Sowa Rigpa, India said - this is our medical practice
X
India and China stake claim on Sowa Rigpa, India said - this is our medical practice

  • यूनेस्को में भारत ने आवेदन दिया तो चीन ने कहा कि यह उसकी पुरानी पद्धति है, इस पर उसका हक है
  • चीन के दावे के बाद भारत यूनेस्को को पैथी से जुड़े तथ्य और दस्तावेज उपलब्ध करा रहा है

Dainik Bhaskar

Nov 22, 2019, 09:11 AM IST

नई दिल्ली (पवन कुमार). आयुर्वेद की तरह ही इलाज की एक पद्धति है सोवा रिग्पा। इस पद्धति से भारत में सैकड़ों सालों से इलाज हो रहा है। इस कारण भारत इसे अपना बनाने के लिए जब यूनेस्को पहुंचा, तो चीन भी यूनेस्को पहुंच गया। दोनों देशों ने इलाज की इस पद्धति पर अपना-अपना दावा ठोक दिया है। यूनेस्को में दिए गए आवेदन में भारत सरकार ने कहा कि सोवा रिग्पा भारत की चिकित्सा पद्धति है। इसे इंटेजिबल कल्चरल हेरिटेज ऑफ ह्यूमैनिटी की सूची में शामिल किया जाए। हालांकि, चीन का दावा है कि यह उसकी पुरानी पद्धति है। लिहाजा, इस पर चीन का हक है। 

चीन के दावे के बाद भारत यूनेस्को को पैथी से जुड़े तथ्य और दस्तावेज उपलब्ध करा रहा है ताकि इस पर अपना हक साबित किया जा सके। उधर, एक पद्धति पर दो देशों के दावों  की वजह से यूनेस्को को फैसला लेने में देरी हो रही है। इससे पहले बुधवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में देश में पहली बार एक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा रिग्पा बनाने पर मुहर लगी है। लेह में बनने वाले इस स्वायत्त संस्थान के निर्माण पर करीब 50 करोड़ रु. लागत आएगी।

कैंसर समेत कई बीमारियों में कारगर
हिमालयीन इलाके सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग, हिमाचल के धर्मशाला, लाहौल स्पीति, लद्दाख और कुछ अन्य इलाकों में सोवा रिग्पा पद्धति काफी प्रचलित है। इसके लिए जड़ी-बूटियों से ही दवा बनती है। विशेषज्ञों का दावा है कि अस्थमा, आर्थराइटिस, कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों में इस पैथी से इलाज कारगर है।

तीन शहरों में खुलेंगे कॉलेज, 15-15 छात्रों का एडमिशन होगा
आयुष मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह भारत की बहुत पुरानी चिकित्सा पद्धति है और अब इस पैथी की पढ़ाई से लेकर चिकित्सीय प्रैक्टिस के लिए नियम-कानून तक बना दिए गए हैं। पहली बार देश के तीन शहरों लेह, सारनाथ और गंगटोक में एक-एक कॉलेज को मान्यता दी गई है। हर कॉलेज में 15-15 स्टूडेंट्स को दाखिला दिया गया है।

DBApp

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना