इंडोनेशिया / एंबुलेंस को एस्कॉर्ट करने के लिए बनाया गया बाइकर्स ग्रुप, ताकि वह जाम में न फंसे



एंबुलेंस के साथ एस्कॉर्ट ग्रुप। एंबुलेंस के साथ एस्कॉर्ट ग्रुप।
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एंबुलेंस के साथ एस्कॉर्ट ग्रुप।एंबुलेंस के साथ एस्कॉर्ट ग्रुप।

  • इंडोनेशियन एस्कॉर्टिंग एंबुलेंस ग्रुप देश के 80 शहरों में मिशन की तरह इस काम में जुटा 
  • इसके 2000 से ज्यादा सदस्य हैं, सभी के पास अपनी मोटरसाइकिल है

Dainik Bhaskar

Jun 24, 2019, 09:45 AM IST

जकार्ता. एंबुलेंस ट्रैफिक जाम में न उलझे और गंभीर मरीज जल्द अस्पताल पहुंच सकें, इसलिए इंडोनेशिया में बाइकर्स का ग्रुप बनाया गया है। यह ग्रुप एंबुलेंस को एस्कॉर्ट करता है। इंडोनेशियन एस्कॉर्टिंग एंबुलेंस (आईईए) ग्रुप देश के 80 शहरों में मिशन की तरह इस काम में जुटा हुआ है। इसके 2000 से ज्यादा सदस्य हैं। सभी के पास अपनी मोटरसाइकिल है।

 

इसके लिए किसी तरह की फीस नहीं ली जाती। सभी स्वैच्छिक रूप से काम करते हैं। एंबुलेंस को जल्दी पहुंचाने के लिए दो बाइकर आगे और दो पीछे चलते हैं। आगे वाले बाइकर्स एंबुलेंस के आगे चल रही गाड़ियों को हटाते हैं।

2017 से शुरू की थी एस्कॉर्ट सेवा

  1. इंडोनेशिया के शहरों में सड़कों पर भीड़ रहती है। रिपोर्ट्स से पता चलता था कि समय पर इलाज न मिलने से कई लोग बच नहीं पाते। 2017 में संकल्प लिया कि देर से इलाज मिलने की वजह से किसी की जिंदगी खत्म नहीं होने देंगे। शुरुआत जकार्ता में 50 सदस्यों के साथ हुई थी। अब एंबुलेंस के अस्पताल पहुंचने का समय 30-40% तक कम हुआ है।

  2. देशभर के सभी प्रमुख अस्पतालों में हमारे ग्रुप के सदस्यों के नंबर मौजूद हैं। एंबुलेंस ड्राइवर सूचना मिलते ही हमें जगह, रूट और मरीज की स्थिति के बारे में बताते हैं। एंबुलेंस तक 3 से 4 बाइकर्स कुछ ही समय में पहुंच जाते हैं। कई बार तो सदस्य अलर्ट न मिलने पर भी रास्ते में अचानक किसी एंबुलेंस को ट्रैफिक में फंसा देख, उसे निकालने में मदद करते हैं।

  3. इंडोनेशियन एस्कॉर्टिंग एंबुलेंस के फाउंडर नोवा विद् यात्मोको बताते हैं, बाइकर्स ग्रुप भूकंप, बाढ़ जैसी आपदाओं में भी मदद करता है। ऑपरेशनल खर्च वॉलंटियर्स उठाते हैं, फाउंडर समेत कई सदस्यों के पास अभी जॉब नहीं है। जल्द ही जरूरतमंद लोगों के लिए मुफ्त एंबुलेंस सर्विस भी शुरू करने जा रहे हैं। 

  4. इनरिक्स ग्लोबल ट्रैफिक स्कोरकार्ड-2018 के मुताबिक ट्रैफिक की बुरी स्थिति के मामले में इंडोनेशिया 12वें नंबर पर है। यहां एक व्यक्ति सालभर में औसत 63 घंटे ट्रैफिक कंजेशन में बिताता है। 40 किमी जाने में दो घंटे लग जाते हैं।

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