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जलवायु परिवर्तन को स्कूली पाठ्यक्रम में जोड़ने वाला इटली दुनिया का पहला देश बना

2 वर्ष पहले
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प्रतीकात्मक फाेटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फाेटो।
  • अगले साल सितंबर से इटली के स्कूली पाठ्यक्रम में जलवायु परिवर्तन को शामिल किया जाएगा
  • शिक्षा मंत्री लॉरेंजो फिओरामोंटी की घोषणा के मुताबिक, सप्ताह में एक घंटे इस मुद्दे पर क्लास होगी
  • इधर, भारत में भी वन और पर्यावरण मंत्रालय स्कूल नर्सरी प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है, इसमें बच्चे खुद रोपेंगे पौधे

राेम/नई दिल्ली . इटली दुनिया का पहला देश, जिसने ‘जलवायु परिवर्तन’ का विषय स्कूली पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल किया है। शिक्षा मंत्री लॉरेंजो फिओरामोंटी ने घोषणा की है कि अगले शिक्षण सत्र से सप्ताह में कम से कम एक घंटा जरूर इस मुद्दे पर दिया जाएगा। अगला शिक्षण सत्र सितंबर से शुरू होगा। इतना ही नहीं, स्थिरता और जलवायु को शिक्षा मॉडल का केंद्र बनाने के लिए पूरे मंत्रालय को भी बदला जा रहा है, लेकिन हम पारंपरिक विषय जैसे- भूगोल, गणित और भौतिकी की पढ़ाई को पहले की तरह जारी रखेंगे।
 
विपक्ष के निशाने पर लॉरेंजो
फिओरामोंटी ने कहा, मैं इटली की स्कूली शिक्षा प्रणाली को पर्यावरण और समाज में सीखी गई चीजों के मूल में रखने वाली व्यवस्था सबसे पहले लागू करना चाहता हूं, ताकि आने वाली पीढ़ी इस त्रासदी को समझ सकें। हालांकि, अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे इटली के 42 वर्षीय शिक्षा मंत्री लॉरेंजो हालांकि इस फैसले के बाद विपक्षी दलों के निशाने पर आ गए हैं।
 
पहले भी विवादों में रहे लॉरेंजो
डेढ़ माह पहले सितंबर में उन्होंने खुद छात्रों से स्कूल छोड़कर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कदम नहीं उठाने पर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए कहा था। छात्रों को प्रदर्शन में भाग लेने के लिए प्राेत्साहित करने पर देशभर में उनकी जमकर आलोचना हुई थी।
 

भारत में 2003 से पर्यावरण पढ़ रहे बच्चे
इधर, भारत में जलवायु परिवर्तन को लेकर स्कूल में अलग से कोई विषय नहीं है। यह इंटीग्रेटेड फॉर्म में पढ़ाया जाता है। विज्ञान, भूगोल जैसे विषयों के साथ ही जरूरत के हिसाब से पर्यावरण शिक्षा को इसमें समाहित किया गया है। इस बारे में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के डायरेक्टर ऋषिकेश सेनापति ने बताया कि 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा को लेकर आदेश दिया था, जिसमें स्कूलों में पर्यावरण को अनिवार्य रूप से पढ़ाने की बात कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट के सुपरविजन में इस दिशा में काम शुरू हुआ है। 
 

देश में प्राइमरी के बच्चे खुद रोपेंगे पौधे, देखभाल का जिम्मा भी उनका
वन और पर्यावरण मंत्रालय देशभर में प्राइमरी स्कूल के बच्चों के लिए अगले सत्र से ‘स्कूल नर्सरी’ प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है। वन विभाग के सहयोग से बच्चे बीज रोपकर पौधे लगाएंगे और उसकी देखरेख करेंगे। पौधे लगाने वाले बच्चों को साल के अंत में परीक्षा पास करने के बाद ट्रॉफी के रूप में उसके द्वारा लगाया गया पौधा दिया जाएगा। 
 

नीरी ने शुरू किया भारत का पहला वायु प्रदूषण वेब कोष
नेशनल एनवॉयरन्मेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) ने भारत का पहला वेब रिपॉजिटरी (कोष) शुरू किया है। इसमें इंडियन एयर क्वालिटी इंटरैक्टिव रिपॉजिटरी ने 1950-1999 के दौर के करीब 700 स्कैन्ड डॉक्यूमेंट्स,1215 शोध लेख, 170 केस स्टडीज, 100 केस और 2000 से ज्यादा स्टेच्यू को संजोया है। ताकि देश में वायु प्रदूषण संबंधी अनुसंधान और इससे संबंधित कानूनों के इतिहास की जानकारी मुहैया कराई जा सके। यह वायु प्रदूषण को लेकर बनाया गया दुनिया का पहला कोष है।

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